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नई दिल्ली

वर्ल्ड नो टोबैको डे

17 शहरों के 29 कैंसर हीलर सेंटरों में चला विशेष अभियान

नई दिल्ली। भारत में लाखों लोगों, खासकर कॉर्पोरेट पेशेवरों के बीच ‘चाय-सुट्टा’ ब्रेक दैनिक जीवन का हिस्सा बन चुका है। इसी आदत को बदलने के उद्देश्य से वर्ल्ड नो टोबैको डे के अवसर पर कैंसर हीलर सेंटर ने देशव्यापी जागरूकता अभियान चलाया। अभियान का उद्देश्य लोगों को तंबाकू के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करते हुए उन्हें इसे छोड़ने के लिए प्रेरित करना था। इस पहल ने यह संदेश दिया कि केवल चेतावनियों और डर पर आधारित संदेशों के बजाय सकारात्मक और लोगों से जुड़ने वाले प्रयास व्यवहार परिवर्तन लाने में अधिक प्रभावी हो सकते हैं। ब्रेक अप विद सुट्टा” नाम के इस अभियान के जरिए कैंसर हीलर सेंटर लोगों के बीच पहुंचा और स्थानीय चाय की दुकानों के साथ-साथ अपने केंद्रों को भी जागरूकता अभियान का हिस्सा बनाया। लोगों को यह समझाया गया कि तंबाकू कोई दोस्त नहीं, बल्कि ऐसी बुरी आदत है जो उनकी सेहत, समय और पैसे तीनों को नुकसान पहुंचाती है।

इस अभियान को लोगों का शानदार समर्थन मिला। 17 शहरों के 29 कैंसर हीलर सेंटरों में चलाए गए इस अभियान में एक ही दिन में 23,000 से अधिक लोगों ने तंबाकू से ‘ब्रेकअप’ करने का संकल्प लिया। इस दौरान 7,250 से अधिक सिगरेट जमा कराई गईं, 5,800 सिगरेट के पैकेट कैंसर हीलर सेंटर के ड्रॉप बॉक्स में डाले गए और 10,150 से अधिक लोगों ने ‘चाय अकेले ही बेहतर है’ संदेश वाले कपों में चाय पीकर धूम्रपान से दूरी बनाने का संदेश दिया। अभियान की सफलता और स्वास्थ्य जागरूकता के लिए नए दृष्टिकोण की आवश्यकता पर बात करते हुए, कैंसर हीलर सेंटर के मैनेजिंग डायरेक्टर डॉ. तरंग कृष्णा ने कहा कि कई वर्षों से तंबाकू की लत से निपटने के लिए डर और चेतावनियों को प्रमुख माध्यम बनाया जाता रहा है, लेकिन आज की युवा पीढ़ी पर ऐसे संदेशों का असर पहले जैसा नहीं रहा। स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े लोगों के तौर पर हमारी जिम्मेदारी केवल बीमारी का इलाज करना नहीं, बल्कि उन आदतों को बदलने का प्रयास करना भी है, जहां से समस्या शुरू होती है। ‘ब्रेक अप विद सुट्टा’ केवल जागरूकता फैलाने का अभियान नहीं था, बल्कि लोगों की सोच और व्यवहार में बदलाव लाने की एक पहल थी। हजारों युवाओं का स्वेच्छा से सिगरेट छोड़ना इस बात का प्रमाण है कि जब लोगों से सकारात्मक और संवेदनशील तरीके से जुड़ा जाता है, तो बड़े सामाजिक बदलाव संभव होते हैं। बेहतर जीवन की शुरुआत उसी दिन होती है, जब व्यक्ति अपने लिए बेहतर विकल्प चुनने का निर्णय लेता है।चाय के ब्रेक जैसे उस समय को केंद्र में रखकर, जब लोग अक्सर धूम्रपान करते हैं, कैंसर हीलर सेंटर ने हजारों लोगों के बीच स्वस्थ जीवनशैली, बेहतर रोग प्रतिरोधक क्षमता और दीर्घकालिक स्वास्थ्य को लेकर सार्थक संवाद शुरू किया। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार, तंबाकू के सेवन से हर साल दुनिया भर में 70 लाख से अधिक लोगों की मौत होती है। ऐसे में कैंसर हीलर सेंटर का ‘ब्रेक अप विद सुट्टा’ अभियान केवल एक जागरूकता कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक सकारात्मक जनआंदोलन के रूप में सामने आया है। इस पहल ने यह दिखाया है कि स्वास्थ्य संस्थान रचनात्मक और लोगों से जुड़ने वाले अभियानों के माध्यम से बड़े स्तर पर व्यवहार परिवर्तन लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

 

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