नई दिल्ली : भारत की मेजबानी में हुई बिम्सटेक बैठक, टेरर फंडिंग रोकने पर मंथन

नई दिल्ली। भारत सरकार की मेजबानी में आतंकवाद और ट्रांसनेशनल क्राइम पर बिम्सटेक जॉइंट वर्किंग ग्रुप (जेडब्ल्यूजी-सीटीटीसी) की 11वीं बैठक नई दिल्ली में सफलतापूर्वक संपन्न हुई। बैठक में बिम्सटेक के सभी सात सदस्य देशों, बांग्लादेश, भूटान, भारत, म्यांमार, नेपाल, श्रीलंका और थाईलैंड के उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडलों ने हिस्सा लिया। इस सुरक्षा संवाद की अध्यक्षता भारत के विदेश मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव (आतंकवाद-रोधी) डॉ. सुहेल एजाज़ खान द्वारा की गई। विदेश मंत्रालय द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी के अनुसार इस बैठक का मुख्य उद्देश्य बंगाल की खाड़ी के इस महत्वपूर्ण क्षेत्र में सुरक्षा सहयोग को और अधिक मजबूत व संस्थागत बनाना है। मंत्रालय ने कहा इस दौरान बिम्सटेक क्षेत्र में पारंपरिक और उभरते हुए गैर-पारंपरिक सुरक्षा खतरों पर चर्चा की गई। प्रतिभागियों ने क्षेत्र में आतंकवाद और ट्रांसनेशनल क्राइम से निपटने में सहयोग और तालमेल बढ़ाने के लिए कई मुद्दों पर विचार-विमर्श किया और सुझाव दिए।
इसके अतिरिक्त, क्षेत्र में आतंकवाद और अंतरराष्ट्रीय अपराधों से प्रभावी ढंग से मुकाबला करने के लिए आपसी सहयोग और खुफिया समन्वय बढ़ाने पर कई महत्वपूर्ण सिफारिशें भी की गईं। बैठक के दौरान मानव तस्करी पर अंकुश लगाने, मादक पदार्थों, मनोरोगी पदार्थों व रसायनों की अवैध तस्करी की रोकथाम करने तथा एंटी-मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकवाद के वित्तपोषण (टेरर फंडिंग) का मुकाबला करने पर मुख्य ध्यान दिया गया। इसके साथ ही सदस्य देशों ने कानूनी और कानून प्रवर्तन मुद्दों पर साझा समन्वय बढ़ाने तथा कट्टरता और आतंकवाद का मुकाबला करने में क्षेत्रीय सहयोग को मजबूत करने पर भी विस्तार से चर्चा की । यह बैठक दर्शाती है कि बिम्सटेक अब केवल एक आर्थिक मंच नहीं, बल्कि क्षेत्रीय सुरक्षा को सुदृढ़ करने वाला एक आवश्यक ढांचा बन चुका है। इससे पहले इसी वर्ष 16 जुलाई को नई दिल्ली में बिम्सटेक के राष्ट्रीय सुरक्षा प्रमुखों की 5वीं बैठक भी आयोजित की गई थी। भारत की यह पहल दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया को जोड़ने वाले इस रणनीतिक क्षेत्र में शांति, सुरक्षा और स्थिरता बनाए रखने की उसकी दृढ़ प्रतिबद्धता को रेखांकित करती है।
(रिपोर्ट. शाश्वत तिवारी)



