पीएम आवास के बाहर से राहुल, अखिलेश को खींचकर ले गई पुलिस
पीएम आवास के बाहर धरने पर कांग्रेसियों और विरोधी दलों के नेताओं के बैठने से सरकार के हाथ पैर फूले, संसद में छात्रों के मुद्दे पर चर्चा न कराने वाली सरकार को धरने पर राहुल से मिलने के लिए जाना पड़ा, संसद कूच के दौरान लाठियों के हमले से घायल होने के बाद भी छात्र-छात्राओं का जोश हाई, जंतर-मंतर पर विरोधी दलों के बड़े नेताओं ने छात्र-छात्राओं का हौंसला बढ़ाया, देर रात शिवसेना प्रमुख उधव ठाकरे भी पहुंचे
आसिफ हुसैनः कानपुर। नीट पेपर लीक के बाद शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग ने इतना बड़ा रूप ले लिया है। 12 साल में पहली बार मोदी सरकार को सत्ता से हाथ धोने का भय सताने लगा है। कॉक्रोच जनता पार्टी के आह्वान पर जंतर-मंतर पर धरने ने देशव्यापी रूप ले लिया है। सोमवार को संसद मार्च के दौरान छात्रों की बेहरमी से पिटाई ने मोदी सरकार की चूलें हिला दी हैं। इस आंदोलन की वजह से दो दिन से संसद नहीं चल पा रही है। मंगलावर को तो राहुल गांधी ने वह कर दिया जो किसी ने सोचा नहीं था। वह पार्टी नेताओं के साथ पीएम आवास के सामने ही धरने पर बैठ गए। इसके बाद कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, कर्नाटाक सीएम शिवकुमार, सपा प्रमुख अखिलेश यादव, प्रियंका गांधी, सांसद सुप्रिया सुले समेत विपक्षी दल से दिग्गज धरने पर पहुंच गए। मोदी सरकार के मंत्री जितेंद्र गृह सचिव के साथ राहुल गांधी से मिलने पहुंचे। उनकी पांच मांगों पर सिर्फ संसद में चर्चा की बात मान कर धरना खत्म करने का अनुरोध किया लेकिन कांग्रेस ने मना कर दिया। इसके बाद पुलिस राहुल, अखिलेश को घसीटते हुए थाने ले गई। बाद में सभी को छोड़ दिया गया। छात्र जब संसद की तरफ बढ़े तो उन पर आंसू गैस के गोले छोड़े गए। छात्र-छात्राओं को पुलिस ने बेहरमी से पीट दिया। सैकड़ों छात्र-छात्राओं के सिर पर गंभीर चोट लगी है। सैकड़ों छात्रों को पुलिस ने गिरफ्तार कर थानों की हवालात में डाल दिया है। छात्रों की पिटाई का मुद्दा राज्यसभा में मल्लिकार्जुन खरगे ने उठाया तो अनुमति नहीं मिली। लोकसभा अध्यक्ष से राहुल गांधी पार्टी नेताओं के साथ संसद में छात्रों के मुद्दे पर चर्चा कराने की मांग की तो उन्होंने सरकार से अनुमति लेने की बात कही। इसके बाद राहुल गांधी ने अपनी रणनीति बदली। शाम को वह पार्टी नेताओं के साथ पीएम आवास की ओर गए और वहीं पर धरने पर बैठ गए। इस पर हलचल मच गई। आनन-फानन में मंत्री जी राहुल गांधी को मनाने पहुंच गए। राहुल गांधी ने उनके सामने शिक्षा मंत्री का इस्तीफा, संसद में छात्रों की पिटाई पर चर्चा, गिरफ्तार छात्रों को रिहा करने आदि की मांग रख दी। धरने पर कांग्रेस मोदी सरकार और शिक्षा मंत्री से इस्तीफे के लिए नारेबाजी होने लगी।सोमवार को संसद कूच का आह्वान किया गया था लेकिन गृह मंत्री अमित शाह के निर्देश पर दिल्ली पुलिस छात्रों को रोकने के लिए मुस्तैद थे।
सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने कहा कि सबसे बुरा छात्रों के साथ हुआ है। निराशा पैदा करने का काम सबका साथ, सबका विकास करने वालों ने किया है। हिंसा की दोषी सरकार है। मंत्रियों पर दबाव इसलिए नहीं बना रही है कि कहीं वह उनके दबे राज न खोल दें। अमृत काल में नौजवान बेरोजगार हैं। यूपी में बीस पेपर लीक हुए हैं। उनके भ्रष्टाचार के टैंक बड़े हो गए हैं। टेट का पेपर लीक हो गया। पेपर लीक से परिवार प्रभावित हो रहे हैं। राम मंदिर में चंदा चोरी से पूरे देश में गुस्सा है। अब दूसरी एसआईटी से उस एसआईटी की पोल खुल जाएगी।
सांसद प्रियंका गांधी ने कहा कि छात्रों के साथ कल जो हुआ वह गलत हुआ। हमारी डिमांड एकदम दुरुस्त है। धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना चाहिए। छात्रों की बात गंभीरता से सुननी चाहिए। सरकार वंदेमातरम पर बिल ला रही है लेकिन छात्रों पर अत्याचार कर रही है। जब सरकार हमें धरने की अनुमति नहीं देती तो हम लोग वहां पहुंच गए जहां उनको उम्मीद नहीं थी।


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जंतर मंतर पर सोमवार की शाम को लगा था कि अब धरना समाप्त लेकिन छात्रों के जोश ने रात को फिर एक बार जोश दिखाया और जंतर-मंतर फिर भर दिया। सांसद पप्पू यादव, सांसद धर्मेंद्र यादव, एनसीपी सुप्रिमो शरद पवार, सांसद सुप्रिया सुले, सांसद संजय सिंह, सांसद चंद्रशेखर आजाद समेत अन्य विरोधी दलों के नेताओं ने जंतर-मंतर पहुंचकर छात्रों की हौंसलाअफजाई की। राहुल गांधी और अरविंद केजरीवाल लाठियों के हमले से घायल छात्र-छात्राओं को देखने के लिए अस्पताल भी गए। सीजेपी सप्रीमो अभिजीत दीपके का कहना है कि अब सरकार को बातचीत के लिए उनके पास ही आना होगा। छात्र-छात्रों की पिटाई से पूरे देश में आक्रोश फैल गया। देश के कई हिस्सों में छात्रों ने मार्च निकाल कर विरोध जताया। खास बात यह है कि मलाई की चाहत में पाला बदलने वाले सांसदों के भी हाथ पैर फूल गए हैं।
धरने पर हजारों को छात्र-छात्राएं हटे हैं। तमाम समाजसेवी संगठन उनके लिए भोजन और पानी का इंतजाम कर रहे हैं। अब सरकार के लिए आंदोलन से आसानी से निपट पाना मुश्किल है। इस आंदोलन के बीच अगर संसद में सरकार परिसीमन विधेयक फिर लाती है तो एक और आंदोलन के लिए रास्ता खोल देगी। सांसद चंद्रशेखर का कहना है कि पहली बार शिक्षा पर इतना बड़ा आंदोलन हुआ लेकिन सरकार ने संवाद की जगह जंतर-मंतर को जलियांवाला बाग बना दिया। महाराष्ट्र के शिवसेवा सुप्रीमो उधव ठाकरे, सांसद संजय राउत ने भी जंतर-मंतर पहुंच कर छात्रों को धन्यवाद दिया। उन्होंने छात्रों पर लाठीचार्च और आंसू गैस के गोले छोड़ने की घटना की निंदा की। उन्होंने आप लोग देश के भविष्य हैं।
मुख्य धारा का मीडिया धरने की पूरी तरह अनदेखी कर रहा था लेकिन सोमवार को भीड़ देखकर उसके भी होश उड़ गए। उसके बाद से मजबूरी में उनको धरना-प्रदर्शन की कवरेज करनी पड़ी। इस आंदोलन को जिस तरह से मोदी सरकार ने हलके में लिया उसकी भी निंदा हो रही है। सपा विधायक नसीम सोलंकी, पूर्व विधायक इरफान सोलंकी भी जंतर-मंतर पर अभिजीत दीपके से मिले। सोमवार को संसद के बाहर पीएम नरेंद्र मोदी ने छात्रों के प्रदर्शन पर एक शब्द नहीं बोला था लेकिन मंगलवार को उनको भी नीट पेपर लीक के दोषियों को कड़ी सजा देने की बात कहनी पड़ी। उधर, हाईकोर्ट ने सोनम वांगचुक को सफदरगंज अस्पताल से मेदांता शिफ्ट करने का आदेश दिया है। पुलिस डाक्टरों के भेष में भूख हड़ताल से उनको उठाकर अस्पताल में भर्ती करा दिया था।



