काले कपड़ों में विपक्षी सांसदों का प्रदर्शन, शिक्षा मंत्री से इस्तीफा मांगा
संसद मार्च के दौरान छात्र-छात्राओं की बेहरमी से पिटाई के विरोध में पूरे देश में गुस्सा, कानपुर में कांग्रेस, सपा के बाद अधिवक्ताओं ने भी किया प्रदर्शन, जंतर-मंतर पर कॉक्रोचों का हौंसला हाई, विरोध फैला तो सरकार बैक फुट पर आई
आसिफ हुसैन ः कानपुर। नई दिल्ली में कॉक्रोच जनता पार्टी के सोमवार को जंतर-मंतर से संसद तक मार्च के दौरान छात्र-छात्राओं पर बेहरहमी से लाठीबाजी के बाद विरोध प्रदर्शन पूरे देश में फैल गया है। कानपुर में तो कांग्रेस, समाजवादी पार्टी के अलावा वकीलों ने भी छात्रों की पिटाई और गिरफ्तारी के विरोध में प्रदर्शन किया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से इस्तीफे की मांग की। खास बात यह है कि पूरे देश में गुस्सा फैलने के बाद भी केंद्र सरकार अपने शिक्षा मंत्री को बचाने में लगी है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा था कि मोदी सरकार में मंत्रियों के इस्तीफे नहीं होते। शायद इसी पर अमल करते हुए पूरी सरकार ही दांव पर लगाई जा रही है। संसद भी विरोधी दलों के भारी विरोध के बाद तीसरे दिन भी नहीं चली। सोनम वांचुक 25वें दिन भी भूख हड़ताल पर हैं।
मामला नीट परीक्षा लीक से शुरू हुआ था। परीक्षा लीक के बाद 20 से अधिक छात्र-छात्राओं ने तनाव के चलते खुद को ही खत्म कर लिया। इन बच्चों ने अपने माता-पिता को बिलखता छोड़ दिया। इसके बाद भी माफिया सिस्टम खत्म नहीं हुआ। नीट परीक्षा लीक के बाद भी शिक्षा मंत्री ने इस्तीफा नहीं दिया। सरकार अपनी रौ में रही कि कौन प्रदर्शन करेगा। जो करेगा उसके लिए तो सीबीआई, ईडी, आईटी और पुलिस है लेकिन छात्रों ने इसकी परवाह नहीं की। एक महीने से छात्र-छात्राएं जंतर-मंतर पर डटें हैं। वैज्ञानिक सोनम वांगचुक 25 दिन से भूख हड़ताल पर हैं। मेदांता में भर्ती सोनम से मिलने गए विरोधी दलों के सांसदों को नहीं मिलने दिया गया। उन्होंने वीडियो जारी कर छात्रों पर अत्याचार न करने की अपील की।
बुधवार को भी छात्र-छात्राएं जंतर-मंतर पर डटे हैं। यहां तक दिल्ली की सड़कों पर भी प्रदर्शन फैल गया है। लखनऊ, कानपुर, प्रयागराज, पटना, इटानगर तक छात्रों का गुस्सा फैल गया है। पटना में तो आइसा ने राज्यपाल के आवास तक मार्च निकाला। उनको रोकने के लिए पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े, बल का भी प्रयोग किया लेकिन संविधान की प्रति लेकर छात्र आगे बढ़ते गए। सोमवार को बिना वर्दी के लोगों ने बच्चों के साथ जिस तरह की हरकत की उससे तो आक्रोश और बढ़ गया है। सीजेपी फाउंडर अभिजीत दीपके का कहना है कि अब सरकार को जो बात करना है वह जंतर-मंतर पर आकर बात करे। समाजसेवी योगेंद्र यादव का कहना है कि अब छात्रों का डर खत्म हो गया है। पटना में तो छात्रों के गुस्सा के शिकार भाजपा विधायक भी हो गए। मुंबई में छात्रों ने प्रदर्शन कर नारे लगाए जब जब मोदी डरता है, पुलिस को आगे करता है। शिवाजी पार्क में पुलिस ने कई छात्र-छात्रों को डिटेन किया लेकिन उनका जोश ठंडा नहीं हुआ।
उधर, जंतर-मंतर पर छात्रों के समर्थन पर अभिभावक भी पहुंचे हैं। विपक्षी दलों के सांसदों के अलावा अन्य संगठनों के लोग भी अपना समर्थन दे रहे हैं। पांच मेंट्रो स्टेशन बंद होने के बाद भी जंतर-मंतर पूरा भरा रहा। बाहर रह रहे लोग बच्चों के लिए स्विगी, जोमैटो से खाना आर्डर कर भेज रहे हैं। प्रदर्शन में लोगों का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सामने आना चाहिए।
बुधवार को संसद शुरू होने पर लोकसभा स्पीकर ओम बिलरा ने छात्रों के मुद्दे पर चर्चा का प्रस्ताव रखा लेकिन राहुल गांधी, अखिलेश यादव ने पहले शिक्षा मंत्री का इस्तीफा मांगा। सरकार ने बात नहीं मानी तो विरोधी दलों के विरोध पर संसद की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी। इससे पहले सारे विपक्षी दल के सांसद काले कपड़ों में संसद गए थे। उन्होंने संसद के बाहर प्रदर्शन कर शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा मांगा। संसद में टीएमसी के तेजतर्रार सांसद कल्याण बनर्जी को भी भाजपा सांसद की शिकायत पर स्पीकर ने पूरे सत्र के लिए निलंबित कर दिया। इसका भी विपक्षी दलों ने विरोध किया है।
