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उत्तर प्रदेश

लखनऊ, नोएडा, अयोध्या और वाराणसी सहित 20 जिलों में जाम कम करने के लिए  बना प्लान

अजीत पांडेय / लखनऊ । उत्तर प्रदेश के बड़े शहरों में रोज़ लगने वाले जाम से जूझ रहे लोगों के लिए अब राहत की एक नई आस जगी है। सड़कों पर घंटों रेंगते वाहनों,बढ़ते प्रदूषण और समय की बर्बादी के बीच यूपी की ट्रैफिक व्यवस्था को सुधारने के लिए एक तकनीक-आधारित पहल की शुरुआत की गई है। उत्तर प्रदेश के 20 जिले में पुलिस की यातायात शाखा ने सिटी-रिड्यूसिंग ट्रैफिक कंजेशन योजना लागू की है। 172 प्रमुख मार्गों पर एआई तकनीक,रूट मार्शल और 5E मॉडल के जरिए यातायात को सुचारु बनाने की कोशिश होगी।इस योजना से पीक आवर्स में यात्रा समय घटाने,ईंधन बचाने और प्रदूषण कम करने का लक्ष्य रखा गया है।एक महीने बाद इसकी समीक्षा कर आगे विस्तार की रणनीति तय की जाएगी। तेजी से बढ़ता हुआ शहरीकरण और वाहनों की संख्या में लगातार हो रहे इजाफा ने यातायात की समस्या को गंभीर बना दिया है।सुबह और शाम के समय में स्थित ऐसी हो जाती है कि कुछ किलोमीटर का सफर तय करने में भी लंबा समय लग जाता है।यातायात विभाग के अध्ययन में सामने आया कि एक ही सड़क पर अलग-अलग समय में यात्रा का समय काफी बदल जाता है,यही कारण है कि ऐसे मार्गों को चिन्हित किया गया,जहां जाम की समस्या सबसे ज्यादा और बार-बार होती है।इस समस्या का समाधान सिर्फ पारंपरिक तरीकों से संभव नहीं था, इसलिए तकनीक और बेहतर प्रबंधन को जोड़कर यह नई योजना तैयार की गई है। सी-आरटीसी योजना के तहत इन जिलों को शामिल किया गया है,इसमें आगरा, अलीगढ़, अयोध्या,बरेली, कानपुर, लखनऊ, मेरठ, प्रयागराज, वाराणसी, गाजियाबाद, गौतम बुद्धनगर  (नोएडा) समेत कुल 20 जिले शामिल हैं।इन जिलों में 172 ऐसे मार्ग चिन्हित किए गए हैं,जहां ट्रैफिक का दबाव सबसे ज्यादा रहता है।कानपुर में सबसे ज्यादा 14, गाजियाबाद और गौतमबुद्धनगर में 12-12, लखनऊ, मेरठ, प्रयागराज, वाराणसी सहित कई जिलों में 10-10 मार्ग चुने गए हैं, इन मार्गों पर खास रणनीति के तहत काम किया जाएगा ताकि जाम की समस्या को जड़ से कम किया जा सके। सी-आरटीसी योजना की सबसे खास बात है मार्ग प्रबंधक प्रणाली,हर चिन्हित मार्ग के लिए एक मार्ग प्रबंधक नियुक्त किया जाएगा,जो उस मार्ग पर ट्रैफिक व्यवस्था की पूरी जिम्मेदारी संभालेगा।ये मार्ग प्रबंधक आमतौर पर यातायात निरीक्षक या उपनिरीक्षक स्तर के अधिकारी होंगे,जिन्हें उस क्षेत्र की बेहतर समझ और अनुभव होगा,उनकी जिम्मेदारियों में यातायात प्रवाह को सुचारु रखना,जाम के कारणों की पहचान करना,मौके पर तुरंत समाधान लागू करना और स्थानीय थाना और क्षेत्रीय अधिकारियों के साथ समन्वय करना है और जरूरत पड़ने पर मार्ग प्रबंधक अन्य यातायात ड्यूटी भी निभा सकेंगे,जिससे संसाधनों का बेहतर उपयोग हो सके।

सी-आरटीसी योजना को प्रभावी बनाने के लिए 5E मॉडल अपनाया गया है,जो यातायात प्रबंधन का एक व्यापक तरीका माना जाता है,इसमें शिक्षा और जागरूकता,लोगों को यातायात नियमों के प्रति जागरूक करना,जिससे वे खुद भी जाम कम करने में योगदान दें,सख्त कार्रवाई।नियम तोड़ने वालों पर सख्ती बढ़ाई जाएगी,ताकि अनुशासन बना रहे, सड़कों की संरचना,संकेत प्रणाली और तकनीक का इस्तेमाल कर यातायात को बेहतर बनाना है।सी-आरटीसी योजना की एक और बड़ी खासियत है एआई का इस्तेमाल करना,इस तकनीक के जरिए किसी भी मार्ग पर न्यूनतम,अधिकतम और औसत यात्रा समय का डेटा मिलेगा।यातायात की स्थिति को ग्राफ और तालिका में देखा जा सकेगा,जाम वाले स्थानों की पहचान आसान होगी।नोडल अधिकारी अपने स्मार्टफोन के जरिए तात्कालिक रूप से यातायात की स्थिति देख सकेंगे और तुरंत निर्णय ले सकेंगे,इससे मौके पर ही समस्या का समाधान करना आसान होगा। सी-आरटीसी योजना का सीधा फायदा आम लोगों को मिलने की उम्मीद है।बताया जा रहा है कि इससे यात्रा का समय कम होगा साथ ही ईंधन की बचत होगी और प्रदूषण में कमी आएगी।एंबुलेंस और अग्निशमन सेवा जैसी आपात सेवाओं को रास्ता भी आसानी से मिलेगा,इसके अलावा रोज़ाना कार्यालय या काम पर जाने वाले लोगों को भी बड़ी राहत मिल सकती है।यातायात निदेशालय ने साफ किया है कि यह योजना सिर्फ लागू कर छोड़ देने वाली नहीं है।पहले चरण में लागू किए गए 20 जिलों में एक महीने बाद इसका विस्तृत मूल्यांकन किया जाएगा।

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