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धर्म

आशिक अली का कदीमी अलम का जुलूस निकाला

शहर की तंग गलियों से गश्त करता हुआ जुलूस देर रात रजबी रोड पर समाप्त हुआ, बैंडबाजों ने कर्बला में इमाम हुसैन की शहादत की याद में मातमी धुन बजाईं,

कानपुर। मोहर्रम की तीन तारीख शुक्रवार को फूलवाली गली इमामबाड़ा सादिक अली रजबी रोड से आशिक अली का कदीमी अलम का जुलूस निकाला गया। यह जुलूस शहर में 112 साल से निकल रहा है।

जुलूस इफितखाराबाद,  टुकनियापुरवा, इकबाल लाइब्रेरी, बांसमण्डी होता हुआ बेकनगंज, नई सड़क से परेड, यतीमखाना रोड, कंघी मोहाल, नाला रोड, मोहम्मद अली पार्क से गुजरता हुआ मूलगंज, तलाक महल से दादामियां चौराहा होता हुआ हीरामन का पुरवा करीब दस बजे रात को पहुंचा। यहां से वापस सादिक शाह बाबा मज़ार फूलवाली गली मे पहुंचकर समाप्त हुआ। जुलूस में घोड़े व ऊंट मोहर्रमी रंगों से सजे हुए चल रहे थे। जुलूस में शामिल बच्चे बच्चे नारा-ए-तकबीर, नारा-ए-रिसालत, नारा-ए-हुसैनी, नारा-ए-हैदरी की सदाएं लगा रहे थे। दर्जनों अलम हरे लाल पटकों के साथ अकीदतमन्द लेकर चल रहे थे। करीब 50 इस्लामी परचम जुलूस की शान बढ़ा रहे थे। लाउडस्पीकर पर नौहा और नात बजाई जा रही थीं। जुलूस में शामिल बैण्ड मातमी धुनों से नवासए रसूले आजम हज़रत इमाम हुसैन और कर्बला के 72 शहीदों को खिराजे अकीदत पेश कर रहे थे। जुलूस में या हुसैन की सदाएं लगाई जा रही थीं। जुलूस का जगह-जगह रोककर इस्तकबाल किया गया। पूरे रास्ते तर्बरूक बांटा जा रहा था। चाय और पानी भी वितरित किया गया। अलम के दर्शन के लिए हजारों लोग सड़क के दोनों ओर खड़े थे।

 

 

पैगंबर-ए-इस्लाम को तबलीग के दौरान दुश्वारी उठानीं पड़ीं

दूसरी ओर शिया और सुन्नी समुदाय के इमामबाड़ों,  मस्जिदों और घरों में मजलिसे हुसैन व जिकरे शहादतैन और मातम शहीदाने कर्बला का सिलसिला जारी है जिसमें रोशन नगर, कर्नलगंज, पटकापुर, जूही, सकेरा स्टेट, के०डी०ए० कालोनी, जाजमऊ,  ग्वालटोली मकबरा, चमनगंज, बेकनगंज, हीरामन का पुरवा आदि में सुबह 8 बजे से रात 12 बजे तक मजलिस का सिलसिला जारी है। इमाम बारगाह आगामीर मकबरा ग्वालटोली की मजलिसे अज़ा को खिताब करते हुए लखनऊ के मौलाना ज़हीर अब्बास साहब ने जनाबे जैनब के दोनों बेटों हज़रत औन और मोहम्मद की कर्बला के मैदान में शहादत बयान की।

उन्होंने कहा कि पैगंबरे इस्लाम (स०अ०) को कदम-कदम पर इस्लाम की तबलीग करने के दौरान इस्लाम दुश्मन ताकतों का सामना करना पड़ा था लेकिन कर्बला के मैदान में एक तरफ यजीद झूठी ताकतों की नुमाइन्दगी कर रहा था वहीं हज़रत इमाम हुसैन के हाथों में इस्लाम का परचम था। मैदाने कर्बला में यजीद की इस्लाम दुश्मन योजनाओं को पराजित करके हज़रत हुसैन ने अपनी अजीम कुर्बानी पेश की जिससे सच्चाई इस्लाम और मानवता का झण्डा हमेशा के लिए बुलन्द कर दिया।

