
महायज्ञ की पूर्णाहुति एवं विशाल भंडारा होगा 27 फरवरी को
त्रिलोकी नाथ राय /गाजीपुर।भांवरकोल ब्लॉक अंतर्गत क्षेत्र के शेरपुर खुर्द गांव में आयोजित दिव्य महामृत्युंजय यज्ञ के पावन अवसर पर जगतगुरु शंकराचार्य अनंतानंद सरस्वती ने कहा कि भक्ति ही ज्ञान और वैराग्य की जननी है। उन्होंने कहा कि भक्ति, ज्ञान और वैराग्य आध्यात्मिक जीवन के प्रमुख स्तंभ हैं, जो एक-दूसरे के पूरक हैं। स्वामी जी ने समझाया कि भक्ति हृदय का मार्ग है, जो ईश्वर के प्रति अगाध प्रेम, श्रद्धा और पूर्ण समर्पण सिखाती है। भक्ति मनुष्य को भगवान से जोड़ती है और उसके भीतर सेवा व करुणा का भाव जागृत करती है। उन्होंने कहा कि ज्ञान बुद्धि और विवेक का मार्ग है, जो मनुष्य को यह बोध कराता है कि वह केवल शरीर नहीं, बल्कि अमर आत्मा है। ज्ञान से मन शुद्ध होता है और जीवन के वास्तविक सत्य का अनुभव होता है। वहीं वैराग्य त्याग और अनासक्ति का मार्ग है, जो मनुष्य को संसार की मोह-माया और क्षणभंगुर सुखों से ऊपर उठकर आत्मिक उन्नति की ओर प्रेरित करता है। उन्होंने श्रीमद्भागवत महापुराण का उल्लेख करते हुए बताया कि उसमें भक्ति को माता तथा ज्ञान और वैराग्य को उसके दो पुत्रों के रूप में वर्णित किया गया है। जहां सच्ची भक्ति होती है, वहां ज्ञान और वैराग्य स्वतः ही प्रकट हो जाते हैं। स्वामी जी ने कहा कि भगवद गीता में भी भक्ति योग को अत्यंत सुगम और श्रेष्ठ मार्ग बताया गया है। भगवान श्रीकृष्ण ने ‘ज्ञानी भक्त’ को अपना अति प्रिय बताया है, जिसमें ज्ञान और भक्ति का सुंदर समन्वय होता है। उन्होंने कहा कि आध्यात्मिक पूर्णता के लिए भक्ति, ज्ञान और वैराग्य तीनों आवश्यक हैं, किंतु भक्ति मूल शक्ति है। जब हृदय में सच्चा भगवद प्रेम जागृत होता है, तो ज्ञान से विवेक और वैराग्य से संयम स्वतः जीवन में उतर आते हैं। इस अवसर पर नरेन्द्र भार्गव, विजय शंकर राय, हेमनाथ राय, रमेश राय, डा० सुरेश राय, राजेश राय बागी, मिथिलेश राय, आनंद राय पहलवान, त्रिलोकी नाथ राय महादेव, ओमप्रकाश मिश्र, चिंन्टू चौधरी, डा० आलोक राय, नारायण राय, धनंजय राय, रितेश राय, भरत यादव, सुदामा यादव, नरेंद्र राय, दीपू राय, रोशन राय, संजीव राय, आशीष राय, अंजनी राय मुन्ना, राहुल राय, और अन्य कई श्रद्धालु उपस्थित रहे।



