Slide 1
Slide 1
Blog

अमेरिका-ईरान के बीच खलनायक बन रहे नेतन्याहू

एमओयू पर दस्तखत होने के बाद भी इस्राइल के लेबनान पर हमले से नाराज ईरान, इस जंग में ईरान मजबूत होकर उभरा, खाड़ी देश में भी नए समीकरण बनेंगे

कानपुर। इस्राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते के बाद भी खलनायक की भूमिका निभा रहे हैं। इसकी वजह से वह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ही नहीं बल्कि विश्व के ज्यादातर देशों के निशाने पर हैं। फ्रांस में हुए समझौते में यह भी शर्त है कि इस्राइल लेबनान पर हमले नहीं करेगा लेकिन ट्रंप के कहने के बाद भी वह रुक नहीं करा है। इससे नाराज ईरान ने आगे की बातचीत रोक दी।

मालूम हो कि फरवरी में इस्राइल और अमेरिका ने अचानक ईरान पर हवाई हमला कर दिया था। इस दौरान हमले में ईरान के सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह खामनेई समेत दर्जनों टाप लीडरों और कमांडरों की शहादत हुई। इस जंग में ईरान ने बहादुरी दिखाई। उसने अमेरिकी बेसों को निशाना बनाकर जबरदस्त तबाही मचा दी। इसके अलावा मिसाइलों और ड्रोंने हमलाकर इस्राइल में तबाही मचाई। इस बीच ईरान ने स्ट्रेट आफ होर्मुज भी बंद कर दिया। इससे सारी दुनिया में एनर्जी का संकट पैदा हो गया।

पाकिस्तान की कोशिश से अप्रैल में इस्लामाद में अमेरिका और ईरान के बीच 21 घंटे लंबी बातचीत हुई। इसमें अमेरिकी राष्ट्रपति जेडी वांस और ईरान की तरफ से स्पीकर मोहम्मद बागेर गालिबाफ प्रतिनिधिमंडल के हेड थे। इस वार्ता में कोई डील नहीं हुई थी। बाद में अमेरिका ने सीजफायर आगे बढ़ा दिया। इस दौरान वार्ताकार दोनों को मनाने में लगे रहे। 17 जून को फ्रांस में एमओयू पर ट्रंप और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने दस्तखत किए।

इसमें साठ दिनों का समय दिया गया है। इस दौरान दोनों देशों में परमाणु कार्यक्रम और क्षेत्रीय मुद्दों पर सहमति बनेगी। इस एमओयू पर दस्तखत का असर यह हुआ कि स्ट्रेट आफ होर्मुज फिर खुल गया, तेल भरे जहाजों ही आवाजाही शुरू हो गई, अमेरिका ने कुछ सैंक्शंस हटा दिए जिससे अब ईरान अपना तेल बेच सकेगा। इस डील की दुनियाभर में तारीफ हुई लेकिन नेतन्याहू रोड़े अटकाता रहा। इसीलिए इसे मोस्टर तक कहा गया। इस्राइल को मानवता के लिए कोढ़ और शैतान बताया गया। खास बात यह भी है कि इस डील में किसी भी पक्ष ने इस्राइल को कोई तवज्जो नहीं दी। वह दूध की मक्खी की तरह बाहर ही रहा। यहां तक कि ट्रंप को कई बार इस्राइली राष्ट्रपति नेतन्याहू को डपटना भी पड़ा। इसके बाद भी वह अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहा है। एमओयू पर दस्तखत होने के बाद भी उसने लेबनान पर अटैक किया जिससे कई नागरिक और इस्राइली सैनिक भी मारे गए। इसका असर यह रहा कि शुक्रवार को आगे की वार्ता नहीं हो सकी। नेतन्याहू युद्ध जारी रख अपनी सत्ता बचाने की कोशिश कर रहा है। क्योंकि शांति हुई तो उसके भ्रष्टाचार के केस तेजी से खुल जाएंगे और उसे जेल भी जाना पड़ सकता है।

अब देखना यह होगा कि अमेरिका इस्राइल को किस तरह काबू में रख पाएगा। क्योंकि इस्राइल भी अमेरिका के ही टुकड़ों पर पल रहा है लेकिन इसके लिए ट्रंप को अमेरिका में यहूदी लाबी को भी कंट्रोल में रखना होगा। क्योंकि अब सबको मालूम हो गया है कि इस थोपी गई जंग में ईरान मजबूत बनकर उभरा है।

इस जंग से खाड़ी में भी सारे समीकरण बदल गए हैं। अब सऊदी अरब, कतर, ओमान, इराक, कुवैत, यूएई आदि देशों को अमेरिका पर निर्भरता खत्म करनी होगी। यह ईरान से सीखना होगा कि अपनी ताकत बढ़ाकर किस तरह सुपरपावर को घुटनों पर लाया जा सकता है। इसके अलावा इस्राइल को भी यह एहसास दिला दिया कि अब ईfile photoरान जहां पर चाहे उसे मार सकता है। इसके अलावा जिस तरह से चीन और रूस ने ईरान का साथ दिया वह भी चौकाने वाला है। दोनों देश किसी तरह भी अमेरिका के दबाव में नहीं आए। युद्ध के दौरान मजबूती के साथ ईरान के साथ खड़े रहे। ईरान ने भी दोनों देशों भरपूर अपने भरोसे में रखा। इसीलिए युद्ध के दौरान भी ईरान चीन को तेल की कमी नहीं होने दी।

ASIF HUSAIN

ASIF HUSAIN EDITOR मैंने अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी से हिंदी साहित्य में परास्नातक (मास्टर) करने के बाद ट्रांसलेशन में पीजी डिप्लोमा किया। इसके बाद पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया। 1997-98 में राष्ट्रीय सहारा में ट्रेनिंग की। इसके बाद 1998 में अमर उजाला कानपुर में ज्वाइन किया। अमर उजाला में कानपुर में रिपोर्टिंग की। गाजीपुर, चंदौली, भदोही, इटावा में ब्यूरोचीफ के पद पर रहा। इसके अलावा मुरादाबाद में संभल डेस्क प्रभारी रहा। झांसी में देहात डेस्क प्रभारी रहा। साथ में कई महत्वपूर्ण कार्यक्रमों की रिपोर्टिंग की। 2023-24 में अमर उजाला में सीनियर सब एडिटर पद से स्वैच्छिक रिटायरमेंट लिया। इसके बाद अपना यूट्यूब चैनल ‘ब्रिलियंट टाइम’ नाम से बनाया। वीकली अखबार भी इसी नाम से निकाला। ‘द्वाबा सम्राट हिंदी दैनिक’ में देश और विदेश पर लेख लिखे। वर्तमान में हिंदुस्तान संदेश से बतौर एडिटर जुड़ा हूं।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button