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यहां जानिए नबी कैसे मनाते थे ईद

नबी का रास्ता ही इंसानियत का पैग़ाम

अमन

वाराणसी। नबी-ए-करीम (स.) का दुनिया को दिखाया गया रास्ता ही इंसानियत का पैग़ाम है। प्यारे नबी ने अपनी 63 साल की जाहिरी जिंदगी में जो कुछ भी करने का अपनी उम्मत को हुक्म दिया उसे पहले खुद करके दिखाया। प्यारे नबी ईद भी सादगी से मनाया करते थे। इसलिए इस्लाम में सादगी से ईद मनाने का हुक्म है। नबी से जुड़ा एक वाक्या है, जिससे सभी को बड़ी सीख मिल सकती है।

एक बार नबी-ए-करीम हजरत मोहम्मद (स.) ईद के दिन सुबह फज्र की नमाज़ के बाद घर से बाज़ार जा रहे थे। कि आपको एक छोटा बच्चा रोता हुआ दिखाई दिया। नबी (स.) ने उससे कहा आज तो हर तरफ ईद की खुशी मनायी जा रही है ऐसे में तुम क्यों रो रहे हो? उसने कहा यही तो वजह है रोने की, सब ईद मना रहे हैं मैं यतीम हूं, न मेरे वालिदैन है और न मेरे पास कपड़े और जूते-चप्पल के लिए पैसा। यह सुनकर नबी (स.) ने उसे अपने कंधों पर बैठा लिया और कहा कि तुम्हारे वालिदैन भले नहीं हैं मगर मैं तुम्हे अपना बेटा कहता हूं। नबी-ए-करीम (स.) के कंधे पर बैठकर बच्चा उनके घर गया वहां से तैयार होकर ईदगाह में नमाज़ अदा की। जो बच्चा अब तक यतीम था उसे नबी-ए-करीम (स.) ने चन्द मिनटों में ही अपना बेटा बनाकर दुनिया का सबसे अमीर बना दिया। इसलिए नबी की तालीम है कि ईद आये तो आप भी एक दूसरे में खुशियां बांटे। इसे ईद-उल-फित्र इसलिए कहते हैं क्यों कि इसमें फितरे के तौर पर 2 किलों 45 ग्राम गेंहू जो हम खाते हो उसके दाम के हिसाब से घर के तमाम लोगों का सदाका-ए-फित्र निकालना होता है। सदका ए फित्र ईद की नमाज़ से पहले अदा करना अफ़ज़ल है। नहीं अदा किया तो आपका रोज़ा जमीन और आसमान के बीच में तब तक लटका रहेगा जब तक आप अदा नहीं कर देते। यानी ईद की नमाज़ के बाद भी सदका ए फित्र अदा किया जा सकता है। मगर ईद से पहले करने से गरीब और जरूरतमंद लोगों को वक्त रहते उनका हक़ उन्हें मिल जाता है। दरअसल जकात और फितरा इसलिए ही इस्लाम में बनाया गया है ताकि उससे ग़रीब और जरूरतमंद को उनका हक मिल सके। यूं तो ईद उसकी है जिसने रमज़ान भर इबादत कि और कामयाबी से रमज़ान का पूरा रोज़ा रखा और वक्त रहते फितरा और जकात अदा कर दिया। वहीं ईद मुबारक के दिन खुशियां बांटना भी सुन्नत है। छोटे छोटे मासूम बच्चे भले ही रमज़ान मुबारक और ईद के पैग़ाम को न समझते हों मगर इतना जरूर जानते हैं कि ईद आई है तो ईदगाह जाएंगे, घर के बड़े ईदी देंगे। इसलिए नबी के रास्ते पर चलें और ईद पर उनकी सुन्नतों और पैग़ाम को आम करें। ऐ परवरदिगार तू अपने हबीब के सदके और तुफैल में हम सबको ईद की खुशियां नसीब फरमा और नबी के रास्ते पर चलने की तौफीक दे… आमीन।

(लेखक-हिंदुस्तान संदेश के संपादक हैं।)

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