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उत्तर प्रदेशएजुकेशनवाराणसी

BHU:दृश्य कला संकाय में हुआ सामूहिक प्रदर्शनी उद्घाटन

सुशील कुमार मिश्र/वाराणसी। काशी हिंदू विश्वविद्यालय के दृश्य कला संकाय स्थित अहिवासी कला दीर्घा में पांच युवा कलाकारों की सामूहिक प्रदर्शनी का आयोजन किया जा रहा है। बियोंड द सर्फेस शीर्षक वाली यह प्रदर्शनी 30 जुलाई तक जारी रहेगी। इस प्रदर्शनी में प्रदर्शित लगभग 40 चित्रों के माध्यम से इन  युवा कलाकारों ने व्यक्तिगत स्तर पर पर्यावरण, मानवता, समाज और परिवार के प्रति संवेदनशीलता की आवश्यकता को आवाज देने का प्रयास किया है।अरुणिमा मंडल ने अपने चित्रों के माध्यम से उन भावनात्मक संबंधों की और ध्यान आकर्षित किया है, जो दिन प्रतिदिन के कार्यों में अक्सर नजर अंदाज  कर दिए जाते हैं। इनका उद्देश्य बिखरते परिवारों के दर्द, बेचैनी और अलग होने के डर को अनुभव करना है। इसी प्रकार दिशा नंदी के चित्रों में आधुनिक शहरी जीवन के असुरक्षित माहौल तथा शोर शराबे के बीच मानवीय संवेदनाओं के मौन को आकार प्रदान किया गया है। उनके हाल ही के चित्र वाराणसी के परिवेश में जनसाधारण के बीच पवित्रता की खोज का प्रतिनिधित्व करते हैं। प्रीति राव मानव जीवन के परिवेश के बारे में अपने प्रश्न उठाती है। उनकी कृतियां सामाजिक, सांस्कृतिक, आर्थिक और राजनीतिक तत्वों के साथ उपभोक्तावाद के इस युग में आधुनिक मानव के व्यवहार पर टिप्पणी करतीं हैं। उनके चित्रों का उद्देश्य तथाकथित सभ्य मनुष्यों के बीच व्याप्त अलगाव को दर्शना है। इन सबसे आगे बढ़कर शरद दिवाकर मनुष्यों के प्रति ही नहीं अपितु पशुओं की प्रति भी समान रूप से संवेदनशीलता रखने के पक्षधर हैं। उनका मानना है कि पृथ्वी तथा इसके संसाधनों पर मानव के साथ-साथ समस्त जीव जगत का भी समान रूप से अधिकार है। परंतु आज की उपभोक्तावादी संस्कृति में पशुओं को वस्तु की तरह प्रयोग में लिया जा रहा है और अपनी स्वार्थ तथा उदरपूर्ति के लिए  निर्ममता पूर्वक वध किया जा रहा है। यशवंत चौरसिया चित्रांकन के अतिरिक्त अपनी अभिव्यक्ति को रुप प्रदान करने के लिए वुडकट तकनीक को अपनाते हैं। यशवंत कहते हैं कि कठिन समय में कला ने ही उन्हें भावनात्मक रूप से सहारा दिया है तथा जीवन का लक्ष्य प्रदान किया है। उनके चित्रों में कलात्मक अभिव्यक्तियों के साथ-साथ सामाजिक और व्यक्तिगत विचारधारा के अनेक रूप दिखाई पड़ते हैं।इस अवसर पर प्रदर्शनी के संयोजक डॉ. सुरेश चंद्र जांगिड़ ने कलाकारों का परिचय करवाते हुए प्रदर्शनी की अवधारणा को स्पष्ट किया। उद्घाटन के अवसर पर अनेक कलाकार, आचार्यगण, शोधार्थी -विद्यार्थी तथा बड़ी संख्या में कला प्रेमी उपस्थित रहे।

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