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धर्मवाराणसी

वाराणसी : कुलगुरु और गुरुकुल परंपरा से ही बचेगा सनातन परिवार” — पूज्य श्री 1008 रतन वशिष्ठ जी महाराज

काशी से उठी सनातन जागरण की हुंकार

अजीत पांडेय /वाराणसी। आध्यात्मिक चेतना की राजधानी वाराणसी की पावन धरा पर आयोजित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की सामाजिक सद्भावना बैठक में सनातन समाज के भविष्य को लेकर एक प्रखर और निर्णायक स्वर गूंजा। वन शक्ति देवी धाम के पीठाधीश्वर एवं ऋषि सनातन संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष पूज्य श्री 1008 रतन वशिष्ठ जी महाराज ने अपने ओजस्वी उद्बोधन में स्पष्ट कहा“संस्कारों से ही परिवार सशक्त होंगे और कुलगुरु-गुरुकुल परंपरा ही सनातन परिवार की जीवनरेखा है।”मोबाइल रूपी भस्मासुर से सावधान महाराज श्री ने वर्तमान समय में बढ़ते तलाक,टूटते पारिवारिक रिश्तों और सामाजिक विघटन पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए ‘मोबाइल रूपी भस्मासुर’ को एक बड़ा कारण बताया। उन्होंने कहा कि तकनीक का संतुलित उपयोग वरदान है,परंतु अनियंत्रित दुरुपयोग परिवारों के लिए विनाशकारी सिद्ध हो रहा है।v उनका स्पष्ट संदेश था “एक ही छत के नीचे मतभेद हो सकते हैं,मनभेद नहीं। परिवार का मुखिया यदि धैर्य,संयम और विवेक से कार्य करे तो हर संकट का समाधान संभव है।”कानून,न्याय और राजनीति पर बेबाक विचार महाराज श्री ने सामाजिक कुरीतियों के साथ-साथ दोषपूर्ण कानून व्यवस्था,न्यायपालिका की कमियों और दिशाहीन राजनीति पर भी निर्भीकता से प्रश्न उठाए। उन्होंने समाज को चेताया कि यदि परिवार और संस्कार सुरक्षित नहीं रहे,तो राष्ट्र की नींव भी कमजोर हो जाएगी।शंकराचार्य जी का पूर्ण समर्थन काशी के जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी नरेन्द्रानंद सरस्वती जी महाराज ने इस वैचारिक उद्घोष का पूर्ण समर्थन करते हुए कहा कि मंदिरों की संपत्ति केवल मंदिरों और सनातन धर्म के उत्थान में ही व्यय होनी चाहिए। उन्होंने न्यायपालिका की निष्पक्षता और समाज को विभाजित करने वाली राजनीति को राष्ट्र के लिए घातक बताया।सवा लाख कार्यकर्ताओं का संकल्प इस ऐतिहासिक अवसर पर महाराज श्री ने घोषणा की कि ऋषि सनातन संघ के माध्यम से शीघ्र ही सवा लाख समर्पित कार्यकर्ताओं का संगठन खड़ा किया जाएगा,जो संस्कार,सेवा और सामाजिक समरसता के लिए राष्ट्रव्यापी अभियान चलाएगा। सभा में संघ के वरिष्ठ पदाधिकारी श्रीमान सोनी एवं अनेक गणमान्य अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति रही। काशी की इस वैचारिक क्रांति ने स्पष्ट संकेत दे दिया है।सनातन परिवार की रक्षा का मार्ग कुलगुरु और गुरुकुल की पुनर्स्थापना से होकर ही जाता है।

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