दिल्ली में दूसरे दिन भी पुलिस ने प्रोटेस्टर्स के साथ की बर्बरता, आज सीजेआई से मिलेगा इंडिया गठबंधन
पत्रकार प्रज्ञा मिश्रा समेत अन्य प्रमुख पत्रकारों को घसीट कर डिटेन किया, बंगला साहब गुरुद्वारे में पुलिस के घुसने की भी निंदा की गई, ज्ञानेश कुमार के खिलाफ सड़कों पर भी दिखा गुस्सा, कॉक्रोच बोले, इमजेंसी से बुरे हालात



मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के चयन के बाद से ही पक्षपात के आरोप लग रहे हैं। इन आरोपों को विपक्ष के नेता राहुल गांधी के बाद इंडियन एक्सप्रेस की खबर ने उस पर मुहर लगा दी। इसके बाद से तो पूरे देश में एक तरह से उबाल आया है। इंडिया गठबंधन सड़क से लेकर संसद तक लड़ने के तैयार है। कॉकोच जनता पार्टी भी सीईसी ज्ञानेश कुमार को हटाने के लिए प्रोटेस्ट कर रही है। दिल्ली में दो दिनों से पुलिस प्रोटेस्टरों के साथ बुरा बर्ताव कर रही है। इसके साथ ही पत्रकारों के साथ भी बेहद शर्मनाक हरकतें पुलिस ने की है। महिला पत्रकारों को भी घसीट कर बसों में बैठाया गया। प्रदर्शन के विरोध में आए अन्य संगठनों से जुड़े युवाओं को मारपीट की खुली छूट दी गई। कार में डंडे रखकर पत्रकारों को धमकाते रहे लेकिन उनके कहने पर भी पुलिस ने कार को जाने दिया गया। पत्रकार वार्ता में सौरवदास ने कहा कि यह इमरजेंसी के हालात हैं। यहां पर सिविल वार कराने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने पत्रकारों के मारपीट और उनको डिटेन करने की निंदा की। उन्होंने कहा कि ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे तक प्रदर्शन चलता रहेगा। देशवासियों से अपील है कि सड़क पर निकलकर शांतिपूर्वक प्रोटेस्ट करें।
पत्रकारवार्ता में आशुतोष रांका ने कहा कि कल चार पूर्व मुख्यमंत्रियों के छात्रों और युवाओं के साथ सड़क पर उतरने के लिए धन्यवाद देते हैं। एसएफआई की पूरी टीम के साथ मारपीट कर उनको डिटेन किया गया। रत्ना सिंह ने कहा कि यह सरकार डरी हुई सरकार है। इससे पहले सोमवार को सुबह सीजेपी के सभी पदाधिकारियों को मजिस्ट्रेट के पास पेश किया गया। वहां से सभी को रिहा करने का आदेश दिया गया। सीजेपी संस्थापक अभिषेक दीपके दादी के निधन की वजह से घर लौट गए।
सुप्रीम कोर्ट में भी रविवार को अवमानना पर बहस की गई। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने दो दिन में जवाब देने का आदेश दिया। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि 13 करोड़ से अधिक वोटरों के नाम काट कर ज्ञानेश कुमार ने अपराध किया है।
बड़ी संख्या में यूट्बूब न्यूज चैनव के पत्रकारों के साथ स्वतंत्र पत्रकार व अन्य पोर्टल के पत्रकारों के साथ पुलिस ने बदसलूकी की है। सीनियर पत्रकार प्रज्ञा मिश्रा समेत अन्य वरिष्ठ पत्रकारों को पुलिस ने घसीट कर बसों में डाला। पत्रकारों को खींचने पर साथी चीखते रहे कि यह पत्रकार हैं लेकिन किसी पुलिस अधिकारी ने नहीं सुनी। ध्रुव राठी ने भी वीडियो जारी कर बताया कि पुलिस ने उनके माता-पिता के साथ बदसलूकी की और कमरे से उनका किडनैप किया गया। आईसा के साथियों के साथ मार्च कर रहीं नेहा बोरा को भी डिटेन कर लिया गया। उनका कहना था कि ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे तक प्रदर्शन चलेगा।
रविवार को एक राज्यसभा सांसद को भी पुलिस ने पीटा। शनिवार को चेन्नई में भी राहुल गांधी ने छात्रों की गूंज में वोट चोरी का मुद्दा उठाया। भाजपा के तमाम प्रवक्ताओं ने इस प्रोटेस्ट का विरोध किया। किसी भी भाजपा नेता या सरकार के प्रतिनिधि ने मारपीट और पत्रकारों के साथ बदसलूकी पर खेद तक नहीं जताया गया।
आज इंडिया गठबंधन सीजेआई को देगा ज्ञापन
इंडिया गठबंधन ने सीईसी ज्ञानेश कुमार के खिलाफ राष्ट्रपति को ज्ञापन दे चुके हैं। अब सोमवार को इंडिया गठबंधन के 300 सांसद मार्च निकाल कर सुप्रीम कोर्ट पहुंचेंगे। वहां पर सीजेआई को ज्ञापन देकर कार्रवाई की मांग करेंगे। मार्च में सभी से शामिल होने की अपील की गई है।



