
विदेश से आधा दर्जन कलाकारों ने लिया भाग
सुशील कुमार मिश्र/वाराणसी
हिंदुस्तान संदेश
“रोमानिया के ट्रांसिल्वेनिया स्थित इंटर-आर्ट संस्थान और काशी हिंदू विश्वविद्यालय के दृश्य कला संकाय के संयुक्त तत्वावधान में दो अंतरराष्ट्रीय कला प्रदर्शनियों का आरंभ दृश्य कला संकाय स्थित अहिवासी कला दीर्घा में हुआ है।प्रथम प्रदर्शनी का शीर्षक ‘कल्चरल इंप्रेशंस’ है, जो एक महत्वपूर्ण कला प्रदर्शनी है। इस वृहद प्रदर्शनी में 100 विभिन्न देशों के प्रतिनिधियों के रूप में एक सौ कलाकारों की कलाकृतियों का प्रदर्शन किया गया है। ये कलाकार विश्व के 6 महाद्वीपों से आते हैं, जो कि एक अनूठा सांस्कृतिक समन्वय प्रस्तुत करते हैं। प्रदर्शनी के क्यूरेटर दृश्य कला के संकाय प्रमुख प्रोफेसर उत्तमा दीक्षित और स्टीफन बालोग बताते हैं कि वे इस प्रदर्शनी को विश्व के अनेक देशों में प्रदर्शित करना चाहते हैं। यहां प्रदर्शित सभी चित्र उनकी संस्था इंटर आर्ट के संग्रह से लिए गए हैं। इन चित्रों में प्रत्येक कलाकारों की अपनी व्यक्तिगत स्मृतियां, भावनाएं और अभिव्यक्तियां अलग-अलग मानव समूहों का प्रतिनिधित्व करतीं हैं। इससे पूर्व इसी प्रकार की प्रदर्शनियों का आयोजन न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र के मुख्यालय, जिनेवा के पैलेस ऑफ नेशंस, यूरोपीय संसद ब्रसेल्स, वॉशिंगटन स्थित वुड्रो विल्सन केंद्र और बुखारेस्ट स्थित पैलेस ऑफ़ पार्लियामेंट में किया जा चुका है। इस भ्रमणशील कला प्रदर्शनी का मुख्य उद्देश्य विश्व के विभिन्न देशों, संस्कृतियों और समुदायों के बीच सह-अस्तित्व और सांस्कृतिक समन्वय की भावना का प्रसार करना है। भारत में इस प्रदर्शनी को आयोजित करने का कार्य प्रसिद्ध कलाकार असित कुमार पटनायक और चित्रकला विभाग के सहायक आचार्य डॉ सुरेश चंद्र जांगिड़ ने किया है।
दूसरी कला प्रदर्शनी इस अंतरराष्ट्रीय कला प्रदर्शनी को भारत में लाने वाले रोमानियन कलाकार स्टीफन बालोग की 56 वीं एकल प्रदर्शनी हैं, जो इंटर-आर्ट संस्थान के अध्यक्ष भी हैं। एक कलाकार के रूप में उन्होंने इससे पूर्व 55 एकल प्रदर्शनियां रोमानिया, हंगरी, ऑस्ट्रिया, मिश्र, फिनलैंड, स्विट्जरलैंड, अमेरिका, हैती तथा भारत में आयोजित की हैं। ‘द अर्बन फ्रेगमेंट्स ग्राफिक एग्जीबिशन’ शीर्षक वाली इस प्रदर्शनी में उन्होंने अपनी ग्राफिक कला को प्रदर्शित किया है। इन ग्राफिक कलाकृतियों में ट्रांसिल्वेनिया की पतली गलियों, वहां के वातावरण से प्रभावित इमारतों और भू दृश्यों की स्मृतियां प्रस्तुत की गई हैं। इन दृश्यों को स्टीफन ने अपनी रेखाओं और टेक्सचर के अनूठे प्रयोग से जीवंत कर दिया है। ऐसा जान पड़ता है कि प्रत्येक रेखा अपने आप में एक नई कहानी कह रही है।
इन दोनों प्रदर्शनियों का उद्घाटन मुख्य अतिथि के रूप में काशी हिंदू विश्वविद्यालय के पर्यावरण एवं धारणीय विकास संस्थान के निदेशक प्रोफेसर ए. एस. रघुवंशी और रेडियोथैरेपी विभाग के अध्यक्ष डॉ. सुनील चौधरी द्वारा किया गया। इस अवसर पर दृश्य कला संकाय के प्रभारी प्रोफेसर ब्रह्म स्वरूप, प्रोफेसर जसमिंदर कौर, प्रोफेसर ललित मोहन अग्रवाल, शिल्पकार रितिका, डॉ महेश सिंह, श्री सुरेश नायर, डॉ ललित मोहन सोनी, डॉ आशीष गुप्ता समेत अनेक प्रमुख कलाकार, कला शिक्षक, शोधार्थी तथा विद्यार्थी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। ये दोनों प्रदर्शनियां 5 नवंबर तक अवलोकनार्थ उपलब्ध रहेगी।




