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एजुकेशन

कलम के सिपाही मो. नवाब की बेटी ने रचा इतिहास

94 फीसदी के साथ टाप 10 में बनाई पहचान

सरफराज अहमद

वाराणसी। कहा जाता है कि जब तालीम, तहज़ीब और तरबियत एक छत के नीचे मिल जाए, तो कामयाबी खुद दरवाज़ा खटखटाती है। इसका बेहतरीन उदाहरण बनीं सिटी मॉन्टेसरी स्कूल, चौक ब्रांच लखनऊ की छात्रा अर्जुमंद फातिमा, जिन्होंने 12वीं (ISC) कक्षा में PCM स्ट्रीम से शानदार 94% अंक हासिल कर टॉप-10 में अपनी जगह बनाई है।

इससे पहले ICSE बोर्ड में भी अर्जुमंद ने 98% नंबर लाकर अपने होनहार होने का सुबूत दिया था। ये सिर्फ आंकड़े नहीं, बल्कि उस जुनून की पहचान हैं, जो अर्जुमंद को देश की सबसे ऊँची प्रशासनिक सेवा—IAS—में ले जाने का ख्वाब दिखा रहे हैं। अर्जुमंद के पापा मोहम्मद नवाब, एक वरिष्ठ पत्रकार हैं जो उर्दू डेली ‘सहाफत’ से लंबे समय से जुड़े हैं। उनकी पहचान एक ईमानदार, ज़मीन से जुड़े और काबिल पत्रकार के रूप में रही है, जिनकी कलम ने हमेशा सच और इंसाफ़ की बात की है। लेकिन उनकी असल कामयाबी शायद ये है कि उन्होंने अपनी बेटियों को सिर्फ तालीम नहीं दी, बल्कि उन्हें बड़े ख्वाब देखना भी सिखाया।

बाराबंकी के कस्बा मित्तई से ताल्लुक रखने वाले नवाब करबला सिविल लाइंस पूर्व कमेटी के सक्रिय सदस्य रह चुके हैं और फिलहाल वक्फ नवाब अमजद अली खान के वाइस प्रेसिडेंट के तौर पर अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं। समाजी और दीनी खिदमात में भी उनका नाम एहतिराम से लिया जाता है। उनके चाचा अमीर हैदर एडवोकेट भी समाजसेवा के क्षेत्र में एक मक़बूल शख्सियत हैं।

नवाब भाई की दो बेटियां हैं और दोनों ही तालीम के मैदान में ग़ैर मामूली क़द्र हासिल कर रही हैं। अर्जुमंद की यह सफलता सिर्फ उनके परिवार के लिए नहीं, बल्कि बाराबंकी और लखनऊ के उन सभी परिवारों के लिए भी एक प्रेरणा है, जो बेटियों की तालीम को अपना फ़र्ज़ मानते हैं।

प्रेस फाउंडेशन ट्रस्ट और जिला पत्रकार एसोसिएशन बाराबंकी ने अर्जुमंद फातिमा और उनके पिता मोहम्मद नवाब को इस शानदार कामयाबी पर दिल से मुबारकबाद दी है। ट्रस्ट के पदाधिकारियों ने कहा कि अर्जुमंद की कामयाबी एक मिसाल है, और उम्मीद है कि वह आगे चलकर न सिर्फ अपने परिवार बल्कि पूरे मुल्क का नाम रोशन करेंगी।

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