National News हमने टकराव की जगह संवाद, विभाजन की जगह सहमति पर जोर दियाः जयशंकर

नई दिल्ली। विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने मानवाधिकारों के प्रति एक व्यापक दृष्टिकोण अपनाने का आह्वान किया है। उन्होंने मानवाधिकारों को लेकर दोहरे मापदंड और ‘राजनीतिक बयानबाजी’ से ऊपर उठकर विकास, क्षमता निर्माण तथा आतंकवाद के खिलाफ सख्त रवैया अपनाने की आवश्यकता पर जोर दिया। डॉ. जयशंकर ने 25 फरवरी को संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद के 61वें सत्र को वर्चुअली संबोधित करते हुए कहा कि मानवाधिकारों का उद्देश्य सबसे कमजोर वर्ग के लोगों के दैनिक जीवन में ठोस सुधार लाना होना चाहिए। विदेश मंत्रालय के बयान के अनुसार, उन्होंने कहा संघर्ष, ध्रुवीकरण और अनिश्चितता से ग्रस्त दुनिया में भारत साझा आधार खोजने और उसका विस्तार करने का प्रयास करता है। हमने लगातार टकराव की जगह संवाद, विभाजन की जगह सहमति और संकीर्ण हितों की जगह मानव-केंद्रित विकास पर जोर दिया है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत का दृष्टिकोण इस समझ पर आधारित है कि किसी भी क्षेत्र की असुरक्षा या किसी भी समूह को हाशिए पर धकेलना अंत में सभी के अधिकारों और कल्याण को कमजोर करता है। डॉ. जयशंकर ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र और मानवाधिकार परिषद को मानवाधिकारों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को पूरी तरह से साकार करने के लिए ‘आतंकवादी कृत्यों के लिए शून्य सहिष्णुता’ की वकालत करनी चाहिए। उल्लेखनीय है कि भारत हाल ही में सातवीं बार मानवाधिकार परिषद का सदस्य चुना गया है और उसे संयुक्त महासभा में 188 में से 177 वोट मिले हैं। इस पर जयशंकर ने कहा कि यह वैश्विक समुदाय, खासकर ग्लोबल साउथ के देशों के भरोसे को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि भारत मानवाधिकारों को बढ़ावा देने के लिए राजनीति, दोहरे मानदंड और चयनात्मक रवैये के बजाय संवाद, साझेदारी और क्षमता निर्माण पर विश्वास करता है। भारत के डीपीआई का उदाहरण देते हुए विदेश मंत्री ने कहा डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (डीपीआई) से करोड़ों लोगों को पारदर्शी तरीके से कल्याण योजनाओं, वित्तीय सेवाओं और सरकारी सुविधाओं तक पहुंच मिली है और भारत अपने अनुभव को वैश्विक हित में साझा भी कर रहा है।
(रिपोर्ट. शाश्वत तिवारी)




