
डॉ एके राय / गाजीपुर। जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट) सैदपुर के शोध एवं नवाचार प्रकोष्ठ द्वारा आयोजित दो दिवसीय क्रियात्मक शोध कार्यशाला मंगलवार को सम्पन्न हुई। शोध कार्यशाला का शुभारम्भ 30 मार्च 2026 को मुख्य वक्ता डॉ रूचि दुबे (इलाहाबाद विश्वविद्यालय), डॉ प्रतीक उपाध्याय (के.एन.पी.जी. कॉलेज, ज्ञानपुर, भदोही) एवं डॉ कल्पनाथ सोनकर बुंदेलखंड विश्वविद्यालय की उपस्थिति में हुआ। कार्यशाला के प्रथम दिवस के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए डॉ प्रतीक उपाध्याय ने शोध, शोध प्रकार एवं क्रियात्मक शोध की आवश्यकता पर प्रकाश डाला। जबकि द्वितीय सत्र में डॉ रुचि दूबे ने बताया कि क्रियात्मक शोध शिक्षा में गुणवत्ता सुधार का एक प्रभावी एवं व्यावहारिक माध्यम है। यह शिक्षकों को अपनी कक्षा में उत्पन्न समस्याओं की पहचान कर उनके समाधान हेतु वैज्ञानिक एवं व्यवस्थित दृष्टिकोण अपनाने के लिए प्रेरित करता है। उन्होंने कहा कि वर्तमान शैक्षिक परिदृश्य, विशेषकर राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के संदर्भ में, क्रियात्मक शोध की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो गई है। उन्होंने क्रियात्मक शोध की प्रक्रिया को विस्तृत रूप से वर्णित किया। कार्यशाला के द्वितीय दिवस डॉ कल्पनाथ सोनकर असिस्टेंट प्रोफेसर बुंदेलखण्ड विश्वविद्यालय ने क्रियात्मक शोध रिपोर्ट लेखन को अति आवश्यक बताते हुए उसके विभिन्न विन्दुओं पर विस्तार से जानकारी दी। डॉ सर्वेश कुमार राय अध्यक्ष शोध एवं नवाचार प्रकोष्ठ, डायट गाजीपुर के संयोजकत्व में आयोजित कार्यशाला में प्रकोष्ठ के सदस्य राजवंत सिंह एवं डॉ अर्चना सिंह ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। कार्यशाला के सफलतापूर्वक संपन्न होने पर डॉ सर्वेश कुमार राय ने सभी अतिथियों, सहयोगियों और प्रतिभागियों के प्रति आभार ज्ञापित किया।




