नई दिल्ली : हॉर्मुज में फिर बढ़ा खतरा, कच्चे तेल में फिर आई तेजी

नई दिल्ली। कच्चे तेल की कीमतों में सोमवार की बड़ी गिरावट के बाद मंगलवार को फिर तेजी दिख रही है।ईरान पर अमेरिका की सख्ती और हॉर्मुज में तेल की सप्लाई को लेकर बनी चिंता के बीच ब्रेंट और WTI दोनों के भाव बढ़े हैं। Investing.com के आंकड़ों के मुताबिक खबर लिखे जाने के समय ब्रेंट क्रूड का नवंबर वायदा 0.59 फीसदी यानी 0.53 डॉलर की तेजी के साथ 91.07 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था।दिन के कारोबार में यह 91.28 डॉलर तक पहुंचा।वहीं WTI क्रूड का अक्टूबर वायदा 0.73 फीसदी यानी 0.62 डॉलर बढ़कर 85.63 डॉलर प्रति बैरल पर था। इसका दिन का ऊपरी स्तर 85.84 डॉलर और निचला स्तर 84.75 डॉलर रहा। मिडिल ईस्ट में तनाव का असर इस साल कच्चे तेल की कीमतों पर साफ दिखा है। Investing.com के आंकड़ों के मुताबिक ब्रेंट क्रूड इस साल अब तक लगभग 49.84 फीसदी चढ़ चुका है,जबकि पिछले एक साल में इसमें लगभग 35.64 फीसदी की तेजी आई है। WTI क्रूड भी इस साल अब तक लगभग 49.29 फीसदी महंगा हो चुका है।एक साल में इसकी कीमत लगभग 35.53 फीसदी बढ़ी है।हालांकि पिछले एक महीने में ब्रेंट लगभग 0.55 फीसदी नीचे है, जबकि WTI लगभग 0.67 फीसदी ऊपर है। तेल की सप्लाई को लेकर चिंता उस समय फिर बढ़ गई,जब ब्रिटेन की यूनाइटेड किंगडम मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस यानी UKMTO ने बताया कि मंगलवार को एक तेल टैंकर पर अज्ञात प्रोजेक्टाइल से हमला हुआ।घटना ओमान के ऐश शिशाह से लगभग 9 नॉटिकल मील यानी 16.7 किलोमीटर उत्तर-पूर्व में हुई।हमले के बाद जहाज कुछ समय के लिए काम करने की स्थिति में नहीं रहा।यह घटना ऐसे समय हुई है, जब हॉर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर तनाव पहले से बना हुआ है।ईरान का कहना है कि इस अहम समुद्री रास्ते पर उसका नियंत्रण होना चाहिए।युद्ध शुरू होने से पहले दुनिया में इस्तेमाल होने वाले कुल तेल का लगभग 20 फीसदी हिस्सा इसी रास्ते से होकर गुजरता था। ईरान ने सोमवार को 45 ऐसे टैंकरों की पहचान करने का दावा किया,जिन्होंने उसके मुताबिक हॉर्मुज से गुजरते समय नियमों का उल्लंघन किया।ईरान ने इनके खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी भी दी है। इसमें जहाजों के कार्गो को जब्त करना भी शामिल हो सकता है।ऐसे में बाजार की नजर हॉर्मुज पर बनी हुई है। इस रास्ते से तेल की आवाजाही में बड़ी रुकावट आती है तो ग्लोबल सप्लाई प्रभावित हो सकती है और कच्चे तेल की कीमतों पर फिर दबाव बढ़ सकता है।
दूसरी तरफ अमेरिका ने ईरान पर आर्थिक दबाव और बढ़ाने का ऐलान किया है।अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने ईरान की आर्थिक गतिविधियों पर चोट करने के लिए प्रतिबंधों का दायरा बढ़ाने की घोषणा की है।बेसेंट के मुताबिक देशों को ईरान के साथ अपने कारोबारी रिश्ते खत्म करने होंगे। ऐसा नहीं करने पर उन्हें डॉलर आधारित वित्तीय व्यवस्था तक पहुंच खोने का जोखिम उठाना पड़ सकता है।हालांकि बेसेंट ने यह नहीं बताया कि किन देशों पर ये कदम लागू होंगे और नए प्रतिबंध कब से प्रभावी होंगे।
अमेरिका ने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की संभावना को भी पूरी तरह खारिज नहीं किया है।अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने सोमवार को कहा कि अमेरिका जरूरत पड़ने पर ईरान के खिलाफ सैन्य ताकत के इस्तेमाल से इनकार नहीं करेगा।हालांकि रॉयटर्स के हवाले से जानकारों का मानना है कि अमेरिका का जोर फिलहाल सैन्य कार्रवाई के बजाय आर्थिक दबाव बढ़ाने पर ज्यादा दिखाई दे रहा है।इससे मिडिल ईस्ट में तेल की सप्लाई को लेकर कुछ चिंता कम हुई है।
मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष के कारण तेल की सप्लाई को लेकर जोखिम बना हुआ है।इससे निपटने के लिए कई देश अपने कमर्शियल और स्ट्रैटेजिक तेल भंडार का इस्तेमाल कर रहे हैं।अमेरिकी ऊर्जा विभाग के मुताबिक पिछले सप्ताह अमेरिका के स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व में कच्चे तेल का भंडार करीब 37 लाख बैरल घटकर 28.97 करोड़ बैरल रह गया। यह नवंबर 1982 के बाद का सबसे निचला स्तर है।



