
अजित पाण्डेय/वाराणसी। महाशिवरात्रि पर भव्य वैदिक विधि-विधान से संपन्न हुए विवाह के बाद अब बाबा विश्वनाथ एवं मां गौरा के हल्दी रस्म की तैयारियां पूरे उत्साह के साथ शुरू हो गई हैं। रंगभरी एकादशी से पूर्व होने वाली इस महत्वपूर्ण रस्म के लिए काशी के प्रसिद्ध दुर्गा मंदिर के महंत परिवार द्वारा हल्दी व विवाह-सामग्री लेकर मंगलवार को टेढ़ी नीम स्थित महंत आवास के लिए प्रस्थान किया गया। बाबा का हल्दी से सजी थाल कौशल प्रति द्विवेदी दुर्गाकुंड महंत हाथों में लेकर चल रहे थे उनके साथ हजारों की संख्या में मंदिर परिवार से जुड़े लोग और श्रद्धालु भी चल रहे थे।
पारंपरिक लोकाचार के साथ निकली शोभायात्रा
हल्दी यात्रा में दुल्हन की विदाई से जुड़े सभी पारंपरिक लोकाचार शामिल किए गए। विशेष रूप से रुद्राक्ष की माला, खड़ाऊ, मेवा, साड़ी, फल और अन्य मांगलिक सामग्री को सजाकर ले जाया गया। महंत परिवार के आगे-आगे शहनाई और डमरू दल की गूंजती धुनों ने पूरे वातावरण को शिवमय और भक्तिमय बना दिया। यह यात्रा दुर्गा मंदिर से पैदल सोनारपुर तक जाएगी, इसके बाद चौक क्षेत्र में श्रद्धालु एकत्र होकर टेढ़ीनीम महंत आवास के लिए रवाना होंगे। सैकड़ों की संख्या में काशीवासी इस यात्रा में शामिल होकर आस्था और उत्साह का परिचय दे रहे हैं।
रंगभरी एकादशी पर होगा गौना
महाशिवरात्रि के दिन काशी विश्वनाथ मंदिर में पारंपरिक रीति से विवाह संपन्न होने के बाद अब रंगभरी एकादशी के दिन मां गौरा का गौना संपन्न होगा। काशी की इस अनूठी परंपरा को देखने के लिए देश-विदेश से श्रद्धालु आते हैं।
सौभाग्य की अनुभूति” – अश्वनी शुक्ला
यात्रा में शामिल होने पहुंचे अश्वनी शुक्ला ने कहा कि उन्हें बाबा विश्वनाथ एवं मां गौरा के हल्दी रस्म में शामिल होने का सौभाग्य मिला है। उन्होंने इसे अपने जीवन का विशेष क्षण बताते हुए कहा कि बाबा का आशीर्वाद उन पर बना रहे और वे हर वर्ष इस दिव्य परंपरा में शामिल होने का प्रयास करेंगे।काशी की सदियों पुरानी यह परंपरा न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि लोकसंस्कृति और सामाजिक एकता का भी अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत करती है।



