भीषण गर्मी में कैसे रखें अपना ध्यान- प्राची राय

बढ़ती गर्मी से इन दिनों हर कोई परेशान हो रहा है। तेज धूप, लू और उमस शरीर में कई तरह की बीमारियों को जन्म देती है। इस मौसम में भूख भी नहीं लगती। सारा दिन प्यास के कारण मुंह सुखने लगता है। गर्मियों में पेट और पाचन से जुड़ी समस्याओं का भी सामना करना पड़ता है। स्वास्थ्य के साथ की हुई छोटी सी लापरवाही के कारण उल्टी-दस्त जैसी समस्याएं होने लगती हैं। आपको कुछ ऐसे चीजें बताते हैं जिनसे आप इस बढ़ती गर्मी में अपनी सेहत का ख्याल रख सकते हैं। तो चलिए जानते हैं इनके बारे में…
पर्याप्त जल का सेवन
गर्मियों में शरीर को हाइड्रेट रखना अत्यंत आवश्यक है। विशेषज्ञों के अनुसार, रोजाना कम से कम 8-10 गिलास पानी पीना चाहिए। नारियल पानी, शिकंजी, छाछ और फलों के रस का सेवन करें। कैफीन और अल्कोहल से परहेज करें, क्योंकि ये शरीर को डिहाइड्रेट कर सकते हैं।
संतुलित और हल्का आहार लें
गर्मी के मौसम में अत्यधिक तला-भुना और मसालेदार भोजन पाचन संबंधी समस्याएं पैदा कर सकता है। आहार में तरबूज, खीरा, ककड़ी, संतरा और पुदीना जैसी ठंडी और पौष्टिक चीजें शामिल करें।
तेज धूप से बचाव करें
दोपहर 12 बजे से 3 बजे के बीच घर से बाहर निकलने से बचें, क्योंकि इस दौरान सूर्य की किरणें तीव्र होती हैं। यदि बाहर जाना अनिवार्य हो, तो हल्के सूती कपड़े पहनें, टोपी या छाता लेकर निकलें और सनस्क्रीन का उपयोग करें। आप गर्मियों में गिलोय का सेवन कर सकते हैं, क्योंकि यह कई लाभ प्रदान करता है, जैसे कि इम्यूनिटी बढ़ाना, लू से बचाव, पाचन में सुधार, और त्वचा को स्वस्थ बनाए रखना।
शीतल वातावरण में रहें
जहां तक संभव हो, दिन के सबसे गर्म समय में घर के अंदर रहें। पंखा, कूलर या एसी का उपयोग करें। गर्मी अधिक होने पर ठंडे पानी से स्नान करें।
अत्यधिक परिश्रम से बचें
गर्मी में अधिक मेहनत करने से शरीर में पानी की कमी हो सकती है। व्यायाम सुबह या शाम के समय करें, जब मौसम अपेक्षाकृत ठंडा हो।
त्वचा की सुरक्षा आवश्यक
अत्यधिक पसीने से त्वचा पर चिपचिपापन और जलन हो सकती है। त्वचा को साफ और हाइड्रेट रखने के लिए हल्का मॉइस्चराइज़र और सनस्क्रीन लगाएं। दिन में कम से कम दो बार चेहरा धोएं।
लू लगने के लक्षण क्या है
के निम्नलिखित लक्षण देखने को मिल सकते हैं:-
उल्टी और मतली
जी मिचलाना
तेज बुखार
लूज मोशन
त्वचा का सूखना या गर्म होना
त्वचा का लाल होना
डिमेंशिया
सिरदर्द या चक्कर आना
मांसपेशियों में एंठन
बेहोशी
धड़कन तेज होना
लू – लगने(हीट स्ट्रोक) के कारण क्या है ?
अधिक गर्म जगह पर लंबे समय तक रहना या काम करना, लू लगने या हीट स्ट्रोक का कारण बन सकता है। धूप के साथ गर्म हवाओं में ज्यादा शारीरिक गतिविधियां करना, डिहाईड्रेट रहना, कैफीन और अल्कोहल का अत्यधिक सेवन करना इत्यादि, हीट स्ट्रोक के प्रमुख कारण हैं।
लू से बचने के उपाय क्या है ?
