सुप्रीम कोर्ट से सड़क तक छाया रहा एसआईआर में नाम काटने का मुद्दा
सभी याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने की सुनवाई, चुनाव आयोग को लगाई फटकार, कनाट प्लेस के सेंट्रल पार्क में आज निकाला जाएगा तिरंगा मार्च प्रदर्शन के दौरान बंदी और पुलिस ज्यादती पर माफीनामा भी नामंजूर

कानपुर। एसआईआर में गलत तरीके से 13 करोड़ मतदाताओं के नाम काटने का मुद्दा दिन-ब-दिन बड़ा होता जा रहा है। अपना नैरेटिव सेट करने में माहिर मोदी सरकार अब कुछ नहीं कर पा रही है। उसके तेजतर्रात प्रवक्ताओं की फौज भी विपक्षी प्रवक्ताओं के आगे धराशायी हो रहे हैं। गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में एसआईआर, प्रदर्शन, डिटेंशन और पुलिस बर्बरता के खिलाफ डाली गई याचिकाओं पर सुनवाई हुई। इस मामले में अलग-अलग बनाए गए पक्षकारों को नोटिस जारी किया गया। सीजेआई की अध्यक्षता वाली बेंच ने चुनाव आयोग को भी फटकार लगाई। केंद्र और दिल्ली सरकार की माफी को सुप्रीम कोर्ट ने स्वीकार नहीं किया। माफीनामे के जरिये केंद्र सरकार और दिल्ली सरकार ने बचने की कोशिश की थी। उधर, सीजेपी ने भी अपने तेवर तल्ख रखे। अभिजीत दीपके के साथ विभिन्न संगठनों ने प्रेस कांफ्रेंस कर शुक्रवार को कनाट प्लेस के सेंट्रल पार्क में लहरा दो तिरंगा मार्च का ऐलान किया गया।
प्रेस क्लब में अभिजीत दीपके के साथ आईसा की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा, वरिष्ठ अधिवक्ता व सांसद कपिल सिब्बल, वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण, अभिनेता प्रकाश राज, एसएफआई की आय़ुषी घोष, के विराज, अंजली भारद्वाज और निखिल डे शामिल रहे।
अभिजीत दीपके ने सवाल उठाया कि ज्ञानेश कुमार को मोदी इतना क्यों बचा रहे हैं? उन्होंने कहा कि 15 दिन से विपक्षी नेता ममता बनर्जी, केजरीवाल, पिनारई विजयन को सड़क पर घसीटा गया। यह सभी पूर्व मुख्यमंत्री हैं। दिल्ली को भारत-पाकिस्तान का बॉर्डर बना दिया गया है। देश में तिरंगा लहराना कब से अपराध हो गया है। इस दौरान एजेंडे के साथ आए कुख्यात चैनल के दो पत्रकारों ने हंगामा शुरू कर दिया। सैकड़ों की संख्या में मौजूद पत्रकारों ने उनको उनकी औकात बता दी। इस दौरान दीपके ने कहा कि सौ-पचास रुपये लेकर हंगामा करने के लिए आए हैं।
इस दैरान नेहा बोरा ने कहा कि एसआईआर के खिलाफ आंदोलन वोट के अधिकार की लड़ाई है। उन्होंने पत्रकारों पर की गई पुलिस की बर्बरता पर भी आक्रोश जताया। एक महिला पत्रकार का उत्पीड़न किया गया लेकिन उसी के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करा दी गई। प्रशांत भूषण ने कहा कि यह लोकतंत्र बचाने की लड़ाई है।
उधर प्रदर्शन के दौरान एनएसयूआई के नेताओं और कार्यकर्ताओं की भी बहुत बड़ी भूमिका रही। सैकड़ों छात्र नेताओं ने पुलिस की लाठियां सहकर भी प्रदर्शन को कामयाब बनाया है। कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, राहुल गांधी, प्रियंका गांधी समेत अन्य वरिष्ठ नेताओं ने एनएसयूआई, सेवादल के पदाधिकारियों से मुलाकात कर उनकी हौंसलाअफजाई की। इस दौरान राहुल ने कहा कि हमारे बब्बर शेर कार्यकर्ता हमारी शक्ति हैं। लोकतंत्र की रक्षा के योद्धा हैं।
चुनाव आयोग भी रोज रोज जारी कर रहा नए आदेश
मुख्य चुनाव आय़ुक्त ज्ञानेश कुमार के साथ अन्य चुनाव आय़ुक्त भी अब पसोपेश में पड़ गए हैं। इसीलिए रोज नए नए आदेश पारित हो रहे हैं। पहले कहा जाता था कि हलफनामा दें या देश से माफी मांगें लेकिन एसआईआर के बाद एसएसआर कराने का आदेश पारित कर दिया गया। इसमें भी यह नहीं बताया गया कि गलत तरीके से काटे गए नामों को किस तरह जोड़ा जाएगा। अब तो चुनाव आयोग को अपने सारे आदेशों की प्रति सुप्रीम कोर्ट में जवाब के साथ देनी होगी।



