जौनपुर के सियासी गलियारों में बाहुबली बृजेश सिंह की एंट्री से मची खलबली

पूर्वांचल की धरती बाहुबल और सियासी कॉकटेल के लिए जानी जाती रही है। इस समय जौनपुर के सियासी गलियारों में एक नई सियासी चर्चा हैं। लंबे समय से यह सुगबुगाहट थी। वाराणसी और गाजीपुर में अपना डंका बजाने वाले बाहुबली बृजेश सिंह अब जौनपुर की सियासत में एंट्री कर सकते हैं। जौनपुर की बदलापुर विधानसभा में हाल ही में महाराणा प्रताप जयंती का एक भव्य कार्यक्रम आयोजित किया गया था। इस मंच पर बाहुबली बृजेश सिंह के साथ उनके बेटे सिद्धार्थ सिंह नजर आए। प्रतापगढ़ के पूर्व सांसद हरिवंश सिंह समेत भारतीय जनता पार्टी के कई स्थानीय दिग्गजों ने जिस गर्मजोशी से बृजेश सिंह और उनके बेटे का स्वागत किया था । जिससे बहुत कुछ साफ हो गया है। जौनपुर की ताकतवर ठाकुर लॉबी अब यह मन बना चुकी है। जौनपुर जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी पर बृजेश सिंह के बेटे सिद्धार्थ सिंह को बैठाया जाए। इससे पहले जौनपुर से बीजेपी के टिकट पर लोकसभा चुनाव लड़ चुके कृपा शंकर सिंह ने भी सिद्धार्थ सिंह के चुनाव लड़ने को लेकर खुले तौर पर संकेत दिए थे। फिलहाल जौनपुर जिला पंचायत अध्यक्ष की हाई-प्रोफाइल कुर्सी पर धनंजय सिंह की पत्नी श्रीकला धनंजय सिंह का कब्जा है। जौनपुर में धनंजय सिंह का एकछत्र दबदबा है। चर्चा है कि बीजेपी का एक धड़ा बृजेश सिंह के जरिए धनंजय सिंह के इसी दबदबे को जमींदोज करने की तैयारी में है। जब एक पॉडकास्ट में धनंजय सिंह से बृजेश सिंह की एंट्री को लेकर सवाल पूछा गया, तो उन्होंने बड़े बेबाक अंदाज में कहा कौन बृजेश सिंह, लोकतंत्र है ,जो भी राजनीतिक जीवन में है उसे प्रयास करने का पूरा अधिकार है।अकेले हम ही तो राजनीति करेंगे नहीं, लोकतंत्र में सबका स्वागत है,आएं और समाज की सेवा करें।जब मैं बड़ी पार्टियों से खतरा नहीं समझता, तो किसी व्यक्ति विशेष से क्या डरूंगा।धनंजय ने यह भी साफ किया कि बृजेश सिंह के भतीजे सुशील सिंह के साथ उनके 2007 से ही अच्छे राजनीतिक संबंध रहे हैं।इसलिए उनके बीच कोई व्यक्तिगत दुश्मनी या मनमुटाव नहीं है।



