मोहब्बत और इंसानियत से ही टूटेगी नफरत की दीवार
जुनैद से बोलीं सहारनपुर की सुजाता मां बेटे से मिलने आई है, सोनम वानचुक भी अनशन पर, प्रदर्शन को मिली धार किसान संगठनों का भी समर्थन, दीपके को पगड़ी पहनाकर किया सम्मान
कानपुर। नई दिल्ली के जंतर मंतर पर कॉक्रोच जनता पार्टी नीट पेपर लीक और बीस से अधिक नीट छात्र-छात्राओं के आत्महत्या करने पर शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर धरना दे रहे हैं। धरने में तमाम संगठन अपने स्तर से प्रदर्शनकारियों की सेवा कर रहे हैं। इसमें गाजियाबाद के मोहम्मद जुनैद भी शामिल हैं। उनकी सेवा को देखकर सहारनपुर से महिला सुजाता भी मिलने आ गईं। वह जब जुनैद से मिलीं तो अपनी भावना को नहीं रोक पाईं। उनको अपना बेटा बताते हुए रोने लगीं। उधर, रविवार के पर्यावरण विशेषज्ञ सोनम वानचुक भी भूख हड़ताल पर बैठ गए हैं। हालांकि अभी तक इस प्रदर्शन का केंद्र सरकार ने संज्ञान तक नहीं मिला है।
कॉक्रोच जनता पार्टी के प्रमुख अभिजीत दीपके और उनके साथियों ने दस दिन पहले जंतर-मंतर पर प्रदर्शन शुरू किया था। इस प्रदर्शन में पूरे देशभर के छात्र-छात्राएं और युवा संगठन जुड़ रहे हैं। प्रदर्शनकारियों की सेवा में भी दिल्ली और आसपास के प्रदेशों के कई संगठन लगे हैं। इसमें सिख भाई भी अपना लंगर चला रहे हैं। इसी में गाजियाबाद के मोहम्मद जुनैद भी अपने कई हिंदू दोस्तों के साथ जंतर-मंतर में खाना-पानी पहुंचा रहे हैं। उनकी इस सेवा से अभिजीत दीपके भी बहुत प्रभावित हुए हैं। यहां तक प्रदर्शनकारियों ने मोहम्मद जुनैद के पैर भी दाबे।
यह सब सोशल मीडिया में देखकर सहारनपुर की महिला सुजाता भी बहुत प्रभावित हुईं। वह भी उनसे मिलने के लिए जंतर-मंतर पहुंच गईं। वहां पर उन्होंने कहा कि बेटा जुनैद तुम्हारी मां सहारनपुर से मिलने के लिए आई है। इसी तरह लोगों की सेवा करते रहो। यही हिंदू-मुस्लिम की एकता है। कितनी भी नफरत की दीवार ऊंची की जाए लेकिन इंसानियत और मोहब्बत को कम नहीं किया जा सकता है। यही सच्ची मोहब्बत, भाईचारा और इंसानियत है।
उधर, रविवार से सोनम वानचुक भी अनशन पर बैठे हैं। लद्दाख में हंगामा होने पर उनको जिम्मेदार बताते हुए केंद्र सरकार ने उन पर राजद्रोह का केस लगाकर जयपुर जेल भेज दिया था लेकिन बाद में दबाव के कारण केस वापस लेना पड़ा था। सोनम वानचुक के अनशन करने से प्रदर्शन को नई धार मिली है। हालांकि दीपके कई बार कह चुके हैं कि पुलिस हर तरह के हथकंडे अपना रही है। इसके बाद भी हम लोग धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे तक डटे रहेंगे। किसान संगठनों ने भी प्रदर्शन को समर्थन दिया है। रविवार को दीपके को पगड़ी भी पहनाई गई।

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