वृक्षारोपण और संरक्षण गतिविधियों में भागीदारी कर हरित उत्तर प्रदेश के निर्माण में योगदान दे- डॉ विनोद बिंद

भदोही सांसद डॉ विनोद बिंद ने एक पेड़ मां के नाम लगाकर किया पौधरोपण
चन्दौली । विश्व पर्यावरण दिवस के उपलक्ष्य में राज्य भर में आयोजित ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान में भदोही सांसद डॉ विनोद बिंद ने मुग़लसराय स्थित गोधना मोड़ के समीप प्लाट पर मां के नाम नीम व अखरोट का पेड़ लगाकर इसकी शुरुआत करने के साथ ही वे अपने लोकसभा क्षेत्र में भी कई जगह पेड़ लगाए । उन्होंने लोकसभा क्षेत्र भदोही के सरदार वल्लभभाई पटेल व्यायामशाला, गोहिलाव (औराई) में आयोजित कार्यक्रम में सहभागिता कर वृक्षारोपण किया। पर्यावरण संरक्षण एवं हरित भविष्य के निर्माण हेतु अधिक से अधिक वृक्ष लगाने और उनकी देखभाल करने का संकल्प लिया। सभी क्षेत्रवासियों से भी पर्यावरण संरक्षण के इस महाअभियान में सहभागी बनने का आग्रह करने के साथ ही
इस अभियान में सभी लोगो को सक्रिय रूप से भाग लेने का आह्वान किया है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे अपनी मां के नाम पर कम से कम एक पौधा लगाएं और उसकी देखभाल और सुरक्षा की जिम्मेदारी लें।

डॉ विनोद बिंद ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू की गई पहल को पूरे देश में जबरदस्त प्रतिक्रिया मिली। उन्होंने कहा कि यह कार्यक्रम न केवल पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देता है बल्कि माताओं के प्रति सम्मान और कृतज्ञता का भी प्रतीक है। उन्होंने शैक्षणिक संस्थानों, युवा संगठनों, स्वैच्छिक समूहों और सामाजिक सेवा संगठनों को शामिल करके इसे एक जन आंदोलन में बदलने का आह्वान करते हुए लगाए गए पौधों के अस्तित्व और विकास को सुनिश्चित करने के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान की शुरुआत 5 जून 2024 को विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर की थी । इस अभियान का शुभारंभ उन्होंने नई दिल्ली के बुद्ध जयंती पार्क में अपनी माँ को श्रद्धांजलि स्वरूप पीपल का पेड़ लगाकर किया था । डॉ बिंद ने समाज के सभी वर्गों से वृक्षारोपण और संरक्षण गतिविधियों में निरंतर भागीदारी के माध्यम से हरित उत्तर प्रदेश के निर्माण में योगदान देने की अपील की। सांसद डॉ विनोद बिंद ने आव्हान किया कि हम सभी अपने घर, पार्क, सार्वजनिक स्थान, मंदिर में एक पेड़ अपनी मां के नाम लगाए, यह संदेश घर-घर जाना चाहिए । हमारी लाइफ स्टाइल भी पर्यावरण के अनुकूल हो हमारे जीवन के हर क्षण को पर्यावरण के अनुकूल जिएंगे तो आने वाली पीड़ी को कुछ दे पाएंगे ।



