बिहार में छात्रों के खिलाफ पुलिस बर्बरता के विरोध में प्रदर्शन आज
आईसा अध्यक्ष नेहा बोरा ने प्रेस कांफ्रेंस में किया ऐलान

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आईसा की अध्यक्ष नेहा बोरा ने बिहार पुलिस पर छात्र प्रोटेस्टर्स पर बहुत खराब व्यवहार करने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि बिहार बंद से पहले पुलिस ने अलग-अलग जिलों से छात्रों को गिरफ्तार कर 20 से 24 घंटे तक थानों में भूखा रखकर उनके साथ मारपीट की गई। इसके बाद उनको बेउर जेल लाया गया। पुलिस ने मुस्लिम और दलित प्रदर्शनकारी छात्रों पर ज्यादा बर्बरता की है। मुस्लिमों को पुलिस ने आतंकवादी तक कहा था। 30 जुलाई को आईसा समेत अन्य छात्र संगठन बिहार के अलग-अलग जिलों में प्रदर्शन करेंगे। उन्होंने बुधवार को प्रेस कांफ्रेंस में ये बातें कहीं। उधर, बिहार के बाकीपुर में 30 जुलाई को ही उप चुनाव के लिए मतदान है।
बिहार डीजीपी विनय कुमार से मिले तो उन्होंने बताया कि छह सौ से अधिक प्रोटेस्टर्स को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। उसमें से तीन सौ से अधिक को छोड़ने का आदेश दिया जा चुका है। जो नोटिफिकेशन छात्रों को जेल से हिरा नहीं किया जाता हमारा प्रदर्शन जारी रहेगा। उन्होंने बताया कि छात्रों को पैरों में गोली मारी गई है। तमाम घायल छात्रों को बिना इलाज के जेल में डाल दिया गया। एक छात्र के पैर से गोली आरपार हो गई। उनके पैर में राड डालनी है। दलित छात्र के घायल होने के बाद भी पुलिस उसके साथ हिंसा करती है। नेहा ने बेउर जेल में बंद विधायकों और छात्रों से मुलाकात कर उनका हालचाल किया था।
बंगाल में तो मुख्यमंत्री ने 14 छात्रों को गिरफ्तार कराया है जिसमें 12 तो मुस्लिम हैं। उन्होंने 70 छात्रों को गिरफ्तार करने की बात कही थी लेकिन छात्र संगठन उनसे बात कर रहे हैं। अभी बिहार और असम की तरह बंगाल में कोई नोटिफिकेशन जारी नहीं हुआ। बंगाल में लीगल टीम केंद्र सरकार के दिए आश्वासन के सिलसिले में उनसे मुलाकात करेगी।उन्होंने कहा कि अभी हमारा प्रदर्शन खत्म नहीं हुआ है। दिल्ली पुलिस भी छात्रों पर पहले से दायर मामले बताकर उनको जेल भेजना चाहती है। जंतर मंतर पर शांति पूर्वक प्रदर्शन को पुलिस बदनाम करना चाहती है। पुलिस ने जो आश्वासन छात्रों को दिया है उससे पीछे न हटें।
नेहा बोरा ने कहा कि केंद्र सरकार के मंत्रियों ने लिखित आश्वासन दिया है कि बीजेपी शासित राज्यों में छात्रों में दर्ज मुकदमें वापस लिए जाएंगे। दिल्ली पुलिस ने जुनैद का भी एक तरह से अपहरण कर लिया था। उसे मसूरी में ले जाकर छोड़ा। पुलिस की वहां ले जाने की मंशा पर भी सवाल उठ रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने भी शांति पूर्वक प्रदर्शन को संविधान के मुताबिक बताया है। सुप्रीम कोर्ट ने भी प्रदर्शनकारी छात्रों पर दर्ज मुकदमों को वापस लेने का आदेश दिया है। नेहा बोरा ने भी जंतर-मंतर में 14 दिन का अनशन किया था। शबाना आजमी ने उनको जूस पिलाकर अनशन खत्म कराया था। उधर, बिहार में एके 47 चलाने का मामला संसद में भी छाया रहा। विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने दिल्ली में पैलेट गन चलाने पर गृह मंत्री अमित शाह को भी घेरा।



