
नई दिल्ली। भारत और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के बीच बढ़ते रणनीतिक संबंधों को आर्थिक और शैक्षिक मोर्चे पर एक नई गति मिली है। भारत-यूएई संयुक्त कांसुलर मामलों की समिति (जेसीसीए) की 7वीं बैठक नई दिल्ली में आयोजित हुई। इस उच्च स्तरीय बैठक का सबसे बड़ा और दूरगामी परिणाम भारतीय पेशेवरों, छात्रों और कामगारों के लिए खाड़ी देशों में बेहतर आर्थिक व शैक्षिक अवसरों के द्वार खोलना है। विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा बैठक की सह-अध्यक्षता सचिव (सीपीवी एवं ओआईए) रंगनाथन और यूएई के विदेश मंत्रालय के अवर सचिव उमर ओबैद मोहम्मद अल-हेसान अल-शम्सी ने की। भारत-यूएई के बीच गर्मजोशी भरे और सौहार्दपूर्ण संबंध हैं, जिनमें आर्थिक, राजनीतिक, रक्षा, प्रौद्योगिकी, सांस्कृतिक और ऊर्जा जैसे सभी क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग शामिल है। ये संबंध लोगों के बीच मजबूत संपर्कों पर आधारित हैं, जो यूएई में रहने वाले 45 लाख भारतीयों के समुदाय से और मजबूत होते हैं। मंत्रालय ने कहा बैठक से पहले दोनों पक्षों के बीच कांसुलर मुद्दों, श्रम और आवाजाही से जुड़े मामलों, तथा प्रत्यर्पण और आपसी कानूनी सहायता पर तकनीकी स्तर की चर्चा हुई। भारतीय शैक्षणिक डिग्री/दस्तावेजों के निर्बाध प्रमाणीकरण के लिए भारत के डिजिलॉकर को यूएई के प्लेटफॉर्म के साथ जोड़ने की दिशा में काम करने के लिए दोनों पक्षों के बीच एक अलग बैठक हुई। इससे यूएई में काम कर रहे भारतीय पेशेवरों को लाभ होगा और बेहतर आर्थिक व शैक्षिक अवसर मिलेंगे। इस ऐतिहासिक कदम से यूएई में नौकरी तलाशने वाले भारतीय पेशेवरों को दस्तावेजों के भौतिक सत्यापन के लंबे और खर्चीले प्रशासनिक झंझटों से मुक्ति मिलेगी। डिग्रियों का डिजिटल सत्यापन होने से भारतीय युवाओं को यूएई के वैश्विक कॉर्पोरेट बाजार में तत्काल रोजगार और पदोन्नति के बेहतरीन अवसर मिलेंगे। दोनों देशों के बीच हुए इन समझौतों से न केवल भारतीय कार्यबल की कानूनी सुरक्षा मजबूत होगी, बल्कि दोनों देशों के बीच व्यापारिक सुगमता को भी बढ़ावा मिलेगा। यह पहल भारत के कुशल कार्यबल को यूएई की विकास गाथा में एक सुरक्षित और सम्मानित भागीदार बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी।
(रिपोर्ट. शाश्वत तिवारी)




