आजमगढ़ : जन्माष्टमी पर गूंजे सोहर और शंखनाद

गोविंद लाल शर्मा/आजमगढ़। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर शुक्रवार को पूरे जिले में भक्ति और उत्साह का माहौल रहा। सुबह से ही श्रद्धालुओं ने व्रत रखकर घरों और मंदिरों में आकर्षक झांकियां सजाईं। आधी रात को जैसे ही कान्हा का जन्म हुआ, पूरा क्षेत्र ढोल-मंजीरे, झाल, घंट-घड़ियाल और शंखनाद से गूंज उठा। महिलाओं ने पारंपरिक सोहर गाकर जन्मोत्सव मनाया। इस बार बाजारों में राधा-कृष्ण की प्रतिमाओं और विशेष झांकियों की भारी मांग रही। शहर के चौक स्थित ऐतिहासिक एवं प्रसिद्ध बिहारी जी मंदिर में जन्मोत्सव का उल्लास चरम पर रहा। यहां करीब दो सदी पुरानी दुर्लभ परंपरा का निर्वहन करते हुए एक ही दिन में दो बार—पहला दोपहर 12 बजे और दूसरा मध्यरात्रि 12 बजे—बालगोपाल का भव्य प्राकट्य कराया गया। मध्यरात्रि 12 बजते ही मंदिर प्रांगण “नंद के आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की” के जयकारों से गुंजायमान हो उठा। महाआरती के बाद श्रद्धालुओं में प्रसाद वितरित किया गया।बिहारी जी मंदिर में विशेष रूप से बनाया गया सेल्फी प्वाइंट युवाओं और बच्चों के लिए आकर्षण का केंद्र रहा । बिहारी जी मंदिर के अलावा पुलिस लाइन, शहर कोतवाली और जिले के अन्य प्रमुख मंदिरों में भी मनमोहक झांकियां सजाई गईं। मंदिर से जुड़े संत प्रसाद अग्रवाल ने बताया कि भगवान श्रीकृष्ण ने ब्रजवासियों की रक्षा के लिए 7 दिनों तक गोवर्धन पर्वत अपनी उंगली पर उठाया था। वे प्रतिदिन आठ प्रहर भोजन करते हैं, इसी कृतज्ञता भाव से 7 दिनों के हिसाब से जन्माष्टमी पर उन्हें 56 भोग अर्पित किया। संत प्रसाद अग्रवाल ने वर्तमान सांस्कृतिक परिवेश पर प्रसन्नता जताते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में सनातन संस्कृति का पुनर्जागरण हो रहा है। उन्होंने नगरवासियों से अपनी समृद्ध भारतीय संस्कृति और परंपराओं को बनाए रखने की अपील की।




