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कवि सम्मेलनगाजीपुर

विकासोन्मुख गोष्ठी एंव काव्य क्रांति समारोह संपन्न

गाजीपुर। सिद्धेश्वर कालोनी, तुलसी सागर  में स्थि़त मिशन जामवंत के राष्ट्रीय संयोजक सूर्यकुमार सिंह के आवास पर पत्रकार समिति हाल में एक सरस काव्य -गोष्ठी का‌ कार्यक्रम सम्पन्न ‌हुआ। कवि हरिशंकर पाण्डेय ने “तेरे आने के पहले तक सभी के नैन का नूर था/सभी थे‌ आज‌ पास पर सभी आज‌ दूर‌ था।” सुनाकर प्रशंसा अर्जित की। अमरनाथ तिवारी ने-“अभी कैसे ‌जाएगा इक्कीसवीं सदी में अपना भारत पीने के पानी के‌ लिए‌ जहां मचता‌ हो महाभारत।” सुनाकर ‌तालियां बटोरी। महाकाव्यकार कामेश्वर द्विवेदी ने भेद‌ मिटे मानव-मानव का समता का आधार चाहिए/खण्डित हो दीवार घृणा की दिव्य प्रेम का गान चाहिए। सुनाकर खूब वाहवाही अर्जित की। मनोज कुमार यादव ने आज का दौर कुछ खास नहीं, बस‌ याद पुरानी‌ चाहिए।” प्रस्तुत कर प्रशंसा ‌पाया। उमाशंकर ‌यादव‌ ‘पथिक’ ने-मैं कवि हूं एक निराला,जग को‌‌ गीत‌ लिखूं मैं।’ सुनाकर लोगों के हृदय ‌को जीत लिया। ओज के ‌प्रतिष्ठित कवि दिनेश चन्द्र ‌शर्मा ‌ने-लेगा जग खून का बदला/कातिल को कत्लेआम ‌से थकने तो दीजिए।”सुनाकर श्रोताओं को सोचने के लिए मजबूर कर दिया। सफल संचालन दिनेश चन्द्र शर्मा ने ‌और अध्यक्षता  कामेश्वर ‌द्विवेदी ने किया। मुख्य अतिथि धर्मदेव यादव, विशिष्ट अतिथि उमेश चन्द्र राय एवं अमरनाथ तिवारी रहें। विकासोन्मुख गोष्ठी में प्रयागराज से गोरखपुर पूर्वांचल आयुष कॉरिडोर की रूप रेखा वनस्पति विशेषज्ञ सूर्यकुमार सिंह ने प्रस्तुत किया और पंजाब-‍हरियाणा के तर्ज पर उपरोक्त 30 जिलों में सवा-सवा करोड़ मुल्य के औषधिय पौधों के वृहद वृक्षारोपण, नेशनल मेडिशनल प्लांट बोर्ड आयुष मंत्रालय, भारत सरकार के सैजन्य से कराने के लंबीत प्रस्ताव को क्रियाविंत कराने प्रकिया पर भी प्रकाश डाला। वर्तमान में गाजीपुर में चल रहें सर्पगंधा विशेष पौधरोपण क्रम में नर्सरियों की तैयारी और बाढ़ क्षेत्र के घर-घर पौधरोपण प्रक्रिया को जुलाई मास में पूर्ण कराने का आश्वासन दिया। सूच्य है कि पूर्वांचल में बाढ़ के दौरान सर्पदंश से अधिकाधिक लोगों की मौत होती है, इसीलिए जरूरी है कि इस दैविय आपदा से निपटने के लिए हर घर में एक-दो पौधे गमलों में लगवाएं जाएं।

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