शहर की मजलिसों में मिर्जा शहनशाह हुसैन, डा जुल्फिकार अली रिजवी, ताज कानपुरी, आसिफ अब्यास, क़ैसर रिज़वी,इब्ने हसन ज़ैदी,पप्पू मिर्जा, नवाब मुमताज, डॉ एयाज़ हैदर रिज़वी,नकी हैदर, एमन रिज़वी, मुन्तज़िर हसन,मिर्जा हैदर रजा, कुमैल नमाजी, अफसर हुसैन, सैयद शमीम हैदर,एहसान हुसैन ,जवाज़ हैदर रिज़वी आदि मौजूद थे।

 

इमाम-बारहार-आगामीर-में-मजलिस-को-खिताब-करते-मौलाना-जहीर-अब्बास
इमाम-बारहार-आगामीर-में-मजलिस-को-खिताब-करते-मौलाना-जहीर-अब्बास
जुलूस-में-शामिल-अलम
जुलूस-में-शामिल-अलम
शहर की-तंग-गलियों-से-निकलता-अलम-का-जुलूस
शहर की-तंग-गलियों-से-निकलता-अलम-का-जुलूस

 

हजरत अली के मशवरा पर बना हिजरी कैलेंडरः मुफ्ती

कानपुर। मक्का मस्जिद में जुमे की नमाज से पहले इमाम मुफ्ती मोईनुद्दीन ने इस्लामी हिजरी कैलेंडर के पहले महीने मोहर्रम की अहमियत बयान की।

उन्होंने कहा कि इस्लाम से पहले भी ईस्वी कैलेंडर चलता था लेकिन बाद में खलीफाओं ने इस्लामी कैलेंडर बनाने की बात की। इस पर हजरत अली ने मशवरा दिया कि अल्लाह के रसूल की हिजरत से इसका आगाज किया जाए। यह बात अन्य खलीफाओं ने भी मान ली। इसीलिए इसका नाम हिजरी कैलेंडर पड़ा। हिजरी कैलेंडर का पहला महीना मोहर्रम है।

उन्होंने कहा कि लोग अपने बच्चों को भी हिजरी कैलेंडर के बारे में बताएं। उनको इस्लामी महीनें और दिनों के नाम भी याद कराएं। इस्लाम में इसी के मुताबिक त्योहार भी मनाए जाते हैं। इस महीने में हजरत इमाम हुसैन की शहादत भी हुई। अल्लाह के रसूल मोहर्रम की दस तारीख यानि यौमे आशूरा को रोजा ऱखते थे। इसलिए लोग मोहर्रम की नौ, दस या दस, ग्यारह को रोजा रखें।

 

ASIF HUSAIN

ASIF HUSAIN EDITOR मैंने अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी से हिंदी साहित्य में परास्नातक (मास्टर) करने के बाद ट्रांसलेशन में पीजी डिप्लोमा किया। इसके बाद पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया। 1997-98 में राष्ट्रीय सहारा में ट्रेनिंग की। इसके बाद 1998 में अमर उजाला कानपुर में ज्वाइन किया। अमर उजाला में कानपुर में रिपोर्टिंग की। गाजीपुर, चंदौली, भदोही, इटावा में ब्यूरोचीफ के पद पर रहा। इसके अलावा मुरादाबाद में संभल डेस्क प्रभारी रहा। झांसी में देहात डेस्क प्रभारी रहा। साथ में कई महत्वपूर्ण कार्यक्रमों की रिपोर्टिंग की। 2023-24 में अमर उजाला में सीनियर सब एडिटर पद से स्वैच्छिक रिटायरमेंट लिया। इसके बाद अपना यूट्यूब चैनल ‘ब्रिलियंट टाइम’ नाम से बनाया। वीकली अखबार भी इसी नाम से निकाला। ‘द्वाबा सम्राट हिंदी दैनिक’ में देश और विदेश पर लेख लिखे। वर्तमान में हिंदुस्तान संदेश से बतौर एडिटर जुड़ा हूं।

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