
बंगाल-वाराणसी विचार विनिमय कला प्रदर्शनी का शुभारंभ
सुशील कुमार मिश्र /वाराणसी
काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के दृश्य कला संकाय, चित्रकला विभाग एवं आरशी कोलकाता के संयुक्त तत्वावधान में “बंगाल-वाराणसी विचार विनिमय” कला प्रदर्शनी का शुभारंभ आज बीएचयू परिसर स्थित आहिवासी कला वीथिका में हुआ। यह आयोजन महामना पंडित मदन मोहन मालवीय जी की स्मृति को समर्पित रहा।प्रदर्शनी का उद्घाटन दृश्य कला संकाय की संकाय प्रमुख प्रो. उत्तमा दीक्षित ने किया। इस अवसर पर डॉ. गौतम चटर्जी, प्रख्यात कला पारखी तथा उस्ताद नासिर अब्बास बिस्मिल्लाह ख़ाँ (भारत रत्न उस्ताद बिस्मिल्लाह ख़ाँ के पौत्र) विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।कलाकारों की भागीदारी और कृतियाँ
इस प्रदर्शनी में बंगाल और वाराणसी से 60 से अधिक कलाकारों ने अपनी कृतियों के साथ भाग लिया। प्रदर्शनी में चित्रकला, मूर्तिकला और मुखौटों (Masks) की अनूठी शृंखला प्रदर्शित की गई, जिसने दर्शकों को पारंपरिक और समकालीन कला के सुंदर संगम से परिचित कराया। मुखौटों की प्रदर्शनी ने दर्शकों का विशेष ध्यान आकर्षित किया, जो क्षेत्रीय सांस्कृतिक धरोहर और कलात्मक रचनात्मकता का प्रतीक रही।
इस प्रदर्शनी मे आमंत्रित कलाकारों के रूप मे बंगाल से 07 तथा वाराणसी से 09 वरिष्ठ कलाकार सहभागिता कर रहे है | इनमे वाराणसी से प्रो० उत्तमा दीक्षित, श्री सुरेश नायर, डॉ॰ सुरेश जांगिड़, डॉ० महेश सिंह, डॉ० ललित मोहन सोनी, डॉ० आशीष गुप्ता, श्री विजय भगत, डॉ० राजीव मण्डल, डॉ० सुनील कुमार पटेल तथा बंगाल से श्री तपन कोनर, श्री प्रदीप मित्रा, श्री सुब्रत गंगोपाध्याय, श्री सलिल दास, श्री अर्धेंदु बनर्जी, श्री मृणाल कांति गायन, श्री श्यामल मुखर्जी आदि प्रमुख है | इनके अतिरिक्त बंगाल से 36 तथा वाराणसी से 15 युवा कलाकार भी प्रतिभाग कर रहे है |
समन्वय- आरषी कला संस्थान से सुमित गुहा और सोमा डे संयोजक है और काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के दृश्य कला संकाय से प्रदर्शनी का संयोजन डॉ. सुरेश चंद्र जांगिड़, डॉ. ललित मोहन सोनी, डॉ. सुनील कुमार पटेल (बीएचयू) ने किया।

प्रदर्शनी व सेमिनार-यह प्रदर्शनी 2 सितम्बर 2025 तक प्रतिदिन प्रातः 11:00 बजे से सायं 05:00 बजे तक आम दर्शकों के लिए खुली रहेगी। इसके अलावा, 29, 30] 31 अगस्त एवं 1 सितम्बर 2025 को दोपहर 02:30 से 04:15 बजे तक इंटरैक्टिव सेमिनार का आयोजन होगा, जिसमें कला विशेषज्ञ, विद्वान और छात्र समकालीन कला व सांस्कृतिक धरोहर पर संवाद करेंगे।
सारांश बंगाल-वाराणसी विचार विनिमय” प्रदर्शनी ने दोनों सांस्कृतिक केंद्रों—बंगाल और वाराणसी—की साझा विरासत को सामने लाते हुए कला प्रेमियों के लिए एक अद्भुत अनुभव प्रस्तुत किया। 50 से अधिक कलाकारों की भागीदारी और मुखौटों की विशेष प्रदर्शनी ने इस आयोजन को और भी जीवंत और आकर्षक बना दिया। बंगाल-वाराणसी विचार विनिमय कला प्रदर्शनी का आयोजन वाराणसी के ऐतिहासिक काशी हिन्दू विश्वविद्यालय परिसर में किया जा रहा है] जिसमें बंगाल और वाराणसी दोनों क्षेत्रों के कलाकार, विद्वान और छात्र समेकित रूप से अपनी कलाकृतिया प्रदर्शित कर रहे है | इस कार्यक्रम का उद्देश्य दोनों क्षेत्रों के बीच सांस्कृतिक संवाद और रचनात्मक तालमेल को तलाशना और उनकी अनूठी किन्तु परस्पर जुड़ी परंपराओं को प्रदर्शित करना है।कार्यक्रम के एक भाग के रूप में कला प्रदर्शनी आयोजित की जा रही है, जिसमें बंगाल और वाराणसी दोनों क्षेत्रों से प्रतिनिधि कृतियाँ प्रदर्शित की गयी है । यह प्रदर्शनी इस तथ्य पर प्रकाश डालती है कि किस प्रकार क्षेत्रीय सौंदर्यशास्त्र,आध्यात्मिक विरासत और समकालीन व्याख्याएँ मिलकर विचारों के एक जीवंत आदान-प्रदान को रूप प्रदान करती हैं।
इस पहल के माध्यम से, भारतीय कला और चिंतन के दो महान केंद्रों की साझा विरासत का उत्सव मनाते हुए, आपसी समझ, कलात्मक सहयोग और सांस्कृतिक समृद्धि को बढ़ावा देना है।




