अमेरिका की रस्सी जली पर अकड़ नहीं गई
अमेरिकी उप राष्ट्रपति ने फिर दी ईऱान को धमकी, ईरान की नाकाबंदी के बाद भी स्टेट ऑफ होर्मुज से अपने जहाज निकालने का दावा, अमेरिका युद्ध में दक्षिण कोरिया को भी शामिल करने के प्रयास में
आसिफ हुसैनः कानपुर। ईरान पर हमला कर मुंह की खाने वाले अमेरिका और इस्राइल की रस्सी जल गई लेकिन अभी तक अकड़ नहीं गई है। अमेरिका के बड़बोले राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप तो ईरान को धमकी देते देते हार गए। अब उनके नायब जेडी वांस धमकी पर उतर आए हैं। समुद्री मार्ग स्टेट आफ होर्मुज को ईरान ने बंद रखा है। अब उसे खुलवाने के लिए उप राष्ट्रपति यूरोपियन देशों का साथ मांग रहे हैं। एक प्रेस कांफ्रेंस में कहा कि जब तक तेहरान शिपों को शूट करना बंद नहीं करता है जब तक अमेरिका बात नहीं करेगा।
उन्होंने कहा कि अमेरिका दुनिया को एनर्जी संकट से बचाना चाहता है। उन्होंने कहा कि ईरान की नाकाबंदी के बाद भी कल 15 मिलियन बैरल तेल स्टेट ऑफ होर्मुज से निकाला है। यह अमेरिका के अलावा कोई नहीं कर सकता है। वह अपनी शेखी बघारते हुए कहते हैं कि अमेरिका दुनिया को एनर्जी संकट से बचाना चाहते हैं। उन्होंने फिर दोहराया कि ईरान एटम बम नहीं बना सकता है। हम व्यापारिक जहाजों की भी सुरक्षा कर रहे हैं।
अमेरिका और इस्राइल की फौजों ने इस साल की फरवरी में ईरान पर अचानक हवाई हमला बोला था। उस हमले में पहले ही दिन सुप्रीम लीडर के घर पर हमला कर उनको शहीद कर दिया था। हमले में कई सैनिक भी मारे गए लेकिन ईरान ने पलटवार कर दुनिया को चौका दिया। आठ महीने के बाद भी अमेरिका जंग से बाहर नहीं निकल पा रहा है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरानी कौम को भी वेनेजुएला की तरह समझ रखा है। ईरान के हमलों से इस्राइल का कोई भी कोना सुरक्षित नहीं बचा था। जिस तरह इस्राइल ने गाजा को निशाना बनाया था उसी तरह ईरान ने इस्राइल पर भी मिसाइलों से हमला किया था। ईरान के हमलों से खाड़ी देशों में अमेरिकी सैन्य अड्डों को भी भारी नुकसान पहुंचा। कई देशों में स्थित सैनिक अड्डों को छोड़कर अमेरिका को जाना पड़ा। इसी वजह से तुर्किए, सऊदी अरब और पाकिस्तान के बीच सुरक्षा के लिए मक्का समझौता किया गया। धीरे-धीरे इस समझौता का आकार और बड़ा होने की संभावना है। इसमें इस्लामिक देशों के अलावा चीन और रूस समेत रूस से अलग हुए कई मुस्लिम बहुल देश भी शामिल हो सकते हैं। सुरक्षा के जानकारों का कहना है कि आगे ईरान भी इसमें शामिल हो सकता है।
स्टेट ऑफ होर्मुज में दक्षिण कोरिया के सैनिकों को भी उतारने के लिए अमेरिका प्रयास कर रहा है। अगर ऐसा होता है तो इस युद्ध के गंभीर परिणाम होंगे। अभी जिस युद्ध को अमेरिका सिर्फ आपरेशन बताकर अपने मारे गए सैनिकों के परिजनों को सम्मान नहीं दे रहा है उसके लिए भी घातक होगा। दक्षिण कोरिया आया तो उत्तरी कोरिया ईरान की मदद करेगा। इसके बाद चीन और रूस पीछे से मदद करने के बजाए खुलकर ईरान की मदद करेंगे। आगे फिर यह युद्ध विश्व युद्ध के रूप में बदल सकता है।



