
वाराणसी।रक्षित धर्म ही हमारी रक्षा करता है।आज के इस कठिन समय में जहाँ चारों ओर से सनातन धर्म पर प्रहार हो रहे हैं।समाज का बौद्धिक वर्ग भी अन्धभक्ति के दौर से गुजर रहा है। ऐसे समय में सनातन की सञ्जीवनी के रूप में ज्योतिर्मठ के परमाराध्य शङ्कराचार्य जी महाराज प्रकट हैं। जो समय-समय पर अपनी दिव्य और अकाट्य वाणी से सनातन की लौ जलाए हुए हैं।उन्हीं के जीवन का संक्षिप्त परिचय ज्योतिर्मठ बदरिकाश्रम हिमालय के प्रकाशन सेवालय द्वारा प्रकाशित किया गया। जिसका संकलन साध्वी पूर्णाम्बा ने किया है। इसका विमोचन श्रीविद्यामठ में परमाराध्य परमधर्माधीश उत्तराम्नाय ज्योतिष्पीठाधीश्वर जगद्गुरु शङ्कराचार्य स्वामिश्रीं अविमुक्तेश्वरानन्दः सरस्वती १००८ के द्वारा किया गया। इस अवसर पर संविधान विशेषज्ञ डा अनिल भारद्वाज,साहित्यकार डा यतीन्द्र चतुर्वेदी,धर्मशास्त्री डा अवधराम पाण्डेय आदि विशिष्ट जन उपस्थित रहे।
रिपोर्ट- संजय पांडेय




