गाजीपुर : 14 वर्ष की उम्र में आजादी की जंग में कूदे थे जमुना गिरी
स्वतंत्रता संग्राम सेनानी स्व. जमुना गिरी को दी श्रद्धांजलि

त्रिलोकी नाथ राय /गाजीपुर। नगर के डीएवी इंटर कॉलेज के सभागार में आयोजित श्रद्धांजलि सभा में स्वतंत्रता संग्राम सेनानी स्व. जमुना गिरी को भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की गई। उपस्थित लोगों ने उनके तैलचित्र पर माल्यार्पण कर देश की आजादी के लिए उनके संघर्ष, साहस और बलिदान को नमन किया। अध्यक्षता करते हुए विद्यालय के प्रबंधक आदित्य प्रकाश आर्य ने कहा डीएवी की भूमि मूल रूप से ऋषि दयानंद की भूमि है। इस पवित्र परिसर में राष्ट्रवाद हमारी सबसे बड़ी वैचारिक संपत्ति है। गौरवशाली इतिहास को याद करते हुए आगे कहा, वर्ष 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन में हमारे वीर स्वतंत्रता सेनानी जमुना गिरी जी ने जो अद्भुत नेतृत्व क्षमता दिखाई थी, वह इसी राष्ट्रवादी वैचारिक सोच का अनूठा परिणाम था। उन्होंने इसी डीएवी स्कूल के छात्रों की टोली बनाकर पूरे जिले में आंदोलन की अलख जगाई। 14 अगस्त 1942 को ब्रिटिश हुकूमत के गौसपुर हवाई अड्डे को फूंक डाला। अंग्रेज सिपाहियों की गोली लगने से वे घायल हुए । नारायण उपाध्याय ने कहा कि भारत लंबे समय तक अंग्रेजी शासन की गुलामी में रहा, लेकिन वर्ष 1942 की अगस्त क्रांति ने ब्रिटिश हुकूमत की चूलें हिला दी थीं। उन्होंने कहा कि यह गर्व की बात है कि महान स्वतंत्रता सेनानी जमुना गिरी इसी विद्यालय में कक्षा नौ के छात्र रहे थे। इसी विद्यालय से आजादी की चेतना की लौ प्रज्वलित हुई थी। विद्यालय के शिक्षक रहे विश्वनाथ उपाध्याय भी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी थे। उन्होंने कहा कि देश की आजादी के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर करने वाले सेनानियों के त्याग और संघर्ष को कभी भुलाया नहीं जा सकता। नई पीढ़ी को उनके जीवन से प्रेरणा लेते हुए देश और समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करना चाहिए। स्वतंत्रता सेनानियों के सपनों को साकार करना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।राजेश राय बागी ने कहा कि शेरपुर के नौजवानों ने स्वतंत्रता आंदोलन में अग्रणी भूमिका निभाकर अंग्रेजी सत्ता के खिलाफ संघर्ष को मजबूत किया था। अमर शहीदों ने अपने सीने पर गोलियां खाकर देश को गुलामी की दास्तां से मुक्ति दिलाने में अहम भूमिका निभाई। उन्होंने बताया कि स्व. जमुना गिरी महज 14 वर्ष की उम्र में ही स्वतंत्रता आंदोलन में कूद पड़े थे। उन्होंने बताया कि 14 अगस्त को छात्रों के साथ उन्होंने हवाई अड्डे में आग लगाने की कार्रवाई में हिस्सा लिया था। इस दौरान अंग्रेजी सैनिकों की गोली से वह अपने साथी विशुनी राय के साथ घायल हो गए। गिरफ्तारी के बाद तत्कालीन कलेक्टर मुनरो ने जमुना गिरी से माफी मांगने को कहा, लेकिन उन्होंने अंग्रेजी हुकूमत के सामने झुकने से साफ इनकार कर दिया। इसके बाद उन्हें सीतापुर जेल भेज दिया गया। श्रद्धांजलि सभा के दौरान विद्यालय के छात्र-छात्राओं ने देशभक्ति गीत प्रस्तुत किए। साथ ही नुक्कड़ नाटक के माध्यम से स्वतंत्रता आंदोलन के संघर्ष, साहस और बलिदान को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया। कार्यक्रम में विद्यासागर गिरी, प्रधानाचार्य हरिशंकर, नारायण उपाध्याय, डा. रमेश राय, हेमनाथ राय, ओमप्रकाश राय, निमेष राय, राजेश राय बागी, डा. आलोक राय, तुंगनाथ राय, बच्चन राय मास्टर, प्रांशु उपाध्याय, बसंत राय, इंद्रलेश आदि ने विचार व्यक्त किए।श्रद्धांजलि सभा की अध्यक्षता विद्यालय के प्रबंधक आदित्य प्रकाश जायसवाल ने की। संचालन दिनेश राय चौधरी ने किया। अंत में उपस्थित लोगों ने स्व. जमुना गिरी के आदर्शों, साहस और देशभक्ति की भावना को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया।


