
सुधांशु / वाराणसी । वैश्विक राजनीति के बदलते परिदृश्य को समझने के उद्देश्य से वसंत महिला महाविद्यालय, राजघाट (वाराणसी) में “पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक हलचल एवं भारत की रणनीतिक प्रतिक्रिया” विषय पर राजनीति विज्ञान विभाग द्वारा एक विशिष्ट अतिथि व्याख्यान का आयोजन किया गया। प्रोफेसर तेज प्रताप सिंह, राजनीति विज्ञान विभाग, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय मुख्य वक्ता रहे। प्रोफेसर सिंह अंतर्राष्ट्रीय संबंधों तथा शांति व संघर्ष अध्ययन के क्षेत्र में विशेषज्ञ हैं।मुख्य वक्ता ने भूराजनीति के तीन आयामों – भूभाग, अवस्थिति तथा संसाधन पर विस्तार से चर्चा की। प्रो सिंह ने अपने वक्तव्य में पश्चिम एशिया के भू-राजनीतिक महत्व को स्पष्ट करते हुए बताया कि यह क्षेत्र वैश्विक संसाधनों, सामरिक मार्गों तथा अंतर्राष्ट्रीय शक्ति संतुलन की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण रहा है, जो विशेष रूप से अमेरिका के नीतिगत हितों को प्रतिबिंबित करता है। उन्होंने इज़राइल–ईरान तथा अमेरिका के बीच उभरते तनाव और संभावित संघर्ष के सामरिक विश्लेषण के माध्यम से वैश्विक राजनीति पर उसके प्रभावों को रेखांकित किया। साथ ही, इस पृष्ठभूमि में इजराइल – फिलिस्तीन संघर्ष, अरब राष्ट्रों की भूमिका, ईरान द्वारा अपनाई गई नीतियाँ तथा क्षेत्र के विभिन्न अंतर्विरोधों एवं गतिरोधों पर भी विस्तार से प्रकाश डाला। प्रो सिंह ने वर्तमान संदर्भ में भारतीय प्रतिक्रिया को स्ट्रैटेजिक ऑटोनोमी , स्ट्रैटेजिक साइलेंस तथा कैलीबरेटेड इंगेजमेंट पर आधारित बताया। उन्होंने अमेरिकी वर्चस्ववादी नीति का विश्लेषण करते हुए बताया कि अमेरिका अपने निहित स्वार्थों की पूर्ति हेतु मध्यपूर्व तथा उत्तरी अफ्रीका में सतत युद्ध की स्थिति को बनाए रखना चाहता है।उन्होंने अमेरिका की वर्तमान नीति के संभावित प्रभाव को पॉल कैनेडी के इंपीरियल ओवररिच के संदर्भ में व्याख्यायित किया। प्रो सिंह ने कहा कि समकालीन युग स्मार्ट पावर का है जो हार्ड पावर तथा सॉफ्ट पावर के मेल पर आधारित होता है। व्याख्यान के पश्चात प्रश्नोत्तर सत्र का आयोजन किया गया, जिसमें विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लेते हुए अपने प्रश्न पूछे। वक्ता द्वारा दिए गए स्पष्ट उत्तरों ने इस सत्र को अत्यंत संवादात्मक और जीवंत बना दिया। यह व्याख्यान विद्यार्थियों के लिए न केवल ज्ञानवर्धक सिद्ध हुआ, बल्कि वर्तमान वैश्विक परिदृश्य को समझने एवं उसके प्रति एक संतुलित और विवेकपूर्ण दृष्टिकोण विकसित करने में भी सहायक रहा। कार्यक्रम के अंत में डॉ. पुनीता पाठक द्वारा धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया गया। कार्यक्रम का संचालन सुर्यांशी द्वारा कुशलतापूर्वक किया गया। इस अवसर पर प्रो प्रीति सिंह, डॉ. पुनीता पाठक, डॉ. मनीषा मिश्र, डॉ. विभा सिंह, डॉ. अरविंद जायसवाल, डॉ. प्रतीक सिंह, डॉ. मुशीरा जावेद, डॉ. कृष्ण मोहन एवं डॉ. श्वेता शिल्पा उपस्थित रहे। कार्यक्रम के सफल आयोजन में विजयमोहिनी, श्रेया, निक्की, रितिका, एलिजाबेथ, वंशिका, शोभिता, अनुराधा एवं पूर्वा का योगदान भी सराहनीय रहा।




