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उत्तर प्रदेशराजनीति

लूटने वाले बाहर से नहीं, व्यवस्था के अंदर बैठे हैः पल्लवी पटेल

रायबरेली में आयोजित जनसभा में आत्मनिर्भर भारत पर सरकार को घेरा, पल्लवी ने राम मंदिर में चोरी का भी मुद्दा उठाया

आसिफ हुसैनः कानपुर। अपना दल कमेरावादी की नेता व विधायक पल्लवी पटेल ने कहा कि बड़े-बड़े मंचों से छाती ठोक-ठोककर कहते थे कि हम आत्मनिर्भर भारत बनाएंगे। सुनने में अच्छा लगता है ना—आत्मनिर्भर भारत! उन्होंने कहा कि भारत आत्मनिर्भर बनेगा तो हमने भी सोचा कि अगर केंद्र की सरकार हर मंच से आकर कह रही है और खुद को प्रभु श्रीराम का अनुयायी बताती है तो झूठ तो नहीं बोलेगी। हमने सोचा कि अगर ये आत्मनिर्भर भारत बनाने की बात कर रहे हैं तो शायद हमारे खेत आत्मनिर्भर हो जाएंगे, हमारे किसान आत्मनिर्भर हो जाएंगे, हमारे बाजार आत्मनिर्भर हो जाएंगे, हमारी फैक्ट्रियां और कारखाने आत्मनिर्भर हो जाएंगे, हमारे स्कूल और बैंक मजबूत हो जाएंगे।

उन्होंने बड़े जोर-शोर से कहा —‘वोकल फॉर लोकल’, यानी स्वदेशी को बढ़ावा देंगे। लेकिन पता नहीं ऐसा क्यों है कि आज हम जिस बाजार में जाते हैं, वहां स्वदेशी सामान के ऊपर चीनी माल हावी दिखाई देता है।

जिस फैक्ट्री में जाते हैं, चाहे ऑटो पार्ट हो या मशीनरी का सामान, वहां “मेड इन इंडिया” से ज्यादा “मेड इन चाइना” दिखाई देता है।

तो फिर सवाल है—ये कौन से आत्मनिर्भर भारत की बात कर रहे थे?

हमारे बाजार आत्मनिर्भर नहीं हुए।

हमारे कारखाने आत्मनिर्भर नहीं हुए।

हमारे किसान आत्मनिर्भर नहीं हुए।

किसान की फसल आज भी छुट्टा जानवर चर जाते हैं।

हमारे बैंक भी संकटों से जूझ रहे हैं। तो फिर आत्मनिर्भर भारत आखिर बना कौन?

उन्होंने कहा कि बहुत सोचने के बाद समझ आया कि ये लोग नाक सीधी पकड़ते ही नहीं, हमेशा घुमाकर पकड़ते हैं। असल में शायद ये कहना चाह रहे थे कि धर्मस्थल हमारे होंगे, धर्मस्थलों में रखे दानपात्र हमारे होंगे, उन दानपात्रों पर लगने वाला ताला हमारा होगा, उस ताले की चाबी हमारे हाथ में होगी और उसमें आने वाला चढ़ावा देश के कमेरा समाज का होगा।

और फिर उस दानपात्र को लूटने वाले भी अपने ही लोग होंगे! शायद यही इनके आत्मनिर्भर भारत का मॉडल है। जिस देश को कभी सोने की चिड़िया कहा जाता था, उस देश के खजाने, खेत-खलिहानों और मेहनतकश जनता को लूटने के लिए अब अंग्रेजों या मुगलों की जरूरत नहीं है। क्योंकि आज लूटने वाले बाहर से नहीं, व्यवस्था के अंदर बैठे हैं जो जनता के संसाधनों को अपने हाथ में लेकर खुद को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने में लगे हैं।

 

 

ASIF HUSAIN

ASIF HUSAIN EDITOR मैंने अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी से हिंदी साहित्य में परास्नातक (मास्टर) करने के बाद ट्रांसलेशन में पीजी डिप्लोमा किया। इसके बाद पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया। 1997-98 में राष्ट्रीय सहारा में ट्रेनिंग की। इसके बाद 1998 में अमर उजाला कानपुर में ज्वाइन किया। अमर उजाला में कानपुर में रिपोर्टिंग की। गाजीपुर, चंदौली, भदोही, इटावा में ब्यूरोचीफ के पद पर रहा। इसके अलावा मुरादाबाद में संभल डेस्क प्रभारी रहा। झांसी में देहात डेस्क प्रभारी रहा। साथ में कई महत्वपूर्ण कार्यक्रमों की रिपोर्टिंग की। 2023-24 में अमर उजाला में सीनियर सब एडिटर पद से स्वैच्छिक रिटायरमेंट लिया। इसके बाद अपना यूट्यूब चैनल ‘ब्रिलियंट टाइम’ नाम से बनाया। वीकली अखबार भी इसी नाम से निकाला। ‘द्वाबा सम्राट हिंदी दैनिक’ में देश और विदेश पर लेख लिखे। वर्तमान में हिंदुस्तान संदेश से बतौर एडिटर जुड़ा हूं।

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