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राजनीतिवाराणसी

वाराणसी : बीजेपी की कथनी और करनी में अंतर- सुरेंद्र पटेल

अजीत पाण्डेय । भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के लोकतांत्रिक होने या न होने पर बहस जारी है। आलोचकों का तर्क है कि केंद्रीकृत सत्ता, वैचारिक कट्टरता, और आंतरिक लोकतंत्र की कमी, जैसे कि स्थानीय स्तर पर अध्यक्ष के चुनाव में देरी, लोकतांत्रिक मूल्यों को कमजोर करती है। वहीं, पार्टी खुद को विश्व की सबसे बड़ी लोकतांत्रिक और वैचारिक पार्टी मानती है।लोकतांत्रिक न होने के दावों के उल्लेख करते हुवे सपा के कदावर नेता तथा पूर्व मंत्री सुरेन्द्र पटेल कहा की  भाजपा विरोधी ताकतों को एकजुट करने की कोशिश के तहत जनता परिवार के बिखरे समूहों की एकता की वकालत कर रहे समाज वादी पार्टी के वरिष्ठ नेता व पूर्व मंत्री सुरेंद्र पटेल ने कहा है कि एक जैसे सिद्धांत एवं विचारधारा वाली सभी पार्टियों को एक साथ आना चाहिए ताकि देश के लिए खतरनाक भगवा पार्टी की ‘‘विभाजनकारी’’ विचारधारा का मुकाबला किया जा सके।धर्मांतरण एवं अन्य विवादों से जुड़े सवालों के जवाब देते हुए श्री पटेल ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘इसे (भाजपा को) अलग-थलग करना होगा क्योंकि इसकी विचारधारा देश के लिए ज्यादा खतरनाक है। हमें एकजुट होकर साथ आना चाहिए। भाजपा की विचारधारा मुख्यधारा की विचारधारा नहीं है। उनका मकसद समाज को बांटना है। दूसरों को एकजुट होने की जरूरत है।’’ तथा इनको सहयोग कर रही व निचले स्तर की पार्टियों चिंतन मनन करने बहुत आवश्कता है श्री पटेल ने प्रमुखता के साथ कहा कि समाज को बांटने वाली भाजपा की सांप्रदायिक नीतियों के प्रतिरोध के लिए एक जैसे सिद्धांत एवं विचारधारा के लोगों को एक साथ आना चाहिए। इनके गुमराह नीति से हुई टूट की देश को भारी कीमत चुकानी पड़ी है क्योंकि इससे भाजपा का उदय हुआ।यह पूछे जाने पर कि क्या वह भाजपा के मुकाबले के लिए कांग्रेस को अपने साथ लाने की कोशिश करेंगे, इस पर श्री पटेल ने कहा, ‘‘अब हम सभी बिखरे समूहों के महाविलय पर ध्यान दे रहे हैं। विलय के बाद हम समाजवादी आंदोलन के विकास के लिए सभी अनुकूल विकल्पों को आजमाना चाहेंगे और भाजपा की विचारधारा को विकसित होने से रोकेंगे।’’वाम दलों के बारे में पूछे जाने पर उन्होने ने कहा कि उनके साथ राष्ट्रीय स्तर पर अच्छे संबंध हैं और ‘‘वे स्वाभाविक सहयोगी हैं।’’श्री पटेल ने कहा कि समाजवादी नेताओं की तरफ से कहीं न कहीं चूक हुई जिसकी वजह से भारत जैसे देश में इच्छित विकास नहीं हो सका जहां की आबादी में गरीब और मजदूर बड़ी संख्या में हैं और भाजपा ने इसी कमी का फायदा उठाया। और बताया, कि इसी ‘‘टूट के बाद लोगों का एक बड़ा तबका भाजपा में शामिल हो गया।’’ उन्होंने कहा कि अब उन्हें भाजपा में शामिल होने की अपनी भूल का अहसास हुआ है और वे समाजवादी संगठनों में वापस आने लगे हैं।धर्मांतरण के मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए उन्होंने ने कहा कि उन्हें संसद में सरकार का रुख साफ करना चाहिए था। जबकि ‘‘मोदी सरकार इस मुद्दे पर अपना रुख साफ नहीं करना चाहते है

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