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गाजीपुरसाहित्य

गाजीपुर: हुआ इश्क़ कहां लोगों ने,मैं आवारा हो गया,अल्लाह का दुलारा हो गया…..कुमार नागेश

अखिल भारतीय साहित्य परिषद में आयोजित की सरस काव्य गोष्ठी, श्रोता हुए मंत्र मुग्ध

गाजीपुर। अखिल भारतीय साहित्य परिषद’ के तत्वावधान में गाजीपुर इकाई-प्रमुख कवि हरिशंकर पाण्डेय के संयोजकत्व में खालिसपुर में एक सरस काव्य-गोष्ठी का आयोजन किया गया। अध्यक्षता महाकवि कामेश्वर द्विवेदी एवं संचालन सुपरिचित नवगीतकार डाॅ.अक्षय पाण्डेय ने किया। सर्वप्रथम नगर के हास्य-व्यंग्य विधा के श्रेष्ठ कवि स्मृतिशेष विजय कुमार मधुरेश के प्रति समस्त कविगण एवं प्रबुद्ध आगंतुकों ने उनकी स्मृति में कुछ पल का मौन धारण कर अपनी संवेदना व्यक्त कर श्रद्धांजलि अर्पित की। गोष्ठी का शुभारंभ महाकवि कामेश्वर द्विवेदी की वाणी-वंदना से हुआ। काव्यपाठ के क्रम में वरिष्ठ कवि रामदेव पाण्डेय ने अपनी कविता “विश्व शांति के लिए आणविक शस्त्र सिमन करना होगा/सबको मिलकर रहना होगा सबको मिलकर चलना होगा” के साथ ही कई प्रलम्बित कविताऍं प्रस्तुत कर अतीव प्रशंसित रहे।

लोकरस में पगे गीतों से रससिक्त करने वाले भोजपुरी एवं हिन्दी के गीतकार हरिशंकर पाण्डेय ने अपना गीत “मेरा दर्द बेरहम है/बस चन्द देर रहता/कहना बहुत मैं चाहूॅं/लेकिन मैं मौन रहता” प्रस्तुत कर ख़ूब तालियाॅं अर्जित की। इसी क्रम में ‘साहित्य चेतना समाज’ के संस्थापक, वरिष्ठ व्यंग्य-कवि अमरनाथ तिवारी ‘अमर’ ने अपनी कविता “क्या पहचानोगे तुम उनको/जब पर्दा नायाब पड़ा है/ऊपर से है बहुत मुलायम/नीचे पत्थर का टुकड़ा है” सुनाकर ख़ूब वाहवाही अर्जित की। युवा नवगीतकार डाॅ.अक्षय पाण्डेय ने वर्तमान वैश्विक युद्धरत समय को रेखांकित करता हुआ अपना नवगीत “ऑंखों में तिर रहे आज फिर/वही अधजले ख़्वाब/मरें न पंछी प्यासे जल बिन/ सूखे नहीं ग़ुलाब/बन्द करो अब युद्ध/युद्ध में झुलसी नन्हीं कली/ कली पर बैठी है तितली “सुनाकर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध करते हुए अतीव प्रशंसा अर्जित की।

नगर के वरिष्ठ ग़ज़ल-गो कुमार नागेश ने “हुआ इश्क कहा लोगों ने/मैं आवारा हो गया/उन्हें पता क्या मैं/अल्लाह का दुलारा हो गया” इस शेर पर खूब वाहवाही लूटी। नगर के वरिष्ठ कवि, वीर रसावतार दिनेशचन्द्र शर्मा ने अपनी कविता “बरसों भीगे हैं,थरथराये हैं/तब जाके घोंसले बनाये हैं/तोड़ते लूटते गुज़र जाओ/हम तो गाॅंधी की क़सम खाये हैं” सुनाकर श्रोताओं में ओजत्व का संचार कर ख़ूब वाहवाही बटोरी।अन्त में अध्यक्षीय काव्यपाठ करते हुए महाकाव्यकार कामेश्वर द्विवेदी ने नैतिक मूल्यों के संरक्षण की ओर ध्यानाकर्षण करते हुए अपनी छान्दस कविता “आज भी दारुण दैत्य दुशासन से वसुधा यह रिक्त नहीं है/द्रौपदियाॅं हैं असंख्य, परन्तु यशोदा का नन्दन कृष्ण नहीं है” प्रस्तुत कर ख़ूब प्रशंसा अर्जित की।

इस काव्यायोजन में उपस्थित रसभावक, प्रबुद्ध श्रोतागण काव्य-पाठ से आनन्द-विभोर होकर बहुत देर तक अपनी करतल ध्वनि से पूरे परिसर को गुंजायमान करते रहे। इस सरस काव्यगोष्ठी में श्रोता के रूप में प्रमुख रूप से भगवान प्रसाद गुप्ता,नन्दकिशोर सिंह, रविशंकर पाण्डेय, कृष्णानन्द पाण्डेय, नन्दलाल सिंह,सन्तोष कुमार पाण्डेय, विजय कुमार पाण्डेय, बृजेश यादव, कमलेश यादव आदि उपस्थित रहे। अन्त में अध्यक्षीय उद्बोधनोपरान्त रामदेव पाण्डेय ने सभी के प्रति आभार व्यक्त किया।

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