
मुंबई की डाक्टर कनक लता तिवारी की काव्य कृति अमलतास के फूल किरदार से परिचित हुआ। हिन्दी और इंग्लिश भाषा की मर्मज्ञ, बहुमुखी प्रतिभा की धनी डाक्टर कनक लता तिवारी ने इंग्लिश साहित्य को पांच और हिन्दी साहित्य को आठ कालजयी कृतियों से समृद्ध करने का अभिनव सारस्वत प्रयास किया है ।गद्य ,पद्य दोनो विधा की कुशल शब्द शिल्पी डाक्टर कनक लता तिवारी का प्रतीक पब्लिकेशन,साकीनाका , मुंबई से सद्य: प्रकाशित काव्य संग्रह “अमलतास के फूल” सुन्दर शब्द शिल्प,सहज ,सरस ,बोधगम्य भाषा में सृजित कविताओं का खूबसूरत पुष्पगुच्छ है।
कवयित्री ने अपनी काव्य कृति “अमलतास के फूल” कालजयी गीतों के रचनाकार गोपाल दास नीरज को समर्पित की है। भूमिका साहित्य साधक मंच बेंगलूरु के अध्यक्ष एव़ संपादक वरिष्ठ साहित्यकार ज्ञानचंद मर्मज्ञ ने लिखी है। कवयित्री की 109 गीतों की सृजन यात्रा आराधना शीर्षक की कविता ईश वंदना से शुरू होती है। प्रारंभिक छह कविताएं कवयित्री के अध्यात्म प्रेम से पाठकों को परिचित कराती हैं। कवयित्री की 109 कदम की यह सृजन यात्रा बांसुरी नामक रचना पर विराम लेती है।
आध्यात्मिक रचना संसार के पार पाठक विविध विषयों पर केंद्रित कविताओं का रसास्वादन कर सकेंगे।कवयित्री अपनी “प्रश्न” शीर्षक कविता में देश के सम्मुख मूँह बाए खड़े सवाल मर्यादा पुरुषोत्तम राम से करती है ।इस बेहतरीन काव्य कृति ने मेरा परिचय डाक्टर कनक लता तिवारी के जिस वैदुष्य से कराया उसके आलोक में मैं आश्वस्त हूँ यह कृति पाठकों की अदालत में ही नहीं साहित्य जगत में भी सराही जाएगी।


