वाराणसी : श्रीकाशी विद्वत परिषद न्यास की महत्वपूर्ण बैठक सम्पन्न

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा मनुस्मृति अपरिवर्तनीय
वाराणसी । श्रीविद्या मठ केदारघाट में श्रीकाशी विद्वत्परिषद (न्यास) की आवश्यक बैठक ज्योतिष्पीठाधीश्वर जगदगुरू शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद: सरस्वती जी महाराज के सान्निध्य में आहूत की गई।जिसमें श्रीकाशी विद्वत परिषद् न्यास के समस्त विद्वान उपस्थित रहे। अध्यक्षता आचार्य कमलाकांत त्रिपाठी ने किया।बैठक में विद्वानों ने मनुस्मृति सहित विभिन्न विषयों पर चर्चा करते हुए विशेष रूप से पंचांग निर्माण से संबंधित जो विसंगतियां सामने आ रही है और दो तिथियां पर त्योहार मनाए जा रहे हैं जिससे समाज में भ्रम उत्पन्न हो रहा है उसमें एकरूपता हेतु बल दिया। मनुस्मृति पर हो रहे संशोधन से संबंधित चर्चाओं द्वारा समाज में फैल रहे उन्माद एवं भ्रम की स्थिति के मध्य नजर रखते हुए यह निर्णय लिया गया कि आगे प्रस्तुत संदर्भ में भारत वर्ष के विशिष्ट विद्वानों की बैठक आहूत की जाएगी। एक बड़ी सभा का आयोजन किया जाएगा जिसमें देश विदेश में जो भी पांडुलिपि एवं प्रकाशन विद्यमान है उससे मूल प्रति में या भाषा मेंक्या अंतर आया है इस पर भी विचार किया जाएगा। इसके मंथन से जो वितंडावाद समाज में उत्पन्न किया गया है उससे उबरने में जनमानस को सहायता मिलेगी और भविष्य में भी यदि कोई भ्रम उत्पन्न करने का कुप्रयास करेगा तो वह प्रमाणित नहीं माना जाएगा। इस कार्य में समस्त संग्रहालयों से प्रमाणित पांडुलिपियों को इसके लिए मंगाने का प्रस्ताव आचार्य सुधाकर मिश्र ने किया। साथ ही साथ आगे की सभा में यह भी चर्चा होगी कि क्या स्मृतियों में संशोधन करने का अधिकार किसी को है यदि स्मृतियों का संशोधन होगा तो आगे वेदों में भी संशोधन की बातें चलेंगी। इससे और अधिक भ्रम फैलेगा। योगेश ब्रह्मचारी ने प्रस्ताव रखा की परिषद् त्रैमासिक पत्रिका का प्रकाशन करेगा। जिसका नाम होगा विद्वन् मनोरंजिनी इसमें बीच-बीच में जो भी विषय आएंगे उनका समाधान किया जाएगा।
इस पर शंकराचार्य जी महाराज ने कहा कि समग्र रूप से भारतवर्ष के विशिष्ट विद्वानों का आह्वान कर मनुस्मृति के अपरिवर्तनीय होने पर खुल निर्णय लिए जायेंगे एवं मनुस्मृति के वास्तविक स्वरूप को कथमपि बदला नही जाएगा। पंचांगों के मतभेद को दूर करने एवं एकरूपता स्थापित करने हेतु ठोस कदम उठाए जाएंगे। बैठक में न्यास के अध्यक्ष डॉ परमेश्वर दत्त शुक्ल,उपाध्यक्ष कमलाकांत त्रिपाठी महामंत्री आचार्य शत्रुघ्न त्रिपाठी, सुधाकर मिश्र, प्रो.श्रीकृष्ण त्रिपाठी, उमापति उपाध्याय,पं महेन्द्र पाण्डेय,गिरिश पाण्डेय, अवधराम पाण्डेय, प्रो शैलेश तिवारी, गिरीश दत्त पाण्डेय आदि उपस्थित रहे।



