
शिबू ख़ान/फतेहपुर। बुंदेलखंड और अवध क्षेत्र के लोगों को आने-जाने के लिए राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण(एनएचएआई) ने नई पहल की है।लंबे समय से जाम और संकरी सड़क की समस्या झेल रहे वाहन चालकों को जल्द ही बेहतर आवागमन की सुविधा मिलने वाली है। बांदा-टांडा मार्ग को फोर लेन बनाने की दिशा में एनएचएआई ने बड़ी पहल की है।भारी वाहनों के बढ़ते दबाव और लगातार लगने वाले जाम को देखते हुए 300 किलोमीटर लंबे मार्ग के चौड़ीकरण के लिए एनएचएआई विभाग ने 6500 करोड़ रुपये की लागत का प्रोजेक्ट तैयार कर शासन को भेज दिया है। यह मार्ग, फतेहपुर, रायबरेली, अमेठी,सुल्तानपुर और अंबेडकरनगर जिलों को जोड़ता है।वर्तमान समय में इससे प्रतिदिन पांच से छह छोटे-बड़े वाहन गुजरते हैं। विशेष रूप से गिट्टी और मौरंग से लदे भारी वाहनों का आवागमन अधिक होने से इस पर दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है। बांदा-टांडा मार्ग मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश को जोड़ने का काम करता है।यह भोपाल और लखनऊ दो राजधानियों सहित बांदा, फतेहपुर, रायबरेली को जोड़ता है। इससे मध्य प्रदेश तक लोग आवागमन करते है।महोबा जिले के कबरई और चित्रकूट जिले के भरत कूप से भवन व सड़क निर्माण के लिए गिट्टी और बांदा,छतरपुर जिले की मौरंग खदानों को माल लेकर भारी वाहन आवागमन करते हैं। यह वाहन कानपुर, रायबरेली, लखनऊ, प्रतापगढ़,गाेंडा, बस्ती,बहराइच आदि जिलों के लिए माल लेकर जाते हैं। मार्ग संकरा होने पर वाहन एक दूसरे को पास नहीं कर पाते और लंबा जाम लगता है,जिससे स्थानीय लोग को आने-जाने में दिक्कत होती है।साथ ही जाम लग जाने से व्यापारियों का नुकसान होता है और जाम में स्कूल के वाहन घंटों फंसे रहते थे। वाहनों का दबाव अधिक होने से एनएचएआई विभाग ने इस मार्ग को फोर लेन बनाने का निर्णय लिया है। फोर लेन बनने के बाद आवागमन सुगम होगा,यात्रा का समय कम लगेगा और सड़क दुर्घटनाओं में भी कमी आने की उम्मीद है।स्थानीय लोगों और व्यापारियों ने इस परियोजना को क्षेत्र के विकास के लिए महत्वपूर्ण कदम बताया है। इस परियोजना के लागू होने से कई जिलों के बीच यातायात तेज और सुरक्षित होगा। साथ ही व्यापारिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
बांदा-टांडा मार्ग स्थित बहुआ-शाह कस्बे में आबादी अधिक हो जाने और प्रतिदिन बढ़ते वाहनों के दबाव को लेकर एनएचए आई ने दोनों कस्बों में बाईपास बनाने की तैयारी कर रहा है,जिससे स्थानीय लोगों को आवागमन में सहूलियत मिलेगी और वाहनों के आने-जाने की रफ्तार बढ़ेगी। साथ ही कस्बे में जाम से छुटकारा मिल जाएगा। बांदा-टांडा मार्ग में वाहनों के दबाव को देखते हुए एनएचएआई ने पूरे 300 किमी लंबे मार्ग को डिवाइडर युक्त बनाने का निर्णय लिया है, ताकि वाहन अपनी-अपनी दिशा पर ही चले, जिससे सड़क दुर्घटनाएं कम होगी। डिवाइडर बनने से दूसरी दिशा के वाहन दूसरी लाइन में नहीं आएंगे,जिससे यातायात के नियमों का पालन भी हो सकेगा। बांदा-टांडा मार्ग के फतेहपुर बाइपास में बने आरओबी के पास ही दूसरा आरओबी बनाने का प्रस्ताव एनएचएआई ने शासन को भेजा है,जिससे बिना रुके वाहन आवागमन कर सकें और समय रहते वाहन अपनी यात्रा तय करेंगे। लखनऊ बाइपास कानपुर-प्रयागराज हाईवे को जोड़ने के कारण एनएचएआई ने इस स्थान पर पुल बाने का प्रस्ताव दिया है। ताकि बांदा-टांडा मार्ग से चलकर आने वाले वाहन आसानी से कानपुर-प्रयागराज हाईवे में चढ़ सकेंगे। बांदा-टांडा मार्ग बांदा बाइपास से शुरू होता है। यह मार्ग यमुना नदी और गंगा नदी को पार करता है।बांदा जिले के बेंदा गांव में यमुना नदी और फतेहपुर जिले के असनी गांव में गंगा नदी पर नए पुलों के निर्माण के लिए प्रोजेक्ट तैयार कर के शासन को भेजा है।