हीट स्ट्रोक से बचाव के लिए ज्यादा तापमान और तेज धूप से बचना बहुत जरूरी होता है।
लू से बचने के उपाय
गर्मी के दिनों में अक्सर लू भी लग जाती है। कई बार लू लगने से स्थिति गंभीर भी हो जाती है।
क्या आप जानते हैं, लू लगने पर क्या खाना चाहिए? लू से बचने के लिए आप आम पन्ना, नींबू-पानी, टमाटर, तरबूज, खीरा-ककड़ी आदि का सेवन कर। इसमें पानी की मात्रा ज्यादा होती है।
लू से बचने के लिए सेहतमंद रहने के लिए आप छांछ-लस्सी का भी सेवन कर सकते हैं। इससे हीट स्ट्रोक से खुद को सुरक्षित रखा जा सकता है।
अचानक गर्मी से ठंडी जगह या ठंड से गर्म जगह पर जाने से बचें, इससे शरीर का टेम्परेचर अचानक से घट-बढ़ सकता है, और आपकी सेहत को नुकसान पहुंच सकता है। लू से बचने के लिए प्याज को काफी कारगर उपाय माना जाता है। आप प्याज को कच्चा या भून कर भी खा सकते हैं। इसके अलावा आप प्याज के रस के साथ नींबू का सेवन भी कर सकते हैं, यह आपको लू से बचाता है।नारियल पानी आपके शरीर के लिए बहुत हेल्दी होता है। यह आपके शरीर में प्राकृतिक रूप से इलेक्ट्रोलाइट को संतुलित करके शरीर को स्वस्थ रखता है।बच्चे थोड़ी-थोड़ी देर में पानी पीते रहें।
लू लगने पर प्राथमिक उपचार क्या है?
किसी को भी हीट स्ट्रोक जैसी समस्या होने पर आप तत्काल के लिए निम्नलिखित उपाय कर सकते हैं:-
हीट स्ट्रोक होने पर आप पीड़ित को तुरंत ठंडी या छायादार जगह पर ले जाएं।तत्काल चिकित्सा सहायता के लिए संपर्क करें।यदि पीड़ित व्यक्ति ने भारी-भरकम ड्रेस पहनी हुई है तो उसे बदलने के लिए बोलें।पंखे से पीड़िता को हवा देने की कोशिश करें। ठंडे पानी से उसके शरीर को पोछें।मरीज होश में हो तो उसे तरल पदार्थ सेवन के लिए दें। जैसे- नींबू-पानी, जूस इत्यादि
तत्काल चिकित्सा आने तक पेशेंट के हार्ट-बीट और सांस लेने की प्रक्रिया को निगरानी में रखें।
लू लगने का आयुर्वेदिक उपचार
आयुर्वेद का मानना है कि, गर्मी के दिनों में ठंडी तासीर वाली चीजों का सेवन करना चाहिए, इससे शरीर में ठंडक बनी रहती है और लू लगने का चांस कम होता हैं। लू लगने का आयुर्वेदिक उपचार निम्नलीखित है
सेब का सिरका (एप्पल साइडर विनेगर) – हीट स्ट्रोक के कारण शरीर में पोटैशियम और मैग्नीशियम जैसे जरूरी तत्वों की मात्रा कम हो जाती है। मिनरल और इलेक्ट्रोलाइट की कमी हो जाती है। इसकी भरपाई के लिए आप सेब के सिरके का सेवन कर सकते हैं। एक ग्लास पानी में दो चम्मच सेब के सिरके को मिलाकर, दिन में दो बार आप इसका सेवन कर सकते हैं।
बेल का शरबत – गर्मियों में बेल का शरबत बहुत फायदेमंद होता है। यह आपके पाचनतंत्र को सही रखता है। इसमें फाइबर और विटामिन सी भरपूर मात्रा में पाया जाता है। यह आपके शरीर को ठंडक पहुंचाने के साथ लू से बचाता है। आप इसके जूस का दिन में दो से तीन बार सेवन कर सकते हैं।
चंदनासव – चंदनासव एक तरह की आयुर्वेदिक औषधि पेय पदार्थ है, जो चंदन और कई तरह की जड़ी-बूटियों से बनी होती है। इसकी तासीर काफी ठंडी होती है, जो शरीर में जलन और गर्मी को शांत करती है। हीट स्ट्रोक के मामले में या लू लगने पर चंदनासव के सेवन से जल्दी आराम मिलता है। 3-4 चम्मच चंदवासव और उतना ही बराबर मात्रा में पानी मिलाकर, आप इसे खाना खाने के बाद, दो बार सेवन कर सकते हैं।




