गाजीपुर : लंबित मांगों को लेकर लेखपालों ने काली पट्टी बांध जताया विरोध

2800 ग्रेड पे, अंतर्मंडलीय स्थानांतरण और मोटरसाइकिल भत्ते की मांग पर प्रदेशव्यापी प्रदर्शन
त्रिलोकी नाथ राय / गाजीपुर। लेखपाल संवर्ग की लंबित मांगों को लेकर शनिवार को प्रदेशव्यापी विरोध प्रदर्शन किया गया। इसके तहत मुहम्मदाबाद, भांवरकोल, नोनहरा और करीमुद्दीनपुर सहित विभिन्न थानों के अंतर्गत कार्यरत लेखपालों ने काली पट्टी बांधकर अपने कर्तव्यों का निर्वहन किया साथ ही शासन के प्रति विरोध दर्ज कराया। प्रदेश के विभिन्न जनपदों में भी लेखपालों ने काली पट्टी बांधकर प्रदर्शन किया। लेखपालों की प्रमुख मांगों में 2800 रुपये ग्रेड पे, अंतर्मंडलीय स्थानांतरण की सुविधा, लेखपाल पद को तकनीकी घोषित कर शैक्षिक योग्यता बढ़ाने तथा 200 रुपये प्रतिमाह साइकिल भत्ते के स्थान पर 1500 रुपये प्रतिमाह मोटरसाइकिल भत्ता देने की मांग शामिल है। लेखपालों का कहना है कि वर्तमान कार्य परिस्थितियों और जिम्मेदारियों को देखते हुए उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय लिया जाना आवश्यक है।
बढ़ती जिम्मेदारियां, लेकिन सुविधाओं का अभाव
लेखपाल राजस्व विभाग की महत्वपूर्ण कड़ी हैं। भूमि संबंधी विवादों, आय, जाति एवं निवास प्रमाणपत्रों, राजस्व अभिलेखों के रखरखाव, सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन और आपदा के समय राहत कार्यों में उनकी अहम भूमिका होती है। इसके बावजूद लेखपाल संवर्ग लंबे समय से अपनी विभिन्न मांगों के समाधान की अपेक्षा कर रहा है। लेखपालों का मानना है कि कार्य की प्रकृति और बढ़ती जिम्मेदारियों के अनुरूप वेतनमान, भत्ते एवं अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जानी चाहिए। विशेष रूप से क्षेत्र में लगातार भ्रमण और राजस्व संबंधी कार्यों के लिए मोटरसाइकिल भत्ते की मांग को महत्वपूर्ण बताया जा रहा है।
काली पट्टी बांधकर सरकार तक पहुंचाया संदेश
विरोध प्रदर्शन के दौरान लेखपालों ने काली पट्टी बांधकर शांतिपूर्ण तरीके से अपने असंतोष को व्यक्त किया। उनका उद्देश्य शासन का ध्यान लंबित मांगों की ओर आकर्षित करना और उनके शीघ्र निस्तारण की आवश्यकता को रेखांकित करना रहा।इस दौरान लेखपाल संघ के अध्यक्ष संतोष राय, उपाध्यक्ष रविकांत सिंह, शैलेन्द्र यादव, प्रवीण कुशवाहा, कमलेश चौहान, राजेंद्र गुप्ता, अफसर अली, राहुल गौतम, सुनीता गुप्ता, नम्रता सिंह, श्वेता मिश्रा और प्रतिमा कुशवाहा सहित अन्य लेखपाल उपस्थित रहे। लेखपालों ने उम्मीद जताई कि शासन उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार करेगा और समस्याओं के समाधान की दिशा में आवश्यक कदम उठाएगा। अब देखना होगा कि प्रदेशव्यापी विरोध के बाद शासन स्तर पर लेखपाल संवर्ग की लंबित मांगों को लेकर क्या निर्णय लिया जाता है।



