लखनऊ : नए शैक्षिक सत्र की तैयारियों में जुटा बेसिक शिक्षा विभाग
अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा ने की समीक्षा

लखनऊ। बेसिक शिक्षा विभाग ने नए शैक्षिक सत्र को अधिक प्रभावी बनाने के लिए व्यापक कार्ययोजना तैयार की है। अपर मुख्य सचिव बेसिक शिक्षा पार्थ सारथी सेन शर्मा ने शुक्रवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सभी मंडलीय सहायक शिक्षा निदेशक और जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक कर ग्रीष्मावकाश के उपरांत विद्यालयों के संचालन, छात्र नामांकन, शिक्षकों के लंबित मामलों तथा विभिन्न शैक्षिक योजनाओं की प्रगति की विस्तृत समीक्षा की। निर्देश दिया कि विद्यालय खुलने से पूर्व सभी आवश्यक तैयारियां पूर्ण कर ली जाएं ताकि बच्चों को पहले दिन से ही बेहतर शैक्षिक वातावरण उपलब्ध कराया जा सके। शिक्षकों के कौशल विकास कार्यक्रमों को गति देने तथा अंतर-जनपदीय स्थानांतरण प्रक्रिया को पारदर्शी एवं समयबद्ध तरीके से संपन्न कराने के निर्देश दिए। साथ ही समग्र शिक्षा अभियान के अंतर्गत स्पिल-ओवर कार्यों, कंपोजिट स्कूल ग्रांट, पाठ्यपुस्तकों एवं अन्य मदों के लंबित भुगतानों का शीघ्र निस्तारण सुनिश्चित करने को कहा। निपुण भारत मिशन की समीक्षा करते हुए उन्होंने जनपद स्तर पर एकेडमिक रिसोर्स पर्सन (एआरपी) और ईसीसीई एजुकेटर के चयन की कार्यवाही तत्काल पूर्ण करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार बुनियादी साक्षरता एवं संख्यात्मक ज्ञान को मजबूत बनाने के लिए प्रतिबद्ध है और इस दिशा में किसी भी स्तर पर लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। बैठक में शिक्षकों से संबंधित लंबित प्रकरणों को प्राथमिकता के आधार पर निस्तारित करने पर भी जोर दिया गया। चयन वेतनमान, प्रोन्नत वेतनमान, सेवानिवृत्ति लाभ तथा मृतक आश्रितों की नियुक्ति से जुड़े मामलों का शीघ्र समाधान कर पात्र लाभार्थियों को समय पर लाभ उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए। प्रधानमंत्री पोषण योजना के अंतर्गत लंबित देयकों का भुगतान सुनिश्चित करने के साथ विद्यालयों में किचन गार्डन विकसित करने की कार्ययोजना पर विशेष बल दिया गया। निर्देश दिए गए कि विद्यालय परिसरों और छतों की सफाई कर स्थानीय स्तर पर उपयोगी सब्जियों का रोपण कराया जाए, जिससे बच्चों को पोषणयुक्त आहार उपलब्ध कराने के प्रयासों को और मजबूती मिल सके। अपर मुख्य सचिव ने स्कूल चलो अभियान को नए सत्र की सबसे महत्वपूर्ण प्राथमिकताओं में शामिल करते हुए सभी पात्र बच्चों का नामांकन सुनिश्चित करने तथा एक विद्यालय से दूसरे विद्यालय में शत-प्रतिशत ट्रांजीशन कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि विद्यालय खुलने के बाद अकादमिक कैलेंडर के अनुरूप नियमित पठन-पाठन, विद्यार्थियों की उपस्थिति, सतत मूल्यांकन और सीखने के परिणामों पर विशेष ध्यान दिया जाए। बैठक में न्यायालयों से संबंधित मामलों की समीक्षा करते हुए सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालय के आदेशों का समयबद्ध अनुपालन सुनिश्चित करने तथा लंबित याचिकाओं में नियमानुसार कार्यवाही कर समय से काउंटर दाखिल करने के निर्देश दिए गए।
विद्यालयों में शैक्षिक वातावरण को समृद्ध बनाने के लिए आरटीई अधिनियम के अंतर्गत लंबित प्रवेशों को पूरा करने, नियमित पुस्तक एवं समाचार पत्र पठन को बढ़ावा देने तथा विद्यार्थियों में स्वतंत्र लेखन की प्रवृत्ति विकसित करने पर भी बल दिया गया। शिक्षक संकुल बैठकों को अधिक सार्थक बनाने तथा ऑपरेशन कायाकल्प के 19 मानकों को पूर्ण करने के निर्देश दिए गए। विशेष रूप से छात्राओं के लिए सुरक्षित एवं स्वच्छ शौचालय, विद्युत व्यवस्था, दिव्यांग बच्चों के लिए सीडब्ल्यूएसएन शौचालय और रैंप जैसी सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने को कहा गया। विद्यालय परिसरों में संचालित आंगनबाड़ी केंद्रों एवं बाल वाटिकाओं के प्रभावी संचालन पर जोर देते हुए कहा कि तीन से छह वर्ष आयु वर्ग के बच्चों की देखभाल और प्रारंभिक शिक्षा की गुणवत्ता में किसी प्रकार की कमी नहीं होनी चाहिए। बैठक में नव भारत साक्षरता कार्यक्रम की उपलब्धियों की भी समीक्षा की गई। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि 15 वर्ष से अधिक आयु वर्ग के असाक्षरों की पहचान, स्वयंसेवकों के प्रशिक्षण, जागरूकता अभियान तथा ऑनलाइन एवं ऑफलाइन शिक्षण गतिविधियों को और व्यापक बनाया जाए। भारत सरकार द्वारा प्रति असाक्षर 165 रुपये की दर से सहायता प्रदान की जा रही है तथा वर्ष 2026-27 के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। प्रदेश में नव भारत साक्षरता कार्यक्रम के अंतर्गत अब तक सात साक्षरता परीक्षाएं सफलतापूर्वक आयोजित की जा चुकी हैं। इन परीक्षाओं में लगभग 13.82 लाख असाक्षरों ने भाग लिया, जिनमें से 11.68 लाख से अधिक व्यक्तियों को साक्षर बनाया जा चुका है।




