कानपुरः नारा-ए-रिसालत या रसूल अल्लाह की गूंजी सदाएं
कानपुर शहर में 114 साल पुराना जुलूस-ए-मोहम्मदी निकाला गया, घाटमपुर में आई लव मोहम्मद लिखा एक झंडा निकालने पर हुआ विवाद, जाजमऊ और बाबूपुरवा में भी शान के साथ निकाला जुलूस

ईद मिलादुन्नी के मौके पर कानपुर शहर में 114 साल पुराना जुलूस-ए-मोहम्मदी नबी की शान में नातिया कलाम सरकार की आमद मरहबा पढ़ते और नारा-ए-तकबीर अल्लाह हु अकबर और नारा-ए-रिसालत या रसूल अल्लाह की सदाओं के साथ अंजुमनों ने निकाला। इसके अलावा कल्याणपुर, काकादेव नई बस्ती, रौशन नगर, जाजमऊ, रेलबाजार, बाबूपुरवा आदि क्षेत्रों में भी अकीदत के साथ जुलूस निकाले गए। शहर फतेहपुर में भी जुलूस-ए-मोहम्मदी निकाला गया।
कानपुर में परेड ग्राउंड से जोहर की नमाज के बाद जुलूस का आगाड हुआ। जुलूस को पुलिस कमीशनर रघुवीर लाल ने हरी झंडी दिखाकर जुलूस को रवाना किया। जुलूस में सौ से अधिक अंजुमनें शामिल रहीं। यह जुलूस अपने कदीमी रास्तों से गुजरता हुआ फूलबाग पहुंचकर देर रात समाप्त हुआ। जुलूस के दौरान ये नात- आ गया वह नूर वाला जिसकी ऊंची शान है, आमना का लाल आया, पढ़ती रहीं। जुलूस में शामिल नौजवानों में अधिक उत्साह दिखा। उनके हाथों में इस्लामी परचमों के साथ राष्ट्रीय ध्वज भी लहरहा रहा था। जुलूस में सबसे आगे जमीयत उलमा के पदाधिकारी और मदरसों के बच्चे थे। उनके हाथों में जमीयत का झंडा था। काली धारी वाला ऐसा झंडा फतेह मक्का के दौरान नबी ने फहराया था। जुलूस का जगह-जगह स्वागत किया गया। सामाजिक संगठनों, सियासी दलों, व्यापारी संगठनों ने भी स्टॉल लगाकर लंगर तस्कीम किया। कई स्थानों पर लोगों ने जुलूस में शामिल लोगों को पानी पिलाया। बीच वाले मंदिर के पास कांग्रेस ने अपना पंडाल लगाया। उसमें शहर अध्यक्ष समेत अन्य कांग्रेसी नेता शामिल रहे। सभी ने कांग्रेस नेताओं ने फूल मालाएं पहनाकर और फूलों की बारिश कर स्वागत किया। जुलूस में एक विकलांग तबस्सुम अपनी ट्राईसाइल पर दो बच्चों के साथ शामिल रही। जुलूस के दौरान रास्तों पर पचास से अधिक छोटे-बड़े मंदिर भी पड़े लेकिन किसी भी मंदिर के सामने किसी ने कोई उत्तेजना नहीं दिखाई जिस तरह दूसरे समुदाय के जुलूस में धार्मिक स्थलों के सामने नारेबाजी से मामला बिगड़ जाता है। शांति से जुलूस निकालने की हमेशा चर्चा होती है। हालांकि घाटमपुर में आई लव मोहम्मद का झंडा लेकर चलने एक नाबालिग को एसीपी ने पकड़ा तो पालिका की चेयरमैन पति से उनकी नोकझोंक हो गई। पिछले साल भी कानपुर से ही यह विवाद शुरू हुआ था जो सारे देश में फैल गया था। इसके बाद हर शहर में लोगों ने आई लव मोहम्मद के बैनर लगा दिए थे।
शहर में जुलूस परेड, तलाक महल, चमनगंज, पेंचबाग, नई सड़क, मूलगंज, पटकापुर होता हुआ देर रात फूलबाग में पहुंचकर समाप्त हुआ। जाजमऊ में भी जोहर की नमाज के बाद जुलूस निकाला गया। यह जुलूस मोतीनगर, केडीए कालोनी, नई चुंगी आदि स्थानों से हाता हुआ दादा मियां पहुंचकर समाप्त हुआ। इसी तरह बाबूपुरवा और अन्य क्षेत्रों में जुलूस निकाले गए। जुलूस के दौरान बारिश न होने से राहत रही। हालांकि खराब सड़कों की वजह से अंजुमनों को काफी परेशानी हुई।
फतेहपुर में भी निकाला जुलूस-ए-मोहम्मदी
फतेहपुर में भी जोहर की नमाज के बाद लाला बाजार से जुलूस निकाला गया। जीटी रोड बाकरगंज में बड़ा पंडाल लगाकर जुलूस का स्वागत किया गया। शहर की तमाम अंजुमनें नातें पढ़ती रहीं। कई अंजुमनों के सदस्य अरबी लिबास में भी दिखे। जुलूस तमाम रास्तों से होता हुआ देर रात लाला बाजार पहुंच कर समाप्त हुआ।


