गाज़ी मियां के आस्ताने पर उमड़ा हुजूम, चढ़ रही चादर
सैकड़ों साल से निभाई जा रही मिल्लत की रवायत
सरफराज अहमद
वाराणसी। मज़हबी शहर बनारस में सैकड़ों साल से चली आ रही मिल्लत की रवायत इस साल भी बरकरार है। बड़ी बाजार के सलारपुरा स्थित सैयद सालार मसूद Ghazi miya की मजार पर जेठ के पहले रविवार को उर्स मनाया गया। उर्स के दौरान हिंदू मुस्लिम दोनों वर्गों के लोगों ने न सिर्फ शिरकत की बल्कि चादरें चढ़ाई और मन्नतें व मुराद मांगी। इससे पूरा माहौल नूरानी नज़र आने लगा।
इससे पहले मेले में सुबह मजार का गुस्ल शरीफ और संदलपोशी की गई। इसके बाद चादरपोशी हुई। सुबह से ही अकीदतमंद यहां पहुंच रहे हैं और दरगाह पर जियारत कर फ़ैज़ उठा रहे हैं।
गाजी मियां दरगाह, सलारपुरा के मुतवल्ली सेराजुद्दीन ने बताया की यह मेला गंगा जमुनी तहजीब की मिसाल है। 1000 साल से यहां हिंदू-मुस्लिम सभी अकीदत के साथ जेठ के पहले रविवार को गाजी मियां की दरगाह पर जियारत करने और चादरपोशी करने आते हैं। यहां कौमी एकता का पैगाम पिछले 1022 सालों से दिया जा रहा है। इसमें लाखों की तादात में जायरीन उमड़ते हैं। इसलिए इसे लक्खा भी कहा जाता है।
कुष्ठ रोग से मिलती है मुक्ति, आंखों की रोशनी आती है वापस मुतवल्ली सेराजुद्दीन ने बताया- वर्षों से इस दरगाह का चमत्कार है कि यहां कुष्ठ रोगी, आंखों की रोशनी से परेशान और हाथ टूटने के मरीजों की मुरादें पूरी होती है। उन्हें इस दर से शिफा (राहत) मिलती है। लोग इसमें अकीदत रखते हैं और यहां आते हैं।
समाचार लिखे जाने तक दरगाह पर इस समय मेले जैसा माहौल है। जैतपुरा थानाक्षेत्र में आने वाली दरगाह पर सुरक्षा के मुकम्मल इंतजाम किए गए हैं। पुलिसकर्मियों की ड्यूटी लगाईं गई है। वहीं दरगाह पर हिंदू-मुस्लिम जायरीन पहुंच रहे हैं और अकीदत की चादर चढ़ा रहे हैं। हालांकि इस बार भीषण गर्मी के चलते भीड़ कम ही है।





