शहीद खामेनेई का जनाजा देख नम हुईं आंखें
गमगीन माहौल में सलमान और महबूबा ने भी पेश की खिराजेअकीदत, सरकार की तरफ से बिहार के राज्यपाल और विदेश राज्य मंत्री ने दी श्रद्धांजलि, तेहरान में एक विशाल हाल में खामनेई के साथ बेटी, दामाद और तीन साल की नातिन के रखे थे जनाजे, यूरोप के देशों को छोड़कर हर देश का प्रतिनिधिमंडल और राष्ट्राध्यक्ष पहुंचे
आसिफ हुसैन ः कानपुर। ईरान के शहीद सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह खामेनेई को खिराजेअकीदत पेश करने के लिए शुक्रवार को तेहरान में सौ से अधिक देशों के प्रतिनिधि मंडल पहुंचे। तेहरान में शहीद रहनुमा के साथ ही तीन और जनाजे रखे थे। कुरान की तिलावत की जा रही थी। सबसे पहले ईरान के राष्ट्रपति

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मसूद पजेश्कियान ने अपने मंत्रियों, स्पीकर के साथ खिराते तहसीन पेश की। इस दौरान उनकी आंखों से आंसू आ गए। भारत से गए प्रतिनिधिमंडल ने खिराजे अकीदत पेश की।
शहीद खामेनेई का जनाजा तेहरान में एक बड़े हाल में रखा गया। वहां धर्म गुरुओं, अधिकारियों, विदेशी प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों आदि ने 37 साल ईरान में शासन करने वाले अपने महबूब नेता को श्रद्धांजलि दी। उनका जनाजा आयतुल्लाह रुहुल्लाह खामेनेई की याद में बनाए गए विशाल हाल में रखा गया था। 86 साल के खामेनेई के साथ ही उनकी बेटी, दामाद, तीन साल की नातिन जनाजे रखे थे। 28 फरवरी को इस्राइल और अमेरिका के हवाई हमले में चारों की शहादत हो गई थी। उसके बाद से ही चारों के जनाजे सुरक्षित रख दिए गए थे। इस्राइल की धमकी की वजह से शहीद रहनुमा के बेटे मुजतबा खामेनेई जनाजे में नजर नहीं आए। भारत से मुसलमानों के साथ अन्य धर्मों के धर्मगुरुओं के एक प्रतिनिधिमंडल ने शहीद रहनुमा को श्रद्धांजलि दी। सरकार की तरफ से बिहार के गर्वनर लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन, विदेश राज्य मंत्री पबित्रा ने श्रद्धांजलि दी। इसके अलावा ईरान के बुलावे पर गए कांग्रेस नेता सलमान खुर्शीद, पवन खेड़ा, पीडीपी चीफ महबूबा मुफ्ती और जम्मू कश्मीर के शिया धर्मगुरु आगा सैयद हसन मोसवी ने कुरान की तिलावत कर खिराजे अकीदत पेश की। जनाजे के सामने महबूबा मुफ्ती समेत अन्य लोग अपनी भावनाएं नहीं रोक गए। उनकी भी आंखें नम हो गईं।
इसमें पाकिस्तान के पीएम शहबाज शरीफ, ताजिकिस्तान के राष्ट्रपति इमोमाली रहमान, आर्मेनिया के पीएम निकोल पाशिन्यान, जार्जिया के राष्ट्रपति मिखाइल कावेलाश्विली, रूस के पूर्व राष्ट्रपति दिमित्री गए, चीन के सांसद हे वेई, तुर्की के उपराष्ट्रपति, सऊदी अरब के उप विदेश मंत्री, इराक के राष्ट्रपति आदि शामिल रहे। ईरान ने पश्चिम देशों के लीडरों को नहीं बुलावा भेजा था। विदेशी प्रतिनिधिमंडल के नेताओं ने श्रद्धांजलि देने के बाद ईरान के राष्ट्रपति, विदेश मंत्री, स्पीकर आदि से मिलकर अपनी शोक संवेदना भी प्रकट की। जंग में शहीद हुए लोगों के परिजनों को भी जनाजे में शामिल होने के लिए बुलाया गया था।
अपने शहीद रहनुमा के जनाजे में शामिल होने के लिए लाखों की भीड़ जमा रही। मर्द और औरतें रहनुमा की देश और इस्लाम के लिए दी गई शहादत को याद कर रो रहीं थीं। उनका जनाजा कई दिनों तक जनता के दर्शन के लिए रखा रहेगा। इसके बाद ईरान के कर्बला जाएगा। वहां जाने के बाद इराक के कुम जनाजे को सुपुर्देखाक किया जाएगा।



