गाजीपुर : श्रीमद भागवत कथा के छठे दिन रानी रूकमणी विवाह प्रसंग

चंद्र मोहन तिवारी/गाजीपुर। श्रीमद् भागवत कथा यज्ञ श्री राणीसती श्याम भक्त मंडल के तत्वाधान में शुक्रवार को अग्रसेन मैरेज हाल झुन्नू लाल चौराहा पर आयोजित श्रीमद् भागवत कथा यज्ञ के आज छठवें दिन वृदावन से पधारे गुरु जी संजय शर्मा के मुखार बिंदु से श्री रुक्मणी विवाह महोत्सव का कथा व सजीव मंचन हुआ। जिसमें विदर्भ के राजा भीष्मक की एक कथा सुनने को मिलती है। भीष्मक के 5 पुत्रों के अलावा, उनकी एक पुत्री भी थीं, रुक्मणी। अत्यंत सुंदर, बुद्धिमान और सदाचारी व्यवहार वाली रुक्मणी, बचपन से ही श्री कृष्ण की साहस और वीरता की कायल थीं। ऐसा भी कहा जाता है, कि उन्होंने श्रीकृष्ण द्वारा कंस के वध को भी साक्षात देखा था। देवी रुक्मणी के पिता और भाई रुक्मी का संबंध, सदैव श्री कृष्ण का अहित चाहने वाले जरासंध, कंस और शिशुपाल से था। यही वजह थी, कि रुक्मणी का विवाह श्री कृष्ण से होना संभव नहीं था। जब राजनीतिक संबंधों को ध्यान में रखकर शिशुपाल से रुक्मणी का विवाह उनकी मर्ज़ी के विरुद्ध तय हो गया, तब देवी से रहा नहीं गया और उन्होंने प्रेम पत्र लिखकर ब्राह्मण कन्या सुनन्दा के हाथों, श्री कृष्ण तक पहुंचा दिया। भेजे गए उस पत्र में रुक्मणी लिखती हैं, “हे नंद-नंदन! मैंने आपको ही पति के रूप में वरण किया है। मैं आपके अतिरिक्त, किसी अन्य पुरुष से विवाह नहीं कर सकती। मेरे पिता और भाई, मेरी इच्छा के विरुद्ध मेरा विवाह शिशुपाल के साथ करना चाहते हैं और विवाह तिथि भी निश्चित है। मेरे कुल की रीति है कि विवाह पूर्व दुल्हन की वेशभूषा में वधु नगर के बाहर गिरिजा मंदिर में दर्शन प्राप्ति हेतु जाती है। मैं भी वहां जाउंगी। अतः आपसे मेरा निवेदन है, कि आप आएं और मुझे पत्नी के रूप में वहीं स्वीकार करें। अगर आप नहीं आते हैं, तो मैं अपने प्राणों का त्याग करने की मंशा रखती हूँ। अब भगवान श्री कृष्ण तो स्वयं सृष्टि के रचयिता हैं, उनसे तो कुछ भी छुपा नहीं था। फिर जब उन्हें यह आभास हुआ, कि देवी रुक्मणी संकट में हैं, तो उन्होंने एक योजना बनाई। जब शिशुपाल बारात लेकर विदर्भ पहुंचा, उससे पहले ही श्री कृष्ण अपने बड़े भाई बलराम की मदद से रुक्मणी का हरण कर के वहां से चले गए। हरण के पश्चात श्री कृष्ण ने शंख की ध्वनि से धरती से आसमान तक, इसकी सूचना दे दी और यह देखकर शिशुपाल भी अत्यंत क्रोध में आ गया। वह तुरंत ही श्री कृष्ण के वध की मंशा से निकल पड़ा, लेकिन यहां भी उसके हाथों हार ही लगी और प्रभु, देवी रुक्मणी समेत द्वारिका की ओर प्रस्थान कर गए। द्वारिका में श्री कृष्ण और रुक्मणी के विवाह की उत्तम तैयारी हुई और यह विवाह संपन्न हुआ। इस अवसर पर तमाम संख्या में नगरवासी व भक्तगण, महिलाएं बच्चों की उपस्थिति रही, कार्यक्रम में प्रमुख रूप से श्री राजेश केडिया, संजय केजरीवाल, विनोद खेतान, कन्हैया लाल केडिया, सच्चिदानंद टीबडेवाल, संतोष सर्राफ, अजय अग्रवाल आदि रहे।



