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ढाका : साझा विरासतः भारतीय उच्चायोग ने ढाका में मनाया बंगाली नव वर्ष

ढाका। बांग्लादेश स्थित भारतीय उच्चायोग ने पोहेला बोइशाख (बंगाली नववर्ष) के अवसर पर यहां दो दिवसीय संगीत संध्या का आयोजन किया, जिसमें भारत-बांग्लादेश की साझा सांस्कृतिक विरासत की नायाब झलक देखने को मिली।  ढाका स्थित इंदिरा गांधी सांस्कृतिक केंद्र (आईजीसीसी) में आयोजित इस कार्यक्रम का शीर्षक ‘बाधों आछे प्राणे प्राणे: ऑफ हार्मनी विदइन’ था, जिसमें भारतीय उच्चायुक्त प्रणय वर्मा के अलावा बांग्लादेश सरकार के वरिष्ठ गणमान्य व्यक्तियों के साथ-साथ व्यापार, मीडिया, शिक्षा जगत और सांस्कृतिक समुदाय के प्रतिनिधियों ने भी शिरकत की। भारतीय उच्चायोग ने एक आधिकारिक बयान में कहा समारोह में बांग्लादेश की जानी-मानी रबींद्र संगीत गायिका आदित्य मोहसिन ने प्रस्तुति दी, जिनके साथ भारत के प्रख्यात बंगाली गायक श्रीकांत आचार्य भी शामिल हुए। दोनों कलाकारों ने दोनों देशों के बीच संगीत, उत्सव और संस्कृति की साझा विरासत को सुरमयी अंदाज़ में प्रस्तुत किया। इस कार्यक्रम में एचएसबीसी बांग्लादेश ने एक भागीदार के रूप में सहयोग किया। यह विरासत और रचनात्मकता को बढ़ावा देने की दिशा में एक सार्वजनिक-निजी सहयोग का उदाहरण था। उच्चायोग ने कहा इस दौरान उच्चायुक्त वर्मा ने अपने संबोधन में कहा कि भारत और बांग्लादेश के बीच सांस्कृतिक बंधन उनकी राष्ट्रीय सीमाओं से भी अधिक पुराने और गहरे हैं। उन्होंने सीमा के दोनों ओर के दो प्रतिष्ठित गायकों की एक ही मंच पर उपस्थिति को एक सशक्त प्रतीक बताया। उनके अनुसार, यह प्रतीक दोनों देशों के लोगों को जोड़ने वाली सांस्कृतिक निरंतरता को दर्शाता है, आपसी समझ के सेतु निर्मित करता है और परस्पर विश्वास व सम्मान को प्रतिबिंबित करता है। इस आयोजन का मुख्य आकर्षण भारत और बांग्लादेश की साझी सांस्कृतिक विरासत को संगीत के जरिए पेश करना था। अदिति मोहसिन और श्रीकांत आचार्य ने रवींद्र संगीत और आधुनिक बंगाली गीतों के माध्यम से दोनों देशों के बीच के ‘प्राणों के बंधन’ (हार्ट-टू-हार्ट कनेक्शन) को प्रदर्शित किया। उनकी प्रस्तुतियों ने दिखाया कि सरहदें कला और सुरों को नहीं बांट सकतीं। उल्लेखनीय है कि पड़ोसी देश में तख्तापलट के बाद भारत और बांग्लादेश के रिश्ते फिर से पटरी पर लौट रहे हैं। हाल ही में बांग्लादेश की नई सरकार के विदेश मंत्री खलीलुर रहमान ने भारत का दौरा किया था। वहीं भारतीय उच्चायुक्त वर्मा ने भी ढाका में सरकार के कई वरिष्ठ पदाधिकारियों से मुलाकात कर द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत बनाने को लेकर चर्चा की है। भारत अपनी ‘पड़ोसी प्रथम’ नीति के तहत पिछले कई वर्षों से बांग्लादेश के विकास में निरंतर अपना योगदान देता रहा है, जिसके भविष्य में और विस्तारित होने के आसार हैं।

(रिपोर्ट. शाश्वत तिवारी)

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