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ईरान के शहीद सुप्रीम लीडर को दफनाने की रस्में शुरू, अंतिम यात्रा में शामिल हुए लाखों लोग

18 जुलाई को इराक के नजफ में किया जाएगा सुपुर्देखाक, भारत से राज्यमंत्री और बिहार के राज्यपाल होंगे शामिल, 28 फरवरी को इस्राइल और अमेरिका के हमले में हुए थे शहीद,

कानपुर। ईरान के शहीद सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह अली खामनेई के दफनाने की रस्में ईरान में शुरू हो गईं हैं। गुरुवार को शहीद सुप्रीम लीडर के जनाजे में लाखों की तादाद में शामिल हुए। इस दौरान लोग उनकी याद में नारे लगाते रहे। गमजदा लोग रो-रो कर मातम करते रहे। लोगों के हाथों में शहीद सुप्रीम लीडर की तस्वीर भी थी।

इस्राइल और अमेरिका ने अचानक हवाई हमला करके सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह अली खामेनेई को उनके घर पर शहीद कर दिया था। इस हमले में उनकी पत्नी और बेटी-दामाद भी शहीद हुए थे। हमले के दौरान जान का खतरा होने के बाद भी उन्होंने बंकर में जाने से इनकार कर दिया था। शहादत के बाद से ईरान में उनके जनाजे को सुरक्षित रख दिया गया था। पूरे ईरान में उनको दफनाने के लिए रस्म शुरू हो गई है। गुरुवार को उनका जनाजा निकला तो लाखों लोग जमा हो गई। अपने रहनुमा की अंतिम विदाई पर लोगों की आंखों में आंसू थे। हाथों में रहनुमा की तस्वीर थी। नौ जुलाई तक अलग-अलग राज्यों में उनका जनाजा निकाला जाएगा। इसके बाद 13 और 14 जुलाई को तेहरान में जनाजा अंतिम दर्शन के लिए रखा जाएगा। 16 जुलाई को कुम में तशीए की रस्में होंगी। 17 जुलाई को इराक के नजफ और कर्बला में जनाजा निकाला जाएगा। 18 जुलाई को रहनुमा के जनाजे को मशहद मे इमाम रजा हरम में दफन किया जाएगा।

ईरान के राष्ट्रपति म

हाथों-में-लिए-अपने-रहनुमा-की-तस्वीर।.

हाथों-में-लिए-अपने-रहनुमा-की-तस्वीर।.

सूद पेजेशकियन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी खामेनई की अंतिम यात्रा में शामिल होने के लिए न्योता भेजा था। कई कारणों से प्रधानमंत्री ने वहां जाना मुनासिब नहीं समझा है। भारत सरकार ने अपने प्रतिनिधि के रूप में राज्य मंत्री पबित्रा मार्गेरिटा और बिहार के राज्यपाल सैयद अता हसनैन को भेजने का फैसला किया है। इसके अलावा ईरान ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे व पूर्व मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी को भी न्योता भेजा है। उनके जनाजे कई देशों के प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति और मंत्रियों के अलावा धार्मिक गुरु और राजनेता शामिल होंगे। शहीद खामेनेई की शहादत पर पूरी दुनिया के मुसलमानों में गम और गुस्सा था। इसीलिए पूरी दुनिया का मुसलमान जंग में ईरान के साथ खड़ा रहा। ईरान ने अपनी ताकत से इस्राइल और अमेरिका को झुका दिया। इस पर अमेरिका को दबाव में समझौता करना पड़ा।

ASIF HUSAIN

ASIF HUSAIN EDITOR मैंने अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी से हिंदी साहित्य में परास्नातक (मास्टर) करने के बाद ट्रांसलेशन में पीजी डिप्लोमा किया। इसके बाद पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया। 1997-98 में राष्ट्रीय सहारा में ट्रेनिंग की। इसके बाद 1998 में अमर उजाला कानपुर में ज्वाइन किया। अमर उजाला में कानपुर में रिपोर्टिंग की। गाजीपुर, चंदौली, भदोही, इटावा में ब्यूरोचीफ के पद पर रहा। इसके अलावा मुरादाबाद में संभल डेस्क प्रभारी रहा। झांसी में देहात डेस्क प्रभारी रहा। साथ में कई महत्वपूर्ण कार्यक्रमों की रिपोर्टिंग की। 2023-24 में अमर उजाला में सीनियर सब एडिटर पद से स्वैच्छिक रिटायरमेंट लिया। इसके बाद अपना यूट्यूब चैनल ‘ब्रिलियंट टाइम’ नाम से बनाया। वीकली अखबार भी इसी नाम से निकाला। ‘द्वाबा सम्राट हिंदी दैनिक’ में देश और विदेश पर लेख लिखे। वर्तमान में हिंदुस्तान संदेश से बतौर एडिटर जुड़ा हूं।

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