जेपी नड्डा बोले, हम चर्चा के लिए तैयार
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने प्रेस कांफ्रेंस में कहा कि हम चर्चा के लिए तैयार हैं। सारे पहलुओं पर चर्चा होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि छात्रों के आंदोलन का राजनीतिकरण नहीं होना चाहिए। उन्होंने शिक्षा मंत्री के इस्तीफे पर कोई बात नहीं की। वह सिर्फ चर्चा की बात पर ही अडे रहे। उन्होंने विपक्षी दल के नेता राहुल गांधी और सांसद अखिलेश यादव पर भी निशाना साधा।


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कान में पुलिस वाले कह रहे थे इस सरकार को हटाइयेः राहुल गांधी
कानपुर। कांग्रेस नेता व नेता विपक्ष राहुल गांधी ने कहा कि मंगलवार को जब पुलिस वाले उनको घसीट कर ले जा रहे थे तो कान में कह रहे थे कि इस सरकार को हटाइये। इस पर पूरे हाल में बैठे पत्रकार हंसने लगे। राहुल गांधी भी मुस्कुरा रहे थे। राहुल ने कहा कि छात्रों की मांग है कि शिक्षा मंत्री का इस्तीफा, छात्रों पर अत्याचार करने वालों सजा देना और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी माफी मांगें।
उन्होंने प्रेस कांफ्रेंस के दौरान यह भी दिखाया कि किस तरह पुलिस ने संसद मार्च के दौरान छात्र-छात्राओं को बेरहमी से पीटा और उनको गालियां दीं। छात्राओं के साथ भी पुलिस ने बहुत ही गलत व्यवहार किया। इस दौरान कांग्रेस महासचिव प्रियंका भी मौजूद थीं। पीएम आवास के सामने धरने पर बैठने के दौरान मंत्री जितेंद्र सिंह से बात पर कहा कि उनकी कोई हैसियत नहीं है।
भाजपा ने देश के सौहार्द को बाँटा
कानपुर। सपा मुखिया अखिलेश सिंह ने सोशल मीडिया पर लिखा कि भाजपा की सोशल-पॉलिटिकल क्रिमिनोलॉजी की क्रोनोलॉजी समझिए।
– भाजपा ने देश के सौहार्द को बाँटा
– अन्य राजनीतिक दलों को बाँटा
– राज्यों में बिरादरियों को बाँटा
– स्थानीय समाजों को बाँटा
– रिश्तेदारों व मित्रों को बाँटा
– संयुक्त परिवारों को बाँटा…
…अब ये बच्चों और उनके अभिभावकों तक को बाँटने तक पहुँच ही गए थे लेकिन इस बार ये कामयाब नहीं हो पाए क्योंकि दिलों के रिश्ते किसी के बाँटने से नहीं बँटते हैं।
अब तो कट्टर-से-कट्टर भाजपाई भी अयोध्या में भगवान के मंदिर तक को लूटनेवाले भ्रष्ट भाजपाइयों व उनके अनरजिस्टर्ड संगी-साथियों के ‘चढ़ावा-चंदा-दान चोरी’ कांड व दिल्ली में बच्चियों, बच्चों, माँ-बाप, डॉक्टर्स, पत्रकारों व आंदोलन के समर्थन में आए हर सच्चे-अच्छे भारतीय पर हुए अमानवीय हिंसक वार-प्रहार से बेहद शर्मिंदा हैं। कुछ ने भाजपा के विरोध में, तो कुछ ने जनता के आक्रोश का सामना न कर पाने के डर से, गाड़ियों और अपने घरों-दुकानों, मकानों से भाजपा के झंडे उतार दिये हैं।
अच्छा हुआ समय रहते सबकी आँखें खुल गईं हैं क्योंकि सबको अपने बच्चों के भविष्य की चिंता है और देश की एकता की भी। ये एक ख़ुशनुमा बदलाव है।
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जब सरकार न सुनेगी बच्चों की आवाज़…
एक दूसरी पोस्ट साझा कर सांसद व पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश ने लिखा-
जब सरकार न सुनेगी बच्चों की आवाज़…
तब विपक्ष को सड़कों पर आना ही होगा!
मुखिया जी के दरवाज़े पर जाना ही होगा!
जब बच्चों पे बेरहमी से होगा निर्मम वार…
तब विपक्ष को सड़कों पर आना ही होगा!
मुखिया जी के दरवाज़े पर जाना ही होगा!
जब सरेआम बच्चियों के फटेंगे लिबास…
तब विपक्ष को सड़कों पर आना ही होगा!
मुखिया जी के दरवाज़े पर जाना ही होगा!
जब करोगे दुखी माँ-बाप पर भी प्रहार…
तब विपक्ष को सड़कों पर आना ही होगा!
मुखिया जी के दरवाज़े पर जाना ही होगा!
जब हर एक नौजवां होगा हताश-निराश…
तब विपक्ष को सड़कों पर आना ही होगा!
मुखिया जी के दरवाज़े पर जाना ही होगा!
जब सत्ता का अहंकार होगा हद से पार…
तब विपक्ष को सड़कों पर आना ही होगा!
मुखिया जी के दरवाज़े पर जाना ही होगा!
जब सरकार बंद कर लेगी संसद के द्वार…
तब विपक्ष को सड़कों पर आना ही होगा!
मुखिया जी के दरवाज़े पर जाना ही होगा!
जब मौक़ा नहीं दोगे, न संसद में न बाहर…
तब विपक्ष को सड़कों पर आना ही होगा!
मुखिया जी के दरवाज़े पर जाना ही होगा!



