दुर्व्यवस्था पर आंसू बहाता मिर्जापुर का चूना दरी का विहंगम जलप्रपात

तारा त्रिपाठी
अहरौरा (मीरजापुर) लिखनियादरी से लगभग दो किलोमीटर अंदर, जंगल की छाती को चीरते हुए दुरुह स्थान पर स्थित ,काफी ऊंचाई से गिरता हुआ पानी वाला विहंगम जलप्रपात चूना दरी सैलानियों के आकर्षण का केन्द्र होने के कारण हर मौसम में लोगों हठात अपनी ओर खींचता रहता है। यहां बरसात का पानी तो आता ही है इसके अलावा इसके ऊपर स्थित डोगियां बांध का पानी भी इसे सींचता रहता है। गिरते हुए झरने, चारो ओर पहाड़ों से घिरी वादियां, वृक्षों की झूमती डालिया, पशओं का रम्हना, पक्षियों का चहकना इस जलप्रपात में चार-चांद लगा देता है और लोगों को अनायास अपने आगोश में ले लेता है। वर्ष भर यहां कोलाहल तो रहता ही है पर बरसात में मेले जैसा दृश्य हो जाता है। ऐसी प्राकृतिक सौन्दर्यता ने जहां एक तरफ लोगों का दिल जीता तो वहीं दूसरी तरफ सैलानियों के लिए काल के गाल में समा जाने का अभिशाप भी बना। हर वर्ष लोग इस सौन्दर्यता का लुत्फ भी उठाते रहे और अपनी जान भी गंवाते रहे।वर्ष 2022में 9लोगों ने और 2025 में अब तक लखनऊ के दो युवकों ने अपनी जान से हांथ धो बैठे हैं जब कि अभी पूरा बरसात का सीजन बाकी है। ऐसे में जन चर्चा है कि प्रशासनिक दुर्व्यवस्था के चलते यह जलप्रपात अपने आप पर आंसू बहाने पर इसलिए मजबूर है क्यों कि यह अड्डा धन उगाही का केन्द्र होने के बाद भी सुरक्षा, सुविधा, सफाई और अनियन्त्रित भीड़ को कबू करने से मरहूम है। हर वर्ष वन विभाग द्वारा पार्किंग का ठेका दिया जाता है। जलप्रपात के अन्दर जाने का अलग शुल्क लिया जाता है किन्तु सुविधा और सुरक्षा के नाम पर नगण्यता देखी जाती है। न ही कोई गोताखोर नाही कोई जाल और नाही कोई रस्सी सिकड़और बाड़ आदि की व्यवस्था है। लजीज भोजन बनाने के बाद होने वाली गंदगी की सफाई की कोई व्यवस्था नहीं है। हर वर्ष लाखों रुपए की आमदनी के बाद व्यवस्था के नाम पर मुख मोड़ना जनता जनार्दन के साथ धोखा नहीं तो और क्या है। अब तक होने वाली सैकड़ों मौतौं के बाद भी सबक न लेना स्थानीय लोगों के साथ ही नहीं बल्कि बाहर से आने वाले लोगों के साथ एक प्रकार का षडयन्त्र है। वन विभाग द्वारा पार्किंग शुल्क लिया जाता तो है किन्तु यह पी डब्लू डी की सड़क पर लिया जाता है। इस पर भी सवालिया निशान लगा हुआ है। दबी जुबान से ही सही किन्तु विरोध प्रबल इसलिए है कि आमदनी के बाद भी सुविधा और सुरक्षा का अभाव है और सैलानी जान से हांथ धोने को मजबूर। यदि निकट भविष्य में लिखनियादरी, चूना दरी जलप्रपात पर समुचित सुरक्षा ,साफ-सफाई आदि की व्यवस्था नहीं की गई तो वो दिन दूर नहीं जब जन मानस सड़क पर उतर कर आन्दोलन करने को बाध्य न हो।




