मिर्जापुर : आसमान पे थूकने वाला,,खुद ही मुंह की खायेगा…

तारा त्रिपाठी (मीरजापुर)।नये वर्ष की पूर्व संध्या पर श्री भवन में एक भव्य और शानदार कवि गोष्ठी का आयोजन किया गया। गोष्ठी में क्षेत्र के कई रचनाकार और साहित्य प्रेमी उपस्थित रहे तथा कवियों द्वारा प्रस्तुत की गई रचनाओं का लुत्फ उठाये। गोष्ठी की अध्यक्षता ज्योतिषाचार्य पंoचन्द्रमौली त्रिपाठी ने की और संचालन वरिष्ठ पत्रकार हौसिला प्रसाद त्रिपाठी ने किया। सर्वप्रथम आपरेशन सिन्दूर “पर अपनी रचना प्रस्तुत करते हुए प्रमोद केशरी “अतुल “ने कहा कि- आसमान पे थूकने वाला, खुद ही मुंह की खायेगा। बुरे कर्म का बुरा नतीजा, बेशक तू भी पायेगा। आयत तुम कुरान की पढ़ लो, पढ़ लो या कोई, कलमा, बोये तुम बबूल अगर हो, तो आम कहां से आयेगा। इन पंक्तियों ने श्रोताओं की सोई उर्जा में जान फूंक दिया और लोग आतंकवाद के खिलाफ उठ खड़े होने को सोचने पर बाध्य हो गये। फिर “अतुल “ने नये वर्ष पर अपनी दुसरी कविता सुनाते हुए कहा कि-ले लो सब कुछ मेरा। करो दिल से दूर अंधारा । छू लो अम्बर को जाओ, अब आया नया सबेरा। इस रचना पर श्रोता गण अपनी तालियां बजाने से नहीं रोक पाये वाह-वाह करने से अपने को नहीं रोक पाये। उपस्थित डाक्टर अरुण प्रकाश द्विवेदी ने अपनी भोजपूरी कविता सुनाते हुए यह कहकर लोगों को बांधे रखा कि- ए बाबू मुल्लर हो,चल अइह गांवे।पंडित बतैले हंव,बुद्धे क फेर बा। स्वास्थ रही अच्छा, पर शिक्षा में देर बा। लोगो को ठहाका लगाने को. मजबूर कर दिया और ग्रामीण चित्रण की तरफ खींच लाई। इसके बाद अमरेशचन्द्र पाण्डेय ने कुछ इस तरह कहा कि मन क्यों होता अधीर ,हदय में धीर धरा।
श्रोताओ को गम्भीर बना दिया और उन्हें खुब सराहा गया। संचालन कर रहे हौसला प्रसाद त्रिपाठी ने अपनी लचना सुनाते हुए कहा कि- मैं जीवन में कुछ कर न सका। देखा जब उनको गड़ी में कुछ नीली पीली साड़ी में। इस रचना ने लोगों को खूब हंसाया और ठहाके लगवाया। अपने स्वभाव के अनुरुप वो कई ऐसे वक्तव्य प्रस्तुत किये कि हर बार लोग अपनी हंसी नहीं रोक पाते रहे और माहौल अंत तक खुशनुमा बना रहा। अंत में अध्यक्षता कर रहे ज्योतिषाचार्य पंoचन्द्रमौली त्रिपाठी ने सभी को आशीष देते हुए कुछ इस तरह कहा कि-अर्श हो या फिर फर्श।
या हो कितनो संघर्ष । जीवन में सबके हो, हर वक्त हर्ष ही हर्ष। यह सुन लोग अभीभूत हो गये। गोष्ठी में क्षेत्र के लगभग दर्जन भर कवियों ने काव्य पाठ किया। इस अवसर पर श्रोताओ में नीरज पाण्डेय, गोपाल दास गुप्ता, विजय शंकर तिवारी, पत्रकार आत्मा प्रसाद त्रिपाठी,विकास पाण्डेय नन्दलाल सिंह, दिनेश सिंह, चन्द्रलोकी, जटाशंकर लाल श्रीवास्तव, सूर्यभान सिंह, कल्लू,शम्भू नाथ तिवारी सहित सैकड़ों लोग उपस्थित रहे ।गोष्ठी सायंकाल 6बजे से रात्रि 9बजे तक चलती रही ।सभी लोग प्रस्तुत की गई कविताओं मे मंत्र मुग्ध होकर गोता लगाते रहे। कभी खिलखिलाते रहे तो कभी गम्भीर होते रहे। अंत में आयोजक महोदय ने सभी कवियों को अंग वस्त्रम देकर सम्मानित किया।




