मिर्जापुर : समुदायिक स्वास्थ्य केंद्र अहरौरा इन दिनों दुर्व्यवस्थाओं का शिकार

तारा त्रिपाठी/मिर्जापुर । समुदायिक स्वास्थ्य केंद्र अहरौरा इन दिनों दुर्व्यवस्थाओं का शिकार हो चुका है। कहीं गंदगी का रोना पड़ रहा है तो कहीं दवाओं के लिए बाहर का रास्ता देखने को मिल रहा है। यहां नियुक्ति के बाद भी डाक्टर आने से कतराते हैं। विश्वस्त सूत्रों से ज्ञात हुआ है कि चर्म रोग विशेषज्ञ अपने प्राइवेट प्रैक्टिस के चलते अपनी नियुक्ति के बाद मात्र एक दिन के लिए अस्पताल आये हैं वो भी किसी के मेडिकल बनाने के लिए। इनका ही नहीं,बल्कि इस अस्पताल में नियुक्त छ:डाक्टरों में सभी का यही हाल है। मनमानी तरीके से आना-जाना इनकी नियति बन चुकी है। डाक्टर के अभाव में कम्पाउण्डर के सहारे चलने वला यह अस्पताल दुर्घटनाग्रस्त मरीज को वाराणसी रेफर करने को बाध्य रहता है। हल्की चोट वाला जो मरीज यहीं दुरुस्त हो सकता है उसे भी वाराणसी का मुंह देखना पड़ता है। दवओं का वितरण फार्मासिस्ट के बगैर ही करने की भी शिकायत है। एंटी रैबीज के इंजेक्शन सुबिधाशुल्क के बाद दिये जाते हैं। इतना ही नहीं जनरेटर का अभाव, एक्स -रे मशीन होने के बाद भी उसे संचालित न होने का दंश भी मरीजों पर भारी पड़ रहा है। इमर्जेंसी वार्ड का भी कमोवेश यही हाल है। इसकी देखभाल स्वीपर के सहारे है। जब सारे मरीज रेफर ही होते हैं तो इमर्जेंसी वार्ड का औचित्य ही समझ के परे है। वार्डो के बिगड़े पंखे, फ्यूज बल्ब अपने आप पर आंसू बहा रहे हैं। बेड के गंदे बिस्तर शायद अधिकारियों आने पर ही बदले जाते हैं।
इन तमाम दुर्व्यवस्थाओं के बाद आज तक कोई कार्रवाई का न होना उच्चाधिकारियों की मिलीभगत से इनकार नहीं किया जा सकता है। लम्बे समय तक डाक्टरों का न आना और यहां कौन-कौन से मर्ज के डाक्टर नियुक्त हैं की भी मरीजों को जानकारी नहीं रहती है। ऐसे में मरीजों को भटकना पड़ता है और जानकारी के अभाव में वे बाहर से मंहगे इलाज को मजबूर हो जाते हैं और उन्हें झोलाछाप डाक्टरों की शरण में जाना पड़ता है।अहरौरा लगभग 40 गांवों का संचालन करने वाला एक महत्वपूर्ण कस्बा है। गरीब तपके के लोगों के लिए यह जीवनदायी अस्पताल हैं।फोरलेन हाईवे होने से इस क्षेत्र में रोज कहीं न कहीं दुर्घटना होती रहती है। ऐसे में इस अस्पताल का महत्व बहुत ही बढ़ जाता है किन्तु संवादहीनता को प्राप्त यह अस्पताल असमय में ही मरीजों को काल के गाल में समा लेता है। शिकायत का आज तक कोई असर नहीं है। जनप्रतिनिधि भी जांच पड़ताल के लिए नहीं आते विभागीय लोगोंके हौंसले बुलन्द हैं। जनता सवाल खड़ा कर रही है कि आखिर जबाव देय कौन है। यदि समय रहते इस दुर्व्यवस्था का इलाज नहीं किया गया तो आने वाले चुनाव में इसका खामियाज़ा जिम्मेदार लोगों को भुगतना पड़ेगा। डेंटल हाइजीनिक बनता है। मेडिकल डॉक्टर के अनुपस्थिति में केवल बुलाकर सिग्नेचर कराए जाते हैं। क्षेत्र के ग्रामीणों का कहना है कि लगभग तीन वर्ष पूर्व महिला चिकित्सक का स्थानांतरण होने के बाद आज तक कोई महिला चिकित्सक अहरौरा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में नियुक्त नहीं किया गया । नक्सली बेल्ट की महिलाएं आती है तो स्टाफ नर्स अपने आप को डॉक्टर बात कर बाहर की दवा लिखती हैं इसके बाद अपने चहेते अस्पताल में भेज देती हैं ।क्षेत्र के जैसराम बिन्द, राजा राम, कल्लू राम, महेश साहनी, मृत्युंजय कुमार, सन्तोष कुमार, बुधनी वनवासी, बंधन देवी, चंन्द्रो देवी, सरोज देवी, महदैया दैवी, दुखरन प्रसाद, सुरेश कुमार, कोमल साहनी, मनवा देवी, सुखिया देवी आदि ने जिलाधिकारी मीरजापुर से इसकी जांच कराकर उचित कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है।



