कानपुरः शहर में जुलूस-ए-मुहम्मदी की तैयारियां शुरू
आजादी से पहले मेस्टन रोड की मंदिर को बचाने में शहीद हो गए थे मुस्लिम, मायूसी को दूर करने के लिए जमीयत उलमा ने निकाला था पहला जुलूस
कानपुर। शहर में ईद मिलादुन्नबी पर एशिया का सबसे बड़ा जुलूस-ए-मुहम्मदी निकाला जाता है। इस बार 26 अगस्त को जश्न-ए-ईद-मिलादुन्नी मनाया जाएगा। शहर में जुलूस के रूट के साथ अंजुमनों से भी अपील की जा रही है। लोडरों में डीजे और बड़े स्पीकर न लगाएं। अंजुमनें अभी से अपने-अपने क्षेत्र में नातों का मुकाबला आयोजित करें। जुलूस के दौरान नातों का नजराना नबी को पेश करें। इससे समाज के अलावा पूरी दुनिया में अच्छा संदेश जाएगा।
जुलूस-ए-मुहम्मदी परेड से निकाला जाता है। इसका भी हिंदू-मुस्लिम एकता का इतिहास रहा है। आजादी से पहले मेस्टन रोड स्थित मंदिर को हटाने के लिए ब्रिटिश हुकूमत ने अभियान चलाया था। उस दौरान मुसलमानों ने उसका विरोध किया। इसमें कई मुस्लिम ब्रिटिश हुकूमत के दौरान पुलिस की गोली से मारे गए थे। पूरे शहर में मायूसी छा गई थी। इसीलिए जमीयत उलमा हिंद ने रजबी रोड से परेड तक जुलूस निकाला। इसके बाद से इसका दायरा बढ़ता गया।
गुरुवार को रजबी ग्राउंड परेड से फूल बाग तक शहर अध्यक्ष डॉ. हलीम उल्लाह खां के नेतृत्व में जुलूस के रूट का पहला सर्वे किया जाएगा। इस महत्वपूर्ण सर्वे का उद्देश्य रास्ते में आने वाली सभी संभावित बाधाओं और समस्याओं को चिन्हित करना है।तय कार्यक्रम के अनुसार, प्रतिनिधिमंडल पूरे रूट का बारीकी से जायजा लेगा। रास्ते में जहाँ-जहाँ भी खराब सड़कें और अन्य अतिक्रमण होंगे, या हादसों को दावत देने वाले बिजली के जर्जर पोल और लटकते हुए तार मौजूद होंगे, उन्हें मौके पर ही नोट किया जाएगा।
कमेटी के पदाधिकारियों के अनुसार, इस सर्वे के दौरान नोट की गई सभी कमियों की एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार करके जिला प्रशासन, पुलिस विभाग, नगर निगम और संबंधित विभागों को सौंपी जाएगी, ताकि जुलूस से पहले इन समस्याओं और बाधाओं को प्राथमिकता के आधार पर हल किया जा सके। मौलाना अमीनुल हक़ अब्दुल्लाह क़ासमी ने बताया कि जमीयत उलमा के सभी कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों की पूरी कोशिश है कि जुलूस-ए-मुहम्मदी के रास्ते में अकीदतमंदों को किसी भी प्रकार की कठिनाई का सामना न करना पड़े